नारायणगंज में मुर्रम का अवैध परिवहन बेखौफ जारी

रेवांचल टाइम्स नारायणगंज मंडला इन दिनों नारायणगंज क्षेत्र में मुर्रम के अवैध उत्खनन और परिवहन का खेल खुलेआम चल रहा है। बिना किसी वैध अनुमति के दिन-रात धड़ल्ले से मुर्रम की खुदाई की जा रही है और उसे ट्रैक्टरों व हाईवा जैसे भारी वाहनों से ढोया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि ये वाहन न केवल ग्रामीण इलाकों बल्कि नगर के बीच बाजार और घनी आबादी वाले क्षेत्रों से बेखौफ होकर गुजर रहे हैं। यह स्थिति न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन चुकी है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अवैध मुर्रम परिवहन अब कोई छिपी हुई गतिविधि नहीं रह गई है। सुबह से लेकर देर रात तक ओवरलोड ट्रैक्टर और हाईवा सड़कों पर दौड़ते देखे जा सकते हैं। कई बार ये वाहन स्कूल समय में भी बाजार से गुजरते हैं, जब सड़कों पर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की आवाजाही सबसे अधिक होती है। बावजूद इसके, न तो परिवहन विभाग की सख्ती नजर आती है और न ही खनिज विभाग या स्थानीय प्रशासन की कोई ठोस कार्रवाई नही हो रही है
बीच बाजार से मौत का सामान ढो रहे वाहन
नारायणगंज के मुख्य बाजार से मुर्रम से भरे भारी वाहन गुजरना अब आम बात हो गई है। संकरी सड़कों पर तेज रफ्तार और ओवरलोड वाहनों के कारण हर पल हादसे का खतरा मंडराता रहता है। दोपहिया वाहन चालक और पैदल राहगीर खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कई बार तो वाहन इतने अधिक भरे होते हैं कि मुर्रम सड़क पर गिरता रहता है, जिससे फिसलन और दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है।
स्कूल जाने वाले बच्चों के अभिभावकों में खासा डर देखा जा रहा है। उनका कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, तो किसी दिन बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी जानलेवा हादसे का इंतजार कर रहा है
प्रकृति से खिलवाड़, नियमों की धज्जियां
अवैध उत्खनन केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के साथ सीधा खिलवाड़ भी है। बिना पर्यावरणीय स्वीकृति और खनन अनुमति के मुर्रम की खुदाई से जमीन का संतुलन बिगड़ रहा है। खेतों, नालों और आसपास के जलस्रोतों पर इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है। खनन नियमों के अनुसार, किसी भी प्रकार की खुदाई और परिवहन के लिए वैध परमिट, रॉयल्टी भुगतान और निर्धारित मार्ग का पालन अनिवार्य होता है। लेकिन नारायणगंज में इन सभी नियमों को खुलेआम ताक पर रखा जा रहा है। आखिर यह सब किसके संरक्षण में हो रहा है
प्रशासन की भूमिका संदिग्ध
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि संबंधित विभागों की जानकारी में सब कुछ होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही। अगर प्रशासन चाहे तो एक दिन में इस अवैध कारोबार पर लगाम लगाई जा सकती है, लेकिन ऐसा होता नजर नहीं आ रहा। कहीं न कहीं प्रशासन की चुप्पी संदेह पैदा करती है। क्या यह लापरवाही है या फिर मिलीभगत
कई बार शिकायतों के बावजूद जब कार्रवाई नहीं होती, तो आम जनता का भरोसा व्यवस्था से उठने लगता है। यही स्थिति नारायणगंज में भी देखने को मिल रही है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या कानून सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है ओवरलोड वाहनों के कारण सड़कों की हालत तेजी से खराब हो रही है। नई-नई बनी सड़कें भी भारी वाहनों का बोझ नहीं झेल पा रही हैं।कई जगह गड्ढे बन रहे हैं, जिससे आम यातायात प्रभावित हो रहा है। वहीं, मुर्रम की ढुलाई से उड़ती धूल-मिट्टी लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर डाल रहा है
क्षेत्रवासियों ने अवैध मुर्रम परिवहन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि संबंधित वाहनों को जब्त किया जाए और अवैध खनन में शामिल माफिया पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो। साथ ही, बाजार और आबादी वाले क्षेत्रों से भारी वाहनों के गुजरने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।