9 साल की सेवा के बाद बेरोजगार! महिला कर्मचारी की पुकार पहुंची जनसुनवाई तक 

 

दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला, जिले के योजना भवन में प्रत्येक मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई में एक शिकायत आई जहाँ विगत दस वर्षों से कार्य कर रही महिला को बिना पूर्व सूचना के हटा दिए जाने का आवेदन दिया गया जहाँ अपने आवेदन में लिखा है कि, बिना कारण हटाई गई आरती यादव, परिवार पर टूटा रोज़ी-रोटी का संकट — अस्थायी कर्मचारियों के अधिकारों पर खड़े हुए बड़े सवाल

नगर पालिका परिषद के अंतर्गत वर्षों तक सेवा देने वाली एक महिला कर्मचारी को अचानक कार्य से हटा दिए जाने का मामला अब जनसुनवाई तक पहुंच गया है। पीड़ित महिला आरती यादव ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए पुनः बहाली की मांग की है।

9 साल की सेवा, फिर भी नहीं मिला सहारा

वही प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरती यादव 1 सितंबर 2017 से 17 जनवरी 2026 तक कलेक्टर बंगले में कार्यरत रहीं। करीब 9 वर्षों तक लगातार सेवा देने के बावजूद उन्हें अचानक बिना किसी स्पष्ट कारण के कार्य से हटा दिया गया।

इस फैसले ने न सिर्फ उनकी नौकरी छीन ली, बल्कि उनके पूरे परिवार की आजीविका पर संकट खड़ा कर दिया है। आरती यादव का कहना है कि वह परिवार की मुख्य कमाने वाली सदस्य हैं और उनकी आय पर ही घर का खर्च चलता था।

“अब कैसे चलेगा घर?”

आरती यादव पिछले दो महीनों से दफ्तर-दर-दफ्तर भटक रही हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई ठोस जवाब नहीं मिला। थक-हारकर उन्होंने जनसुनवाई में आवेदन देकर अपनी पूरी व्यथा सुनाई।

“9 वर्षों तक कार्य करने के बाद बिना कारण के मुझे हटा दिया गया, इसलिए मैंने जनसुनवाई में आवेदन दिया है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है।”

— आरती यादव

अन्य कर्मचारियों पर भी गिरी गाज?

सूत्रों के अनुसार, सिर्फ आरती यादव ही नहीं, बल्कि अन्य विभागों के 4–5 अस्थायी कर्मचारियों को भी बिना नोटिस या सूचना के कार्यमुक्त कर दिया गया है। इससे कई परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

प्रशासन का पक्ष

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य नगर पालिका अधिकारी गजानन नाफड़े ने कहा—

“मुझे इसकी जानकारी नहीं है। लेबर फिक्स नहीं होता, जरूरत के हिसाब से कम-ज्यादा किया जाता है।”

यह बयान अपने आप में कई सवाल खड़े करता है कि क्या वर्षों तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं है?

बड़ा सवाल

क्या अस्थायी कर्मचारियों की कोई सुरक्षा नहीं? और बिना नोटिस नौकरी से हटाना कितना न्यायसंगत?

क्या प्रशासन इस मामले में संवेदनशीलता दिखाएगा?

अब नजर प्रशासन पर

जनसुनवाई में अधिकारियों ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है। अब देखना यह होगा कि जांच कितनी निष्पक्ष और तेज होती है, और क्या आरती यादव को न्याय मिल पाता है या नहीं।

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