कचनारी ग्राम में बिजली के नाम पर अवैध वसूली ग्रामीणों में आक्रोश पहुँचे जनसुनवाई

रेवांचल टाइम्स घुघरी मंडला घुघरी जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कचनारी ग्राम पंचायत में बिजली व्यवस्था को लेकर गंभीर अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2015-16 से लेकर वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 तक गांव में विद्युत व्यवस्था अधूरी पड़ी है। कई स्थानों पर केवल खंभे (पोल) खड़े कर दिए गए हैं, लेकिन आज तक बिजली आपूर्ति शुरू नहीं की गई।
ग्रामीणों के अनुसार, जहां एक ओर गांव के कुछ घर अंधेरे में डूबा हुआ है, वहीं दूसरी ओर बिजली विभाग से जुड़े कर्मचारी ग्रामीणों से अवैध वसूली कर रहे हैं। आरोप विशेष रूप से लाइनमैन रोहित पर लगाए गए हैं, जो कथित तौर पर हर घर जाकर बिना किसी आधिकारिक बिल या रसीद के 400 से 500 रुपये तक की राशि वसूल रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में 2500 से 3000 रुपये तक की बड़ी रकम भी वसूली जा रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि यह वसूली पूरी तरह से गैरकानूनी तरीके से की जा रही है, जिसमें न तो कोई मीटर रीडिंग ली जा रही है और न ही किसी प्रकार का लिखित दस्तावेज दिया जा रहा है। कई उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे पैसे देने में असमर्थता जताते हैं, तो लाइनमैन द्वारा उनसे अरहर (दाल) जैसी कृषि उपज की मांग की जाती है, जो स्थिति को और भी गंभीर बना देता है।
इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों ने पहले भी कई बार ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। प्रशासन की इस उदासीनता से थकहार कर दर्जनों की संख्या में ग्रामीण हाल ही में मंडल जनसुनवाई में पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं।
ग्रामीणों का कहना है कि लाइनमैन द्वारा “तीन दिन का ऑफर” बताकर दबाव बनाया जा रहा है, जिससे वे जल्द से जल्द पैसे जमा करें। इस तरह की भाषा और दबाव से ग्रामीणों में भय का माहौल है। कई परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं, जिनके लिए इस तरह की जबरन वसूली बड़ी समस्या बन गई है।
स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, गांव में लंबित पड़ी विद्युत परियोजना को जल्द से जल्द पूरा किया जाए, ताकि ग्रामीणों को बुनियादी सुविधा मिल सके।
यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बुनियादी सुविधाओं के नाम पर लोगों का शोषण किया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मुद्दे पर कब तक कार्रवाई करते हैं और ग्रामीणों को न्याय मिल पाता है या नहीं।