​भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: किसानों के हित सुरक्षित, डेयरी और ऊर्जा क्षेत्र में आएगा बड़ा उछाल

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रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा|भारत और अमेरिका के बीच हुए हालिया व्यापार समझौते ने देश के कृषि, डेयरी और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं। इस समझौते पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए शेषराव यादव ने इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक ‘स्वर्णिम अध्याय’ करार दिया है।
​कृषि हितों की रक्षा विदेशी गेहूं-चावल पर ‘नो एंट्री’ सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारतीय किसानों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। समझौते के तहत गेहूं, चावल, दूध, पनीर और केला जैसे कृषि उत्पादों के आयात की अनुमति नहीं दी गई है। इससे स्थानीय किसानों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से पूरी सुरक्षा मिलेगी।
​डेयरी उद्योग के लिए ‘गेमचेंजर’ पशुपालन क्षेत्र के लिए इस समझौते को क्रांतिकारी माना जा रहा है। देश में चारे की मौजूदा किल्लत को देखते हुए
​अमेरिका से पशु आहार के आयात को हरी झंडी दी गई है।
​इससे डेयरी उद्योग की लागत में भारी कमी आएगी।
​पशुपालकों को सीधे तौर पर आर्थिक राहत मिलेगी।
​5 वर्षों में $500 अरब का व्यापार रोडमैप यादव ने बताया कि भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से करीब 500 अरब डॉलर के उत्पादों की खरीद करेगा। इस बड़े निवेश से कई क्षेत्रों की तस्वीर बदलेगी
​ऊर्जा और कोकिंग कोल औद्योगिक उत्पादन को मिलेगी नई गति।
​विमानन विमान पुर्जों के आयात से एयरोस्पेस सेक्टर मजबूत होगा।
​प्रमुख लाभार्थी ऑटोमोबाइल, जेनेरिक दवाएं और रत्न-आभूषण उद्योग को इस समझौते से विशेष लाभ और वैश्विक बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी।
​”यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी कूटनीति का परिणाम है, जो भारत को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।शेषराव यादव

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