जन स्वाभिमान यात्रा का समापन संकल्प प्राकृतिक संसाधनों पर समुदायों का अधिकार अभियान जारी रहेगा

रेवांचल टाईम्स – मंडला, विगत 9 जून को बालाघाट से निकाली गई स्वाभिमान यात्रा का कल सोमवार को संगम घाट महाराजपुर मंडला में समापन हुआ। समापन कार्यक्रम में वर्षा और खेती किसानी के बाबजूद दो दर्जन से अधिक गांव के सैकड़ों महिला – पुरुष प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए बालाघाट जिला पंचायत के सदस्य मंशाराम मंडावी ने कहा कि आदिवासी क्षेत्र अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा है। अभी संगठित होकर मुकाबला नहीं किया तो कुछ बचने वाला नहीं है। मवई की रूक्मिणी सुरेश्वर ने कहा कि आदिवासियों को जंगलों से दूर किया जा रहा है जो उनके जीविका का आधार है। चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति के अध्यक्ष दादु लाल कुङापे और मीरा बाई मरावी ने देश और प्रदेश के आदिवासी संगठनों को विस्थापन के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया।
बालाघाट के जिला पंचायत सदस्य दल सिंह पन्द्रे ने जल जंगल जमीन और जीवन को संरक्षित करने के लिए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग किया। किसान नेता राम नारायण कुङरिया ने कहा कि वन अधिकार कानून आदिवासियों पर हुए ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने के लिए लाया गया था परन्तु अभी बारिश में आदिवासियों को घर से बेदखल किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के आलोक शुक्ला ने कहा कि पूरे संसाधनों को कॉरपोरेट को सुपुर्द किया जा रहा है। पेसा और वन अधिकार कानून जैसे जन पक्षीय कानून को सरकार कमजोर करना चाहती है। जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया के राष्ट्रीय संयोजक अमूल्य निधि ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर जिला अस्पताल को निजी हाथों में सौंपने का टेंडर निकाल चुकी है। महाकौशल में बालाघाट जिला अस्पताल को निजी हाथों में देने का विरोध जन संघर्ष मोर्चा को करना चाहिए।
कार्यक्रम में उपस्थित बिछिया के विधायक ने कहा कि वर्तमान मध्यप्रदेश सरकार 37 हजार वर्ग किलोमीटर जंगल निजी पूंजीपतियों को देना चाहती है।इसका विरोध सभी लोगों को मिलकर करना होगा। निवास के विधायक चेन सिंह बरकङे ने प्रस्तावित चुटका परियोजना,बसनिया बांध और राजा दलपत शाह अभ्यारण्य का उल्लेख करते हुए कहा कि बरगी बांध से विस्थापित परिवारों की दुर्दशा के बाद लोग अब अपना गांव और जमीन नहीं छोङना चाहते हैं। पूर्व विधायक डाक्टर अशोक मर्सकोले ने जल जंगल जमीन बचाने के लिए जनप्रतिनिधियों से जमीर को जगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विरोध की रस्म अदायगी मात्र से प्राकृतिक संसाधनों की लूट को नहीं बचाया जा सकता है। बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राज कुमार सिन्हा ने 30 जून को 1855- 56 को संथाल आदिवासियों द्वारा अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह को हूल दिवस के रूप में याद किया और कहा कि आज जल जंगल जमीन बचाने के लिए आत्म चिंतन का दिन है। जन संघर्ष मोर्चा के संयोजक और जन स्वाभिमान यात्रा के प्रमुख विवेक पवार ने कहा कि 365 दिनों में से एक सप्ताह सभी को अपने बलिदानी पुरखों के आदर्श को समझने और उस पर चिंतन के लिए निकालना चाहिए। तभी ये धरती और सामाज बच पायेगा। उन्होंने कहा कि यह जन स्वाभिमान यात्रा समाप्त नहीं हुई है बल्कि यह आगे और बढ़ेगी, उन्होंने यात्रा को सफल बनाने के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। इसके बाद सभी लोग कलेक्टर कार्यालय मंडला जाकर महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केन्द्रीय मंत्री, आदिम जाति कल्याण मंत्रालय के नाम एक ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर को सोंपा। जिसमें मुख्य मांगें मंडला, बालाघाट डिंडौरी जिले में प्रस्तावित परियोजनाओं से होने वाले विस्थापन पर पूर्णत रोक लगाई जाए। बीजाडांडी और नारायणगंज के काश्तकारों द्वारा बरगी जलाशय से पानी लिफ्ट कर खेतों तक पानी पहुंचाने की मांग को तत्काल पूर्ण किया जाए।
बरगी जलाशय में लगातार घटते मत्स्य उत्पादन का अध्ययन करा कर उत्पादन बढ़ाने का प्रयास किया जाए। बरगी जलाशय में प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर प्लांट योजना को तत्काल रद्द किया जाए।
नर्मदा के भूकंप संवेदी और कान्हा टाईगर रिजर्व के पारिस्थितिकी संवेदनशील आदिवासी क्षेत्र में प्रस्तावित घातक चुटका परमाणु परियोजना को रद्द किया जाए।
वन अधिकार कानून 2006 के अन्तर्गत व्यक्तिगत और सामुदायिक वन संसाधनों पर समुदाय के अधिकारों को सुनिश्चित किया जाए। वन भूमि पर काबिज दावेदारों के दावा परिक्षण निष्पक्ष रूप से किया जाकर बेदखली को रोका जाए।
बालाघाट जिले के बैहर, बिरसा विकास खण्ड के 55 वन खण्डों को रिजर्व फारेस्ट घोषित करने में 40 गांव प्रभावित होकर 36833.672 हेक्टेयर वन भूमि को रिजर्व फारेस्ट घोषित किया जा रहा है। कृप्या इन वन खण्डों को डि-नोटिफाई किया जाये।
परसवाड़ा विकास खंड के लौगूर जंगल के 250 हेक्टर वन भूमि खनिज के लिए आबंटित किया गया जा रहा है। इसे निरस्त किया जाये।
कान्हा नेशनल पार्क के कोर क्षेत्र के छः गांवों को राजस्व ग्राम घोषित करने की कार्यवाही को वन विभाग ने रोक दिया है। इसे तत्काल शुरू किया जाए।
विभिन्न परियोजनाओं (बांध, नेशनल पार्क व टाइगर रिजर्व आदि) से विस्थापित परिवारों की आर्थिक स्थिति का सर्वे करा कर पुनर्वास का लाभ दिया जाए।