मंडला में अवैध कॉलोनियों का फैलता मकड़जाल, प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल
कृषि भूमि पर धड़ल्ले से कट रहे प्लॉट, नियमों की अनदेखी—कुछ मामलों में ही कार्रवाई से जनता में नाराजगी

दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला।मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य जिले मंडला में इन दिनों अवैध कॉलोनियों का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। राजस्व की चोरी करते हुए और शासन के नियमों को दरकिनार कर डेवलपर्स कृषि भूमि, खेतों तथा पड़त और बर्रा जमीनों को समतल कर प्लॉट काटकर कॉलोनियां बसाने में लगे हुए हैं। जिले के कई हिस्सों में यह सिलसिला तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से अब तक गिनी-चुनी जगहों पर ही कार्रवाई किए जाने से सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारों के अनुसार कॉलोनाइजर शासन के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) नियमों, जोनिंग नियमों, भवन निर्माण नियमों, पर्यावरणीय मानकों और अग्निशमन सुरक्षा नियमों का खुलकर उल्लंघन कर रहे हैं। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कॉलोनाइजर बड़े-बड़े दावे करते हैं कि कॉलोनी पूरी तरह वैध है और सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, लेकिन हकीकत में अधिकांश मामलों में जरूरी दस्तावेज भी पूरे नहीं होते।
नियमों के अनुसार किसी भी कॉलोनी के विकास के लिए जमीन के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज जैसे रजिस्ट्री, खसरा और खतौनी, साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, अग्निशमन विभाग सहित अन्य विभागों से एनओसी, टीएंडसीपी की स्वीकृति, जल और विद्युत आपूर्ति की अनुमति, ड्रेनेज व सीवरेज व्यवस्था की स्वीकृति, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव आकलन जैसे दस्तावेज अनिवार्य होते हैं। लेकिन जिले में विकसित हो रही कई कॉलोनियों में इन जरूरी प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंडला जैसे आदिवासी बहुल जिले में जमीन और संसाधनों की सुरक्षा को लेकर नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए, लेकिन स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है। कई मामलों में विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है, जहां मोटी रकम लेकर अवैध कॉलोनियों के इस खेल को नजरअंदाज किया जा रहा है।
नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन जिले भर में बारीकी से जांच कराए तो बड़ी संख्या में अवैध कॉलोनियों का खुलासा हो सकता है। फिलहाल केवल एक-दो मामलों में कार्रवाई होने से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर बाकी कॉलोनियों की जांच क्यों नहीं कराई जा रही।
स्थानीय लोगों ने आम नागरिकों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है कि किसी भी कॉलोनी में प्लॉट खरीदने से पहले उसकी वैधता और दस्तावेजों की पूरी जांच कर लें, क्योंकि भविष्य में यदि प्रशासनिक कार्रवाई होती है तो निवेश डूबने का खतरा भी बना रहता है।
जनता की मांग है कि जिला प्रशासन जिले भर में संचालित सभी कॉलोनियों की समग्र जांच कराए और नियमों का उल्लंघन करने वाले कॉलोनाइजरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे, ताकि कृषि भूमि की सुरक्षा हो सके और आम लोगों की गाढ़ी कमाई भी सुरक्षित रह सके।