घुघरी बस स्टैंड बना ‘अराजकता का अड्डा’: अतिक्रमण, जाम और लापरवाही में घुट रही जनता!

 पुलिस-प्रशासन मूकदर्शक, सड़कें कब्जे में — एम्बुलेंस तक फंसी, जिम्मेदारों की नींद नहीं टूटी

 

रेवांचल टाइम्स | घुघरी (मंडला)तहसील मुख्यालय घुघरी में इन दिनों बस स्टैंड और मुख्य सड़कें पूरी तरह अतिक्रमण की गिरफ्त में हैं। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि यहां सड़कें अब आवागमन के लिए नहीं, बल्कि अवैध कब्जों और बाजार के लिए इस्तेमाल हो रही हैं, और पुलिस-प्रशासन सब कुछ देखते हुए भी मूकदर्शक बना हुआ है।

सड़क बनी बाजार, बस स्टैंड बना कब्जे का केंद्र

तहसील मुख्यालय को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाली नव-निर्मित सड़क अब अतिक्रमण का स्थायी अड्डा बन गई है।

खासकर साप्ताहिक बाजार के दिन यहां रेहड़ी, ठेले और दोपहिया वाहनों का ऐसा कब्जा होता है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।

बस स्टैंड से बिछिया मार्ग तक की स्थिति और भी भयावह है, जहां हर दिन जाम लगना आम बात हो गई है।

डिवाइडर पर दुकानें, भारी वाहन फंसे

हैरानी की बात यह है कि सड़क के बीच बने डिवाइडर तक को नहीं छोड़ा गया है।

यहां खुलेआम दुकानें सज रही हैं, जिससे भारी वाहनों के आवागमन में गंभीर बाधा उत्पन्न हो रही है।

परिणामस्वरूप, हर दिन दुर्घटना का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं।

ऑटो चालकों की मनमानी, जनता परेशान

घुघरी में ऑटो चालकों की लापरवाही और मनमानी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।

कहीं भी वाहन खड़ा कर देना

बिना संकेत अचानक मोड़ लेना

सड़क के बीच सवारी भरना

इन सबके चलते दोपहिया वाहन चालकों और आम लोगों को रोज खतरा उठाना पड़ रहा है।

सड़क पर ही पार्किंग, हर दिन जाम

नगर में स्थिति यह है कि सड़क किनारे ही नहीं, बल्कि मुख्य मार्ग पर ही दोपहिया और चारपहिया वाहन खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे हर दिन जाम की स्थिति बनती है।

साप्ताहिक बाजार हो या सामान्य दिन — घुघरी में जाम अब स्थायी समस्या बन चुका है।

एम्बुलेंस भी जाम में कैद — खतरे में जान

सबसे गंभीर और चिंताजनक बात यह है कि इस अव्यवस्था के कारण एम्बुलेंस तक जाम में फंस रही है।

साप्ताहिक बाजार के दौरान कई बार ऐसा देखा गया है कि मरीजों को लेकर जा रही एम्बुलेंस को रास्ता नहीं मिल पाता, जो सीधे-सीधे मानव जीवन के साथ खिलवाड़ है।

प्रशासन की चेतावनी बेअसर, कार्रवाई नदारद

नवागत अनुविभागीय अधिकारी द्वारा सख्त रवैया अपनाते हुए चेतावनी दी गई थी, लेकिन जमीनी हकीकत में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा।

न तो अतिक्रमण हटाया जा रहा है, न ही यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

बड़ा सवाल — आखिर कब जागेगा प्रशासन?

क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है?

क्या जनता को यूं ही जाम और अराजकता में जीना पड़ेगा?

क्यों जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं?

 

वही घुघरी का बस स्टैंड और मुख्य सड़कें आज अव्यवस्था, अतिक्रमण और प्रशासनिक लापरवाही की जीती-जागती तस्वीर बन चुकी हैं।

यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समस्या किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

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