अनगढ़ हनुमान मंदिर में शंकू आकार में विराजमान हैं हनुमान

रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा
जितेन्द्र अलबेला

अनगढ़ हनुमान मंदिर में विराजमान स्वयंभू हनुमान जी की प्रतिमा जो शंकु के आकार में प्रतीत होती है जिसमें केवल मुख दर्शन होते हैं मूर्ति का शेष हिस्सा धरती के अंदर है जिसकी लंबाई 16 फिट है शंकु की तरह दिखने वाली शिला में दो आंखें नाक मुख साफ दिखाई देते हैं हनुमान जी का शीर्ष भी दिखाई देता है बाकी की आकृति जमीन के तलघर में है नीचे जाने की अनुमति सिर्फ मंदिर के महंत योगीराज श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर श्री नागेंद्र ब्रह्मचारी जी को ही है वह ही हनुमान जी की चरण वंदन करते हैं हनुमान जी की प्रतिमा अति प्राचीन स्वयंभू है सन 1926 में नागपुर के चिटनवीस छिंदवाड़ा आए उनके लड़के गंभीर बीमारी से ग्रस्त थे वे बहुत परेशान हुए उन्होंने उस हनुमान शिला के दर्शन कर बेटे के लिए हनुमान जी से प्रार्थना की जिससे उनके बेटे की स्थिति में सुधार आया पहले घना वन था उन्होंने छोटी सी मडिया बनाया जिससे जनता का आवागमन यहां होने लगा लोगों का ध्यान उस शिला पर जाने लगा एक औघड़ महाराज हनुमान जी की नित्य पूजन अर्चन करते थे जो भी बीमार आता है उसे भस्मी देकर हनुमान जी से प्रार्थना के लिए कहते हैं जिससे लोगों को लाभ मिलता वहां श्रद्धालुओं की आवा जाहि होने लगी l
1974 75 में बाल ब्रह्मचारी योगीराज नागेंद्र ब्रह्मचारी जी का यहां आगमन हुआ उन्होंने इस स्थान को अपनी कर्म स्थली बनाकर पास ही झोपड़ी में तपस्या करने लगे और मडिया से भव्य हनुमान मंदिर बनाने का संकल्प लिया पूजन पाठ आरती कर हनुमान जी की सेवा करने लगे श्रद्धालुओं का आवागमन मंदिर में होने लगा महाराज जी ने स्वयं मंदिर में एक-एक ईंट मसाला लगाकर मंदिर का गर्भगृह बनाया फिर श्रद्धालुओं का मंदिर से जुड़ना प्रारंभ हुआ महाराज जी के द्वारा 51 वर्षों से लगातार प्रवचन, भागवत कथा ,राम कथा की जाने लगी उससे प्राप्त राशि से मंदिर का भव्य स्वरूप बनाने लगे साथ ही आज जिस जगह पर हनुमान जी की बड़ी प्रतिमा स्थापित है उस स्थान पर मंदिर के पुजारी जी बैठक करते थे वहां एक बंदर प्रतिदिन आकर सुबह से बैठता और रात्रि में आरती के बाद वहां से चला जाता वह कहां जाता पता ही नहीं चलता कुछ पुराने भक्तों ने बताया कि एक पुजारी हुआ करते थे जो की हनुमान जी की सेवा करते थे कुछ समय बाद उनका देहांत हो गया पुजारी जी के देहांत के बाद वह बंदर प्रतिदिन इस स्थान पर आकर बैठने लगा उसके बाद मंदिर के वर्तमान महंत नागेंद्र जी वह हनुमान जी की बड़ी प्रतिमा का निर्माण करना चाहते थे मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के बाद वह बंदर कभी दिखाई नहीं दिया भक्तों का मानना है कि मूर्ति स्वयं बजरंगबली की प्रेरणा से बनी है l
भक्तों ने बताया कि 1999 2000 में एक तहसीलदार मुखर्जी ने बजरंगबली की मूर्ति पर आपत्ति जताई मंदिर पर आर्थिक दंड भी लगाया प्रतिमा को तोड़ने की बात भी कहीं ब्रह्मचारी जी ने आर्थिक दंड भी दिया कुछ ही दिन में तत्कालीन अधिकारी को लगवा ग्रस्त होना पड़ा साथ ही उसके परिवार में अप्रिय घटना भी हुई अधिकारी का तबादला भी हो गया इस विशालकाय प्रतिमा से भक्तों की आस्था भी जुड़ी है मंदिर के महंत ब्रह्मचारी जी को सपने में हनुमान जी ने दर्शन दिए और स्वयंभू प्रतिमा जिनका केवल शीर्ष की पूजन होती आई है उसे बाहर निकालने के काफी प्रयास भी किए गए सपने में बाहर निकलने से पूर्ण रूप में मना किया इस घटना के बाद तलघर का रास्ता बनाया गया जिनकी चरण वंदना केवल ब्रह्मचारी जी के द्वारा साधना और पूजन की जाती है शहर के बाजार के बीचों-बीच चौराहे पर निगरानी करती विशालकाय प्रतिमा अनगढ़ हनुमान मंदिर में विराजमान है l
निगरानी करते हनुमान जी की प्रतिमा का आकर्षण इतना अधिक है कि राह से गुजरने वाले भक्तों का ध्यान स्वयं मूर्ति में आ जाता है और वह मंदिर में दर्शन के लिए पहुंच जाते हैं मंदिर में हमेशा कार्यक्रम चलते रहते हैं श्रद्धालुओं की भीड़ हमेशा बनी रहती है।

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