आख़िरकार कब जागेगा जिला प्रशासन कब होंगी कार्यावाही
पंचायत में खुलेआम भ्रष्टाचार
पंचायत पोर्टल में धुंधले बिल से बढ़ी आशंका, पारदर्शिता का अभाव
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला। मध्य प्रदेश के मंडला जिले की ग्राम पंचायत में भारी धांधली, मनमानी और लापरवाही हो रही है सरकारी योजनाओं में खुलेआम शासकीय धन में भ्रष्टाचार किया जा रहा है और जिला प्रशासन चुप्पी साध कर इन भ्रस्टो को भ्रष्टाचार करने को अवसर दे रहा है जहाँ जिले की अधिकांश पंचायतों के निर्माण कार्यों में क्रय किये गए मैटेरियल के बिल जो पंचायत दर्पण में लगातार भुगतान ले रहे है जो न पढ़ने में आ रहे है और न ही राशि और न जी एस टी नम्बर फिर में इन बिलो से धड़ल्ले से भुगतान हो रहा है और जनता के पैसों में सरपँच सचिव रोजगार सहायक और उपयंत्री को चौकडी धमाल मचाये हुए है।
वही शासन प्रशासन द्वारा इनकी कोई नियमित जांच पड़ताल नहीं की जा रही है सामाजिक अंकेक्षण भी सही तरीके से नहीं कराया जाता है सिर्फ औपचारिकता पूरी की जाती है नियमित रूप से विकास कार्यों की निगरानी और विकास कार्यों का निरीक्षण और विकास के लिए आवंटित धन के व्यय की जांच पड़ताल नहीं की जाती है यही वजह है कि इस जिले में ग्राम पंचायत में खुलेआम भ्रष्टाचार किया जा रहा है जिसकी वजह से विकास का धन धांधली करने वालों की जेब में जा रहा है जिले की नैनपुर, बिछिया और मंडला जनपद पंचायतों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में पंचायत दर्पण पोर्टल पर अपलोड किए जा रहे भुगतान बिलों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि निर्माण कार्यों और सामग्री खरीदी के नाम पर ऐसे बिल पोर्टल पर डाले जा रहे हैं, जो इतने धुंधले और अस्पष्ट हैं कि उनमें न तो दिनांक साफ दिखाई देती है और न ही जीएसटी नंबर अथवा भुगतान की वास्तविक राशि स्पष्ट हो पाती है।
बताया जा रहा है कि कई पंचायतों में लाखों रुपये के भुगतान ऐसे ही अस्पष्ट बिलों के आधार पर कर दिए गए हैं। पंचायत दर्पण पोर्टल का उद्देश्य ग्राम पंचायतों के कार्यों और व्यय में पारदर्शिता लाना था, ताकि आम नागरिक भी ऑनलाइन जानकारी देख सकें। लेकिन यहां स्थिति इसके उलट नजर आ रही है। आरोप है कि जानबूझकर बिलों को इस तरह स्कैन कर अपलोड किया जा रहा है कि उन्हें पढ़ा ही न जा सके, जिससे वास्तविक खर्च और कार्यों की जानकारी छिपी रहे।
सूत्रों के अनुसार, ग्राम पंचायतों के बिल सीधे पंचायत स्तर से अपलोड न होकर जनपद मुख्यालय के निजी कंप्यूटर सेंटरों के माध्यम से डाले जाते हैं। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि किन बिलों को स्पष्ट दिखाना है और किन्हें अस्पष्ट रखना है, इसका पूरा नियंत्रण कुछ निजी हाथों में है। कई पंचायतों में एक ही फर्म के नाम से बार-बार सामग्री खरीदी दिखाकर भुगतान किए जाने की बात भी सामने आई है।
जनपद पंचायत बिछिया की कुछ ग्राम पंचायतों और मंडला जनपद की गौंझीमाल पंचायत में बिना जीएसटी नंबर, बिना दिनांक और धुंधले बिलों पर बड़े पैमाने पर भुगतान किए जाने के आरोप लगे हैं। वहीं जिम्मेदार अधिकारियों पर इन मामलों की अनदेखी करने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
इस संबंध में जनपद पंचायत नैनपुर के सीईओ विनोद मरावी ने स्वीकार किया कि पोर्टल पर कुछ बिल स्पष्ट नहीं दिखाई दे रहे हैं और इसकी जांच कराई जाएगी। वहीं जिला पंचायत सीईओ एसएस मीणा ने कहा कि भुगतान से जुड़े बिलों का स्पष्ट होना आवश्यक है और तकनीकी या अन्य कारणों से यदि गड़बड़ी हो रही है तो उसकी जांच कराई जाएगी। नागरिकों की मांग है कि इस संबंध में सभी ग्राम पंचायत की जांच पड़ताल की जाए और जो बिल अपलोड किए गए हैं उसका भौतिक सत्यापन किया जाए तो सच्चाई उजागर हो सकती है