आखिर ये कैसा सम्मान कचरे के ढेर और अतिक्रमण पर खड़े महापुरुष की प्रतिमाएं

दैनिक रेवांचल टाइम्स मंडला/ एक तरफ जहां हमारे प्रधानमंत्री डिजिटल इंडिया और स्वक्ष भारत की बात करते हैं। तो वहीं इतर इसके विरोध में पूरे मंडला शहर की सड़कों को देखे तो कचरों के ढेरों और धूलों के गुबार से रंगी हुई नज़र आती हैं। सड़कों के किनारे लगे कचरे के ढेर और धूल भरे ग़ुबारों ने शहर वासियों का जीना हरम कर रखा हैं। तो वहीं कचरों से पटे पड़े इस शहर में महापुरुषों की प्रतिमाएं भी अछूती नहीं दिख रहीं हैं। और शहर में जो महापुरुषों की प्रतिमाएं विराजमान हैं।
वही उनके आसपास बदबू का साम्राज्य है, गंदगी अतिक्रमण आवारा कुत्तों का पहरा है और नीचे नगर पालिका की संवेदनहीनता फैली हुई है। लेकिन चिंता किसे है? प्रतिमाएं तो अनंत काल तक खड़ी रहने के लिए ही बनाई जाती हैं—चाहे सम्मान के चौराहे पर हों या कचरे के पहाड़ पर।
कभी जिन महापुरुषों ने स्वच्छता, नैतिकता और आदर्शों की बात की थी, आज उन्हीं के चरणों में पॉलीथिन, सड़े फल और टूटे सपने पड़े हैं। उद्घाटन के दिन और उनके जयंती के समय नेताओं और समाज सेवियों के द्वारा माला पहनाई जाती है और फूल चढ़ाए थे, फोटो खिंचवाई थी, भाषण दिए थे। उसके बाद प्रतिमा को उसके हाल पर छोड़ दिया गया—जैसे आदर्शों को चुनाव बाद छोड़ दिया जाता है।
यह दृश्य व्यंग्य नहीं तो और क्या है?
महापुरुष मौन हैं, क्योंकि प्रतिमाएं बोल नहीं सकतीं। अगर बोल पातीं तो शायद पूछतीं—
“क्या यही सम्मान है?
क्या यही संस्कार हैं?”
*कचरे के ढेर में मिलीं महापुरुषों की प्रतिमाएं*
नगर के अंदर और चौराहो में विभिन्न वार्डों में महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित की गई है पर उनकी रेखदेख नही हो पा रही है और जिम्मेदार प्रशासन इन्हें भूल चुके है इन्हें केवल इनकी वर्षगाँठ में ही याद किया जा रहा है जहाँ जगह जगह अतिक्रमण ओर गन्दगी कचरों के ढेर में खड़ी दिखती हैं, तो वहीं धूल से पटी पड़ी हैं। जिससे स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश हैं। प्रतिमाओं के आसपास गंदगी प्लास्टिक और बदबू फैली हुई हैं, जिससे क्षेत्र की छवि भी धूमिल हो रही हैं।
तो वहीं स्थानीय लोगों का कहना हैं कि प्रतिमाएं तो बहुत पहले ही स्थापित की गई थी, परन्तु नगर पालिका प्रशासन की अनदेखी के चलते इनका रख रखाव और साफ सफाई को लेकर नगर पालिका और संबंधित विभागों के द्वारा उनके रख- रखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। इस शहर की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई हैं, तो वहीं प्रतिमाओं के सम्मान और सुरक्षा की अनदेखी की जा रहीं हैं।
समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों ने इसे महापुरुषों के अपमान के साथ- साथ प्रशासनिक लापरवाही बताया हैं। और प्रतिमाओं के सम्मान में नियमित साफ सफाई की व्यवस्था की जाएं।
वही जब दैनिक रेवांचल समाचार पत्र की टीम ने जिले में बने महापुरुषों के स्मारको के आसपास गंदगी और जगह जगह कूड़े के ढेर बने हुए है और सब्जी वालों गैराज और फल वालों ने अतिक्रमण कर गंदगी कर के रखने के सम्बन्ध में नगरपालिका अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनके द्वारा कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी।