ग्राम पंचायत निवारी में गंदगी का अंबार

स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण की हकीकत आई सामने, कागजों में साफ-सफाई, जमीन पर बदहाली

2

स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण की हकीकत आई सामने, कागजों में साफ-सफाई, जमीन पर बदहाली

रेवांचल टाइम्स नैनपुर मंडला |स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश और प्रदेश को स्वच्छ बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन नैनपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत निवारी में इन दावों की हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। यहां वर्ष 2020–21 में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अंतर्गत सामुदायिक स्वच्छता परिसर (सार्वजनिक शौचालय) का निर्माण कराया गया था, जिसकी स्वीकृत राशि 3.44 लाख रुपये बताई जा रही है। अफसोस की बात यह है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद यह सार्वजनिक शौचालय आज खुद गंदगी का केंद्र बन चुका है।

लोक सेवा केंद्र के सामने बना, फिर भी बदहाल

ग्राम पंचायत निवारी में यह सामुदायिक शौचालय लोक सेवा केंद्र के ठीक सामने बना हुआ है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीणों की आवाजाही रहती है। इसके बावजूद शौचालय की हालत इतनी खराब है कि कोई भी व्यक्ति अंदर प्रवेश करने की हिम्मत नहीं कर सकता। शौचालय के दरवाजे के पास ही गंदगी फैली हुई है, चारों ओर बदबू का माहौल है और परिसर पूरी तरह से बजबजा रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इस शौचालय की साफ-सफाई नहीं कराई गई है। न तो नियमित सफाई कर्मी दिखाई देते हैं और न ही कचरा प्रबंधन की कोई व्यवस्था नजर आती है। परिणामस्वरूप यह सार्वजनिक सुविधा अनुपयोगी बनकर रह गई है।

रखरखाव के अभाव में बेकार पड़ी सरकारी संपत्ति

ग्रामीणों के अनुसार, शौचालय निर्माण के बाद ग्राम पंचायत द्वारा इसके रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। समय-समय पर सफाई न होने के कारण गंदगी बढ़ती चली गई और अब स्थिति यह है कि लोग इसका उपयोग करने से कतराने लगे हैं। कई लोगों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है, जो स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्य पर सीधा सवाल खड़ा करता है।

कागजों में साफ-सफाई, हकीकत कुछ और

सबसे गंभीर आरोप यह है कि ग्राम पंचायत द्वारा स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत साफ-सफाई का कार्य केवल कागजों में दिखाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत रिकॉर्ड में नियमित साफ-सफाई और रखरखाव दर्शाया जाता है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। यदि वास्तव में नियमित सफाई कराई जाती, तो शौचालय की यह दुर्दशा कभी नहीं होती। इससे यह संदेह गहराता है कि कहीं न कहीं लापरवाही या मिलीभगत के चलते सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है।

स्वच्छता मिशन की छवि को नुकसान

स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को बढ़ावा देना और खुले में शौच की प्रवृत्ति को समाप्त करना है। लेकिन ग्राम पंचायत निवारी में सामुदायिक शौचालय की बदहाली इस मिशन की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। जब सार्वजनिक शौचालय ही उपयोग के लायक न हों, तो ग्रामीणों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करना महज दिखावा बनकर रह जाता है।

स्वास्थ्य पर भी मंडरा रहा खतरा

गंदगी और बदबू के कारण आसपास के क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ सकता है।

ग्रामीणों की प्रशासन से मांग

ग्राम पंचायत निवारी के ग्रामीणों ने इस मामले में जिला और जनपद प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि—

सामुदायिक शौचालय की तत्काल निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच की जाए ।जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही सामने आए, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए

ग्राम पंचायत में सफाई कर्मियों की नियमित तैनाती सुनिश्चित की जाए

साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन की स्थायी एवं प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए।

यह मामला केवल एक शौचालय की बदहाली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। लाखों रुपये की लागत से बनी सुविधा यदि कुछ ही वर्षों में अनुपयोगी हो जाए, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

अब देखना यह है कि प्रशासन इस ओर कब तक संज्ञान लेता है और क्या ग्राम पंचायत निवारी में स्वच्छता की स्थिति में वास्तविक सुधार हो पाता है या फिर स्वच्छ भारत मिशन केवल कागजों तक ही सिमटकर रह जाएगा

Leave A Reply

Your email address will not be published.