मंडला में किसानों के साथ गद्दारी – “किसान कल्याण” आफिस बना अफसर कल्याण विभाग!

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किसानों का आरोप – उपसंचालक और कर्मचारी हजम कर रहे योजनाओं की मलाई, असली किसान ठगा हुआ

दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला, आदिवासी बाहुल्य जिले में मध्यप्रदेश सरकार किसानों की खुशहाली के लिए करोड़ों की योजनाएं चला रही है, लेकिन मंडला जिले का किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग अब किसानों के लिए नहीं, बल्कि अफसरों और रसूखदारों के लिए “कल्याण विभाग” बन गया है।
किसानों के मुताबिक –
उपसंचालक और कर्मचारी योजनाओं की जानकारी छुपाते हैं।
सब्सिडी और अनुदान में खुला गोलमाल चलता है।
लाभ पाने के लिए पैसा और पहुंच ही असली टिकट है।
किसानों की कराह – हमें नहीं मिलता असली हक गांव-गांव से उठ रही आवाज़ साफ कह रही है –
“न बीज मिला, न खाद, न ही अनुदान… सिर्फ फाइलों में दिखाया जाता है कि सब बांटा गया।”
हर साल घोषणाओं का ढोल बजता है, लेकिन हमारी जिंदगी में कुछ नहीं बदलता।”
उपसंचालक और अफसरशाही अपने फायदे का खेल खेल रही है, किसान भूखे-प्यासे ठगे जा रहे हैं।”
कागज़ी सफलता – जमीनी नाकामी
किसानों का आरोप है कि विभाग की योजनाएं सिर्फ कागज़ों और बैठकों में “सफल” दिखाई जाती हैं, जबकि हकीकत में पात्र किसान दर-दर भटक रहे हैं। सब्सिडी का कोई स्पष्ट ब्योरा जनता के सामने नहीं रखा जाता। सवाल यह है कि आखिर किसके पेट में जा रही है योजनाओं की मलाई?
जांच और कार्रवाई की मांग
नाराज किसानों ने साफ कहा –
1. कृषि योजनाओं की उच्च स्तरीय जांच हो।
2. उपसंचालक कृषि विभाग सहित दोषी अफसरों की जवाबदेही तय हो।
3. सभी किसानों को गांव-गांव में योजनाओं का सीधा लाभ दिया जाए।
सबसे बड़ा सवाल
जब करोड़ों रुपये “किसान कल्याण” के नाम पर खर्च हो रहे हैं, तो मंडला का किसान अब भी कर्ज और भूख से क्यों जूझ रहा है? क्या “किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंडला” सचमुच किसानों का विभाग है या फिर अफसरों के लिए मलाई चाटने का अड्डा बन चुका है?

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