₹22.45 लाख गबन मामले में हाईकोर्ट सख्त — 60 दिन में चालान पेश करने के आदेश

सरपंच संदीप मरकाम की याचिका पर हाईकोर्ट जबलपुर का बड़ा आदेश, एसपी मंडला को निर्देश

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दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला।जनपद पंचायत नैनपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत पिंडरई में हुए ₹22 लाख 45 हजार 522 रुपये के गबन प्रकरण में पुलिस की लापरवाही को लेकर माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर ने सख्त रुख अपनाया है। ग्राम पंचायत पिंडरई के सरपंच संदीप मरकाम द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय न्यायमूर्ति श्री बी.पी. शर्मा ने पुलिस अधीक्षक मंडला को 60 दिवस के भीतर चालान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता सरपंच संदीप मरकाम ने उच्च न्यायालय में प्रस्तुत याचिका में यह उल्लेख किया कि थाना प्रभारी नैनपुर द्वारा उपसरपंच आलोक तिवारी एवं अन्य आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में चालान निर्धारित समय-सीमा में प्रस्तुत नहीं किया गया, जबकि प्रकरण गंभीर आर्थिक अपराध से जुड़ा है।
वही प्रकरण के अनुसार, ग्राम पंचायत पिंडरई में उपसरपंच आलोक तिवारी एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा ₹22,45,522 रुपये का गबन किया गया था। इस संबंध में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत नैनपुर द्वारा FIR क्रमांक 0362, दिनांक 21/09/2023 को पुलिस थाना नैनपुर में दर्ज कराई गई थी।
FIR के पश्चात आरोपियों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में जमानत हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसे न्यायालय द्वारा निरस्त कर दिया गया। इसके बाद आरोपियों ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर की, जहां से उन्हें इस शर्त पर जमानत प्रदान की गई कि गबन की संपूर्ण राशि जनपद पंचायत में जमा की जाएगी।
आरोपियों द्वारा राशि जमा किए जाने के उपरांत, सर्वोच्च न्यायालय ने दिनांक 16/01/2024 को आदेश पारित करते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगाई, साथ ही यह स्पष्ट निर्देश दिया कि—
“In the meantime, no coercive measures shall be taken against the petitioners provided the petitioners extend all cooperation during the investigation and trial.”
इसके बावजूद, थाना प्रभारी नैनपुर द्वारा समय-सीमा के भीतर चालान प्रस्तुत नहीं किया गया। इस संबंध में सरपंच संदीप मरकाम ने पुलिस अधीक्षक मंडला सहित अन्य अधिकारियों को कई बार आवेदन एवं निवेदन प्रस्तुत किए, किंतु कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अंततः विवश होकर सरपंच द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका दायर की गई, जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए एसपी मंडला को 60 दिनों के भीतर चालान प्रस्तुत करने का स्पष्ट आदेश पारित किया।
इस प्रकरण की पैरवी एडवोकेट गोपाल सिंह बघेल द्वारा की गई।
वही अब इस मामले में निगाहें पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या तय समय-सीमा में चालान प्रस्तुत कर न्यायिक आदेश का पालन किया जाता है या नहीं।

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