सेवारत चिकित्सकों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत
NEET PG 2025 में अधिभार अंक व कोटा लाभ देने का ऐतिहासिक आदेश
दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर/सतना | 26 मार्च 2026मध्यप्रदेश में सेवारत चिकित्सकों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि शासन द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करना सभी विभागों के लिए अनिवार्य है, इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
*क्या है पूरा मामला*
याचिकाकर्ता डॉ. ओमप्रकाश पांडे सिविल अस्पताल मैहर में वर्ष 2012 से चिकित्सा अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने NEET PG 2025 परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
राज्य शासन के 28 जून 2019 के आदेश और Medical Council of India के प्रावधानों के अनुसार ग्रामीण व दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत डॉक्टरों को हर वर्ष 10% अधिभार अंक (अधिकतम 30%) और सेवारत कोटा का लाभ मिलना तय है।
इसके बावजूद संबंधित विभाग द्वारा उन्हें यह लाभ नहीं दिया गया, जबकि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सतना द्वारा अनुशंसा भेजी जा चुकी थी। मजबूर होकर याचिकाकर्ता को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
*कोर्ट का सख्त रुख*
न्यायालय ने उपसंचालक, संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, भोपाल को निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता को सेवारत अभ्यर्थी मानते हुए NEET PG 2025 में अधिभार अंक और कोटा लाभ तत्काल प्रदान किया जाए।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि—
वैधानिक नियमों की अनदेखी प्रशासनिक विवेक नहीं हो सकती
पात्र अभ्यर्थियों को लाभ से वंचित रखना अनुच्छेद 14 के खिलाफ है
सेवारत चिकित्सकों को मिलने वाले अंक उनका अधिकार हैं, न कि कोई कृपा।
*क्या होगा असर*
इस फैसले का प्रभाव दूरगामी माना जा रहा है—
अन्य सेवारत चिकित्सकों को भी इसका लाभ मिलेगा
विभागों की जवाबदेही तय होगी
ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत डॉक्टरों का मनोबल बढ़ेगा
चिकित्सा सेवा और उच्च शिक्षा के बीच संतुलन मजबूत होगा।
*कानूनी महत्व*
यह निर्णय स्पष्ट करता है कि नीतियों का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब उन्हें जमीन पर लागू किया जाए। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायपालिका पूरी तरह सजग है।
प्रकरण में पैरवी: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के अधिवक्ता गोपाल सिंह बघेल के द्वारा किया गया।
संपर्क: 9229653295