ज्ञानोदय आवासीय विद्यालय जबलपुर में करोड़ों की खरीदी पर गंभीर आरोप

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फर्जी बिलिंग, अपंजीकृत दुकानों से खरीद और जीएसटी भुगतान में अनियमितताओं की शिकायत

दैनिक रेवाँचल टाईम्स – जबलपुर। ज्ञानोदय आवासीय विद्यालय, शारदानगर रांझी, जबलपुर में वर्ष 2020 से 2025 के बीच की गई सामग्री खरीदी को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। मामले में प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा) ग्वालियर को विस्तृत शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की ऑडिट एवं स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। शिकायत आरटीआई के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर प्रस्तुत की गई है।

शिकायत के अनुसार विद्यालय की स्थापना के बाद से दिसंबर 2025 तक की लगभग समस्त खरीदी एक ही फर्म – “संस्कारधानी दलित इंटरप्राइजेज, जबलपुर” से कराई गई, जबकि नियमों के अनुसार अन्य फर्मों से भी तुलनात्मक कोटेशन लिया जाना आवश्यक था। आरोप है कि विद्यालय द्वारा अपंजीकृत व अस्तित्वहीन दुकानों के नाम से फर्जी कोटेशन तैयार कर खरीदी की प्रक्रिया पूर्ण दिखाई गई।

फर्जी बिल, एक ही नंबर से कई बिल

दस्तावेज़ों में उल्लेख है कि कोषालय देयक क्रमांक 51 दिनांक 05 अगस्त 2021 में दर्शाई गई सामग्री (इलेक्ट्रॉनिक मार्कर, पेपर मशीन आदि) का वास्तविक वितरण विद्यालय या छात्रावास में नहीं किया गया। इसके बावजूद बिल क्रमांक 18 (20.03.2021) से लेकर बिल क्रमांक 19 तक एक ही बिल नंबर का उपयोग कर भुगतान किया गया। संबंधित स्टाफ ने लिखित रूप में बताया कि उन्हें सामग्री प्राप्त नहीं हुई तथा उनके हस्ताक्षर फर्जी तरीके से बनाए गए।

कोटेशन प्रक्रिया पर सवाल

शिकायत में कहा गया है कि कोटेशन प्रक्रिया में केवल एक ही पत्र से तीन दुकानदारों को आदेश जारी किए गए। दिनांक 24 मार्च 2022 को जारी कोटेशन पत्र में ओवरराइटिंग पाई गई। किसी दुकान में 26 मार्च तो किसी में 27 मार्च को कोटेशन जमा दिखाया गया, जबकि सामग्री की मांग किसी कर्मचारी या छात्रावास द्वारा नहीं की गई थी। तुलनात्मक पत्र केवल प्राचार्य द्वारा अनुमोदित किया गया, अन्य सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं पाए गए।

कोरोना काल में भी अनियमित खरीदी

दस्तावेज़ों के अनुसार कोरोना काल में, जब शासन द्वारा विद्यालय बंद रखने के निर्देश थे, उस समय भी परीक्षा सामग्री, खेल सामग्री, किचन सामग्री, कंप्यूटर सामग्री आदि की भारी मात्रा में खरीदी दर्शाई गई। जबकि विद्यालय में उस समय कक्षाएं संचालित नहीं थीं। शिकायत में इसे सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला बताया गया है।

जीएसटी भुगतान में भी गड़बड़ी

फर्म द्वारा जारी देयकों में जीएसटी नियमों का पालन नहीं किया गया। कार्यालय द्वारा जीएसटी काटकर भुगतान किए जाने के बावजूद न तो जीएसटी जमा किए जाने का प्रमाण लिया गया और न ही चालान प्रस्तुत किए गए। आरटीआई से प्राप्त जानकारी में जुलाई 2025 व दिसंबर 2025 तक करोड़ों रुपये के भुगतान संस्कारधानी दलित इंटरप्राइजेज को किए जाने का उल्लेख है।

सीसीटीवी भुगतान पर भी प्रश्न

लाखों रुपये के भुगतान के बावजूद विद्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों का भुगतान जानबूझकर नहीं किया गया। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि लगभग 800 छात्र-छात्राओं वाले विद्यालय में सुरक्षा व्यवस्था पर लापरवाही बरती गई।

जांच की मांग

शिकायतकर्ता ने प्रधान महालेखाकार से मांग की है कि..पूरे प्रकरण की स्वतंत्र ऑडिट कराई जाए..बाजार दर और भुगतान दरों में अंतर निकाला जाए..
वास्तविक सामग्री की आपूर्ति और वितरण की भौतिक जांच की जाए..
कोटेशन और बिलिंग प्रक्रिया की गहन जांच हो..शासन को हुई संभावित आर्थिक क्षति का आंकलन किया जाए…शिकायत की प्रतिलिपि अनुसूचित जाति कल्याण विभाग, भोपाल को भी भेजी गई है, ताकि जिला स्तर से बाहर के अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।

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