विकास या विनाश? नहर की पुलिया तोड़कर ठेकेदार की मनमानी, प्रशासन मौन—किसानों का भविष्य दांव पर

दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला (नैनपुर)मंडला जिले के नैनपुर में “विकास” के नाम पर हो रही मनमानी ने अब खतरनाक रूप ले लिया है। नगर पालिका परिषद के रसूखदार ठेकेदार द्वारा थावर परियोजना की नहर की पुलिया को तोड़कर बिना किसी स्पष्ट अनुमति और तकनीकी मापदंडों के पाइप डालकर निर्माण कर दिया गया—और जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठा है।
सवालों के घेरे में पूरा सिस्टम
क्या नहर अब ठेकेदारों की जागीर बन चुकी है? क्या सरकारी संपत्ति को तोड़ने की खुली छूट दे दी गई है?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या यह सब प्रशासन की जानकारी और संरक्षण में हो रहा है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि सिंचाई विभाग के अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी “अनजान” बने हुए हैं। यह चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है—क्या यह महज लापरवाही है या फिर मिलीभगत?
किसान पूछ रहे—हमारा दोष क्या?
नहर की पुलिया टूटने से पानी की निकासी और प्रवाह बाधित होगा, जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा। खेतों तक पानी पहुंचना मुश्किल होगा, फसलें प्रभावित होंगी—लेकिन इन सबकी जिम्मेदारी कौन लेगा? किसानों का साफ कहना है कि “विकास” के नाम पर अगर उनकी सिंचाई व्यवस्था ही बर्बाद कर दी जाएगी, तो यह विकास नहीं, सीधा अन्याय है।
अतिक्रमण का खेल, अधिकारियों की चुप्पी
नैनपुर और आसपास के क्षेत्रों में नहर किनारे अतिक्रमण, अवैध पुलिया और सड़क निर्माण का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। आरोप है कि विभागीय अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय चंद कागजों और दबाव के आगे झुक जाते हैं। कई मामलों में शिकायतकर्ताओं को ही परेशान करने के आरोप भी सामने आए हैं।
नगर पालिका की जवाबदेही पर सवाल
नगर पालिका परिषद नैनपुर आखिर किस आधार पर ऐसे निर्माण कार्यों को अनुमति दे रही है? क्या किसी तकनीकी स्वीकृति, सर्वे या विभागीय अनुमति का पालन किया गया?
या फिर “विकास” की आड़ में नियमों को ताक पर रख दिया गया?
प्रशासन की परीक्षा—कार्रवाई या लीपापोती?
अब यह मामला केवल एक पुलिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे की जवाबदेही का मुद्दा बन चुका है।
क्या दोषी ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई होगी? क्या सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच होगी?
क्या किसानों को हुए नुकसान की भरपाई की जाएगी? या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा और “विकास” के नाम पर मनमानी का खेल यूं ही चलता रहेगा?
अधिकारी का पक्ष:
सिंचाई विभाग नैनपुर के एसडीओ हरि सिंह धुर्वे का कहना है कि ठेकेदार ने उच्च अधिकारियों से सहमति लेने की बात कही है, लेकिन शासन से अनुमति की उन्हें जानकारी नहीं है।
वही नैनपुर में यह घटना साफ संकेत देती है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो “विकास” के नाम पर न केवल सरकारी संसाधनों का नुकसान होगा, बल्कि किसानों का भरोसा और भविष्य भी खतरे में पड़ जाएगा। अब नजरें प्रशासन पर हैं—क्या कार्रवाई होगी या फिर यह भी एक और दबा हुआ मामला बनकर रह जाएगा?