ओबीसी जनगणना और यूजीसी बिल लागू कराने की मांग, राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
भारत मुक्ति मोर्चा और पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने उठाई शिक्षकों की बहाली की मांग
रेवांचल टाइम्स मण्डला। भारत मुक्ति मोर्चा एवं ओबीसी मोर्चा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार 6 मार्च को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर देश में ओबीसी वर्ग की जनगणना कराने, यूजीसी बिल लागू करने तथा शिक्षकों से संबंधित कई महत्वपूर्ण मांगों को उठाया। इस दौरान संगठन के संयोजक राम सिंह पंद्रो और दशरथ धुर्वे सहित कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
ज्ञापन में संगठन ने कहा कि देश में सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की वास्तविक जनसंख्या का आंकड़ा सामने आना आवश्यक है। इसके लिए केंद्र सरकार को जल्द से जल्द ओबीसी की अलग से जनगणना करानी चाहिए, ताकि सरकारी योजनाओं और आरक्षण की नीतियों को सही तरीके से लागू किया जा सके। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में ओबीसी की सटीक जनसंख्या का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण इस वर्ग को उसके अधिकारों और सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है।
भारत मुक्ति मोर्चा और ओबीसी मोर्चा ने ज्ञापन में विद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से जुड़े बिल को जल्द लागू करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और शिक्षकों की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए यूजीसी से संबंधित प्रस्तावित प्रावधानों को जल्द लागू किया जाना चाहिए। इससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और स्थिरता आएगी तथा शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों को लाभ मिलेगा।
संगठन ने शिक्षकों के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। ज्ञापन में मांग की गई है कि वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी (टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) की अनिवार्यता समाप्त की जाए। पदाधिकारियों का कहना है कि उस समय नियुक्ति प्रक्रिया अलग नियमों के तहत हुई थी, इसलिए बाद में लागू किए गए नियमों को पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना न्यायसंगत नहीं है। इस निर्णय से अनेक शिक्षकों के भविष्य पर संकट पैदा हो गया है, जिसे तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए।
संयोजक राम सिंह पंद्रो और दशरथ धुर्वे ने संयुक्त रूप से बताया कि यह आंदोलन का पहला चरण है। उन्होंने कहा कि संगठन लंबे समय से ओबीसी समाज के अधिकारों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहा है। यदि सरकार तय समय में इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि आंदोलन के दूसरे चरण में 13 मार्च को धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद तीसरे चरण में 23 मार्च को रैली और प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समाज के लोगों को शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। वहीं चौथे और अंतिम चरण में 23 अप्रैल को भारत बंद का आवाहन किया गया है।
संगठन के नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल किसी एक वर्ग का नहीं बल्कि देश के मूलनिवासी समाज के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से इस आंदोलन में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की। उनके अनुसार सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को प्रशासन के समक्ष रखा और उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही इन मुद्दों पर विचार कर उचित निर्णय लेगी। संगठन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।