हादसों का गढ़ बना बिछिया का एनएच-30: फोरलेन की जगह टू-लेन का खामियाजा, बाईपास अब भी कागजों में

दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला मंडला जिले का बिछिया नगर इन दिनों मौत के साये में जीने को मजबूर है। नगर के बीचों-बीच से गुजर रहा नेशनल हाईवे 30 लगातार हादसों का कारण बन रहा है, लेकिन जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और विभाग चुप्पी साधे बैठे हैं।
ताजा मामले में तेज रफ्तार ट्रक ने स्कूटी सवार को रौंद दिया। एम्बुलेंस तक समय पर नहीं पहुंच सकी और घायल को थाना प्रभारी के वाहन से अस्पताल ले जाना पड़ा। सवाल यह है कि आखिर कब तक बिछिया की जनता अपनी जान जोखिम में डालकर इस सड़क पर चलेगी?
फोरलेन की स्वीकृति, लेकिन बना दी गई टू-लेन
वर्ष 2014 में एनएच-30 फोरलेन के रूप में स्वीकृत हुआ था, लेकिन जिले के सांसद और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते इसे टू-लेन में बदल दिया गया। आज उसी फैसले का खामियाजा बिछिया की जनता अपनी जान देकर चुका रही है।
बाईपास अब भी सिर्फ घोषणा
बिछिया बाईपास का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन निर्माण आज तक शुरू नहीं हुआ। नगर के बीच से हाईवे निकाल दिया गया, जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
आधी सड़क पर कब्जा, जिम्मेदार मौन
हालात यह हैं कि—
आधी सड़क ऑटो स्टैंड और बाइक पार्किंग में तब्दील हो चुकी है
फुटपाथों पर दुकानदारों का अवैध कब्जा है
यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है
इसके बावजूद नगर परिषद बिछिया और संबंधित विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहे।
जनता का सवाल — मौत का इंतजार क्यों?
लगातार हो रहे हादसों के बाद लोगों में भारी आक्रोश है। नगरवासियों का साफ कहना है कि
अगर जल्द बाईपास निर्माण और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
क्या बिछिया की जनता की जान की कीमत शून्य है?
फोरलेन को टू-लेन बनाने वालों से जवाब कब लिया जाएगा?
और बाईपास आखिर कब बनेगा — या सिर्फ कागजों में ही दौड़ता रहेगा?