महंगाई की मार या जिम्मेदारों की लापरवाही? घरेलू गैस बन रही होटलों का ईंधन, कार्रवाई के बाद उठे बड़े सवाल

 

दैनिक रेवांचल टाइम्स | डिंडोरीजिले में घरेलू LPG गैस सिलेंडरों का खुलेआम व्यावसायिक उपयोग अब केवल नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं रह गया, बल्कि यह महंगाई और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही का मिला-जुला परिणाम बनता जा रहा है। सवाल यह है कि अगर समय रहते निगरानी और कार्रवाई होती, तो क्या आज यह स्थिति बनती?
कलेक्टर के निर्देश पर 29/03/2026 को खाद्य विभाग की टीम—सहायक आपूर्ति अधिकारी शमीम खान एवं कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी नितिन जयसवाल—ने डिंडोरी के मंडला बस स्टैंड क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए दो होटलों से घरेलू गैस सिलेंडर जब्त किए।
कार्रवाई या औपचारिकता? नीलकंठ होटल से 2 घरेलू LPG सिलेंडर मनीषा होटल से 1 घरेलू LPG सिलेंडर कुल 3 सिलेंडर व्यावसायिक उपयोग में पाए गए, जिन्हें जप्त कर डिंडोरी इंडेन गैस एजेंसी के सुपुर्द किया गया और प्रकरण दर्ज किया गया।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यह खेल कब से चल रहा था? क्या यह पहली बार हुआ या लंबे समय से जिम्मेदारों की नजरों के सामने सब चलता रहा?
महंगाई ने बढ़ाया खेल, निगरानी हुई फेल
बढ़ती गैस कीमतों के चलते कई होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान सस्ते घरेलू सिलेंडरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि यदि खाद्य विभाग और आपूर्ति तंत्र लगातार निगरानी रखता, तो यह स्थिति इतनी विकराल नहीं होती।
क्या विभाग को पहले इसकी भनक नहीं थी?
या फिर सब कुछ जानकर भी अनदेखा किया जा रहा था? जिम्मेदारी तय कौन करेगा? घरेलू गैस आम जनता के लिए है, लेकिन जब वही गैस होटलों में खपने लगे, तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है—कभी कमी के रूप में, तो कभी कीमतों के दबाव के रूप में।
अब सवाल यह है:
क्या केवल छोटे होटल संचालकों पर कार्रवाई कर जिम्मेदारी पूरी मान ली जाएगी? या उन अधिकारियों पर भी जवाबदेही तय होगी, जिनकी निगरानी में यह सब चलता रहा?
कार्रवाई के बाद भी कायम हैं सवाल
द्रविकृत पेट्रोलियम गैस (प्रदाय एवं वितरण विनियमन) आदेश, 2000 के तहत प्रकरण तो दर्ज कर लिया गया, लेकिन क्या यह कार्रवाई स्थायी समाधान है या सिर्फ दिखावा?
यदि पहले ही जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाते, तो शायद आज यह स्थिति नहीं बनती।
वही डिंडोरी में हुई यह कार्रवाई केवल 3 सिलेंडरों की जब्ती नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की पोल खोलती है। महंगाई के दौर में नियमों की अनदेखी और जिम्मेदारों की ढिलाई मिलकर आम जनता के हक पर चोट कर रही है। अब जरूरत है सिर्फ कार्रवाई की नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने की—ताकि भविष्य में “घरेलू गैस” सच में घरेलू ही रह सके।

Leave A Reply

Your email address will not be published.