विधायक निधि के घाट निर्माण में भ्रष्टाचार का ‘खतरनाक खेल’ — नर्मदा का जलस्तर बढ़ा तो जा सकती है जान, प्रशासन मौन

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दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला जनपद पंचायत नारायणगंज की ग्राम पंचायत कूम्हा में विधायक निधि से बन रहे नर्मदा घाट का निर्माण अब सिर्फ गुणवत्ता का मामला नहीं रह गया है, बल्कि संभावित जनहानि का बड़ा खतरा बनकर सामने आ रहा है। घटिया निर्माण और प्रशासनिक अनदेखी ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।
मौके पर दिखाई दे रही स्थिति साफ बता रही है कि निर्माण कार्य में तकनीकी मापदंडों की खुली अनदेखी की जा रही है। बिना मजबूत बेस डाले ही घाट खड़ा किया जा रहा है, भराव में मुर्रम-मिट्टी और बड़े पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है और ऊपर से महज एक इंच के आसपास सीमेंट कंक्रीट डालकर लाखों रुपए के काम को पूरा दिखाने की कोशिश की जा रही है। यह निर्माण नहीं बल्कि सरकारी राशि की लीपापोती नजर आ रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यह घाट नर्मदा नदी के किनारे बनाया जा रहा है, जहां हर साल जलस्तर बढ़ता है और तेज बहाव आता है, तो इतनी कमजोर संरचना किसके इशारे पर तैयार की जा रही है? यदि बारिश के मौसम में नदी उफान पर आई तो घाट के साथ वहां मौजूद लोगों की जान को भी खतरा हो सकता है। क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है?
ग्रामीणों का आरोप है कि पूरे निर्माण कार्य में सरपंच, सचिव और इंजीनियरिंग अमले की मिलीभगत से मानकों को दरकिनार कर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। मौके पर निगरानी करने वाला जिम्मेदार अमला नदारद है, जिससे साफ है कि या तो आंखें मूंद ली गई हैं या फिर सब कुछ सेटिंग से चल रहा है।
और सबसे अहम सवाल — क्या विधायक निधि से हो रहे इस निर्माण की जानकारी जनप्रतिनिधि को है? यदि है तो गुणवत्ता पर ध्यान क्यों नहीं, और यदि नहीं है तो फिर उनके नाम पर हो रहे इस खेल का जिम्मेदार कौन?
प्रशासन की भूमिका भी कठघरे में है। इतने गंभीर आरोपों और स्पष्ट खामियों के बाद भी न तो निर्माण कार्य रोका गया और न ही किसी प्रकार की तकनीकी जांच कराई गई। इससे यह संदेश जा रहा है कि जिले में विकास कार्यों के नाम पर भ्रष्टाचार को खुली छूट दे दी गई है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि:
निर्माण कार्य की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए, गुणवत्ता परीक्षण कराया जाए
भुगतान की प्रक्रिया की जांच हो
दोषी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई की जाए
नर्मदा तट पर बन रहा यह घाट आस्था से जुड़ा है, लेकिन जिस तरह से इसे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाया जा रहा है, वह न सिर्फ सरकारी धन की बर्बादी है बल्कि लोगों की जान के साथ खिलवाड़ भी है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन नींद से जागता है या किसी हादसे के बाद ही कार्रवाई की परंपरा निभाई जाएगी।

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