थाना या “सेटिंग सेंटर”?
नैनपुर में न्याय बिक रहा है या कानून सो रहा है!
दैनिक रेवांचल टाइम्स – नैनपुर, मंडला जिले का नैनपुर थाना में इन दिनों एक नया “मॉडल” चर्चा में है—जहां शिकायत थाने में जाती है और समाधान होटल में निकलता है। सवाल यह है कि यह पुलिसिंग है या “प्राइवेट कलेक्शन सिस्टम”? नैनपुर की गलियों में चर्चा का आम
थाने के बाहर दलाल, अंदर खामोशी!
कहा जाता है कि कानून अंधा होता है, लेकिन नैनपुर में तो लगता है कानून ने आंखों पर पट्टी के साथ-साथ कानों में भी रुई डाल ली है।
जैसे ही कोई फरियादी या कोई आपराधिक गतिविधि का मामला थाने पहुंचता है, कुछ “स्वघोषित पत्रकार, समाजसेवी जो आये दिन अपनी फ़ोटो जिले के बड़े नेताओं के साथ लेकर सोशल मीडिया में पोस्ट कर अपने आप को “प्रभावशाली” और समाजसेवी और स्वंय भू पत्रकार कहलाने से पीछे नहीं हटते ऐसे लोग सक्रिय हो जाते हैं मानो उन्हें भविष्यवाणी हो चुकी हो और उन्हें पहले से ही सूचना मिल चुकी हो। की कौन सी घटना कहाँ और कब घटित हो रही है या होने वाली है, इनकी गिद्ध की निगाहें से नही चुकता है पुलिस विभाग को बाद में पता चलता है पर इन्हें पहले ही जानकारी या पता चल जाता है आख़िर कैसे ?
वही स्थानीय सूत्र बतलाते हैं कि:- फिर शुरू होता है असली खेल—थाने के सामने होटल में “मंडवाली”, जहां न्याय का भाव-ताव तय होता है।
रसीद नहीं, लेकिन रकम पक्की!
डीजल चोरी गैंग: सिस्टम से तेज नेटवर्क!
नैनपुर में डीजल चोरी कोई नई बात नहीं, लेकिन अब यह “संगठित उद्योग” का रूप ले चुका है—
*30+ सदस्य, पूरा नेटवर्क तैयार*
*7-8 गाड़ियां—ब्लैक फिल्म, संदिग्ध नंबर प्लेट*
*लाखों का डीजल गायब, लेकिन कार्रवाई “लापता”*
व्यंग्य यही है कि—
डीजल तो टैंकर से चोरी हो रहा है, लेकिन जिम्मेदारी सिस्टम से!
कानूनी एंगल: ये सीधे-सीधे अपराध हैं
वही अगर लगाए जा रहे आरोप सही हैं, तो यह सिर्फ अनैतिक नहीं, बल्कि गंभीर आपराधिक कृत्य हैं—
क्योंकि देश का कानून कहता है कि…..*भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 384 (जबर्दस्ती वसूली/Extortion)*
*धारा 420 (धोखाधड़ी) धारा 120B (आपराधिक षड्यंत्र)*
*यदि पुलिस की मिलीभगत साबित होती है तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत भी मामला बनता है।*
यानी “सेटिंग” सिर्फ शब्द नहीं, कानून की नजर में संज्ञेय अपराध है।
पुलिस पर सवाल या सिस्टम पर शक?
सीधे आरोप लगाना आसान नहीं, लेकिन सवाल तो उठेंगे—
क्या थाना स्तर पर इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है?
अगर है, तो कार्रवाई क्यों नहीं?
अगर नहीं है, तो फिर यह “ओपन सिस्टम” कैसे चल रहा है?
स्थानीय लोग कहते हैं—
“यहां केस नहीं, ‘कनेक्शन’ काम आता है।”
*अपराध बढ़े, भरोसा घटा*
नैनपुर में अपराधों की सूची लंबी होती जा रही है—जुआ-सट्टा, डीजल चोरी, मवेशी तस्करी, गांजा कारोबार अन्य अपराध और अपराधियों से गठबंधन किया जाने की जानकारी का चर्चा गर्म है।
वही बस स्टैंड और वार्ड 1, 10, 15 में संदिग्ध गतिविधियों ने आम नागरिकों की नींद उड़ा दी है।
जनता पूछ रही है… आख़िर जवाब कौन देगा?
क्या नैनपुर में कानून “आउटसोर्स” हो चुका है?
क्या दलाल तंत्र पर नकेल कसी जाएगी?
या फिर “सेटिंग सिस्टम” ही नया कानून बन जाएगा?
अगर आरोप गलत हैं तो जांच हो…
अगर सही हैं तो कार्रवाई हो…
क्योंकि जनता अब चुप नहीं रहेगी। जनहित हित को ध्यान में रखते हुए ऐसे दलालों को विभागो से दूर रखना आवश्यक जिससे विभागों की छवि धूमिल होने से बच सके।