पुलिस विभाग में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भर्ती, मामला दर्ज

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दैनिक रेवांचल टाइम्स– मंडला दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला, मध्यप्रदेश के मंडला जिले से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ पुलिस विभाग में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भर्ती किए जाने का खुल है। वर्ष 2025 में नक्सल प्रभावित थाना क्षेत्रों में संचालित विशेष सहयोगी दस्ता अभियान के तहत की गई भर्ती अब सवालों के घेरे में है। जांच में सामने आया है कि भर्ती हुए कुछ अभ्यर्थियों ने फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र जमा किए थे। इस मामले में मंडला पुलिस ने संबंधित अभ्यर्थियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है। दरअसल वर्ष 2025 में मंडला जिले के नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से विशेष सहयोगी दस्ता अभियान चलाया गया था। इस अभियान के अंतर्गत पुलिस विभाग में कुल 95 अभ्यर्थियों की भर्ती की गई थी। भर्ती प्रक्रिया के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों की जब बाद में गहन जांच की गई, तो कुछ अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत की गई मार्कशीट और शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी पाए गए। इसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया। जांच में यह भी सामने आया कि ग्रेट मदर इंडिया स्कूल, मवई द्वारा कुछ अभ्यर्थियों को फर्जी मार्कशीट उपलब्ध कराई गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम बिछिया सोनाली देव के नेतृत्व में एक जांच समिति गठित की गई। समिति द्वारा दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई, जिसमें स्कूल की कई मार्कशीट पूरी तरह फर्जी पाई गईं। जांच के दौरान यह पाया गया कि कुछ अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत की गई मार्कशीट फर्जी हैं। ये मार्कशीट ग्रेट मदर इंडिया स्कूल, मवई से संबंधित हैं। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अभ्यर्थियों के खिलाफ मवई थाने में मामला दर्ज किया गया है।”
इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। जिला परियोजना समन्वयक द्वारा भी दस्तावेजों की समीक्षा की गई, जिसमें स्कूल की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
फर्जी दस्तावेजों के सहारे पुलिस भर्ती में शामिल होना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि जिले की सुरक्षा व्यवस्था के साथ भी बड़ा खिलवाड़ माना जा रहा है।

ग्रेट मदर इंडिया स्कूल, मवई की कुछ मार्कशीट संदिग्ध पाई गई हैं। एसडीएम के निर्देश पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया है। साथ ही विद्यालय के खिलाफ कार्रवाई और उसकी मान्यता निरस्त किए जाने के संबंध में उच्च अधिकारियों को पत्राचार किया गया है। वरिष्ठ अधिकारियों से आदेश मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल मंडला पुलिस द्वारा मामले की गहन जांच जारी है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, और क्या यह किसी बड़े संगठित गिरोह का हिस्सा है।
वहीं दूसरी ओर, इस खुलासे के बाद पुलिस भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।

कुल मिलाकर, मंडला जिले में पुलिस भर्ती के नाम पर हुआ यह फर्जीवाड़ा न केवल प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि भविष्य की भर्तियों के लिए भी एक चेतावनी है।
अब देखना होगा कि जांच के बाद दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है और क्या इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।

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