थाना टिकरिया बना अवैध वसूली का अड्डा? दो आरक्षकों पर गंभीर आरोप, पुलिस की छवि पर सवाल

दैनिक रेवांचल टाईम्स – नारायणगंज/टिकरिया। थाना टिकरिया क्षेत्र में अवैध वसूली को लेकर पुलिस विभाग की छवि पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और सूत्रों के हवाले से सामने आ रहा है कि थाना क्षेत्र में संचालित कई वैध-अवैध गतिविधियों पर कथित रूप से कुछ पुलिसकर्मियों का संरक्षण बना हुआ है।
सूत्रों का दावा है कि थाना टिकरिया में पदस्थ दो आरक्षक अवैध वसूली में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। आरोप है कि ओवरलोड डंपर, रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियाँ, मुरम-पत्थर परिवहन, ऑटो संचालन, मवेशी तस्करी और सट्टा जैसे अवैध कार्यों से नियमित रूप से वसूली की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि थाना क्षेत्र में कोई भी गतिविधि—चाहे वैध हो या अवैध—इन कथित आरक्षकों की “अनुमति” के बिना संभव नहीं है। बिना तय राशि दिए न तो वाहन चल सकता है और न ही अवैध धंधे बंद या शुरू होते हैं।
सूत्रों के अनुसार, ये दोनों आरक्षक खुद को थाना प्रभारी से कम नहीं समझते और कथित रूप से पूरे थाना क्षेत्र की “वसूली व्यवस्था” को नियंत्रित करते हैं। हैरानी की बात यह है कि इतनी गतिविधियों के बावजूद थाना प्रभारी तक इसकी जानकारी नहीं पहुँच पा रही—या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है, ऐसा भी सवाल उठाया जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि
“अब पुलिस से बात भी बिना पैसे के नहीं होती। इन दो लोगों के कारण पूरे थाने के स्टाफ को शक की निगाह से देखा जाने लगा है।”
सूत्रों का यह भी आरोप है कि कथित संरक्षण के चलते गो-तस्करी जैसे संगीन अपराधों के हौसले बुलंद हैं, जिससे क्षेत्र की कानून-व्यवस्था पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
इन आरोपों के केंद्र में आरक्षक प्रशांत बघेल और आरक्षक आशुतोष उपाध्याय के नाम सामने आ रहे हैं। हालांकि पुलिस विभाग या संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि
क्या इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?
क्या इनके पीछे किसी वरिष्ठ अधिकारी या जनप्रतिनिधि का संरक्षण है?
या फिर “वर्दी नहीं, हमदर्दी” का नारा केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है?
जनता की निगाहें अब पुलिस अधीक्षक और उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।
वही अब स्थानीय जनता को नए थाना प्रभारी से ये सब बंद होने की और जनता के दुख दर्द सुनने और इन आरक्षको पर कार्यवाही करने की उम्मीद जता रही हैं।