नैनपुर में ‘खामोशी’ के पीछे बड़ा खेल! 150 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा, चर्चा तेज पर आवाज़ गायब

गुपचुप चर्चा तो जमकर हो रही पर सामने कोई नहीं आ रहा
नैनो की नगरी नैनपुर में नैना सब देख रहे पर बोल कुछ नहीं रहे
करोड़ों की जन उपयोगी 150 एकड़ शासकीय भूमि पर कब्जा

दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला, मंडला जिले से पृथक जिले की मांग करने वाला नैनपुर नगर विकास के लिए सजक माना जाता है यहां के लोग एकता के सूत्र में बंद कर विभिन्न मांग व आंदोलन समय-समय पर करते रहते हैं लेकिन अतिक्रमण के मामले में मौन क्यों है यहां कब्जाधारी नियम कानून पर पड़ रहे हैं भारी, सूत्रो से प्राप्त जानकारी के अनुसार यहां वार्ड नंबर 7 के इटका उमरिया हाल एवं लगे हुए ग्राम गौझी पाइली में 7-8 लोगों के द्वारा लगभग 150 एकड़ शासकीय भूमि में अवैध कब्जा कर कृषि कार्य किया जा रहा है। उक्त भूमि नगर विकास के लिए बेहद उपयोगी है। अतिक्रमण की वजह से यहां प्रस्तावित सौर ऊर्जा संयंत्र, उपजेल, खेल मैदान एवं आवास हीनों की आवास योजना जैसे अनेक कार्य नहीं हो पा रहे हैं विदित है की भूमि न मिलने की वजह से यहां का केंद्रीय विद्यालय, अस्पताल, बस स्टैंड आदि निर्माण कार्य नगर से दूर करायें जा रहे हैं जबकि उक्त कब्जा क्षेत्र में सुलभ आवागमन के लिए बायपास मार्ग बना है। फिर इस और ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा‌। राजस्व विभाग द्वारा कब्जा करने वालों को नोटिस तो दे दी गई है लेकिन करोड़ों की जन उपयोगी उक्त जमीन पर कब विकास होगा‌। सूत्रों की माने तो पक्ष विपक्ष दोनों के लोगों ने मिलकर कब्जा किया है इसलिए राजनीतिक संरक्षण के चलते मामले का निपटारा नहीं हो पा रहा है स्थानीय स्तर पर इस विषय की गुपचुप चर्चा तो जमकर हो रही है पर खुलकर कोई सामने नहीं आना चाहता क्योंकि नगर पालिका अध्यक्ष बनने में वोट बैंक खराब न हो जाए बहुत सारे उम्मीदवार अभी से नजर आ रहे हैं। समाचार प्रकाशित करने के बाद संबंधित विभाग एवं सरकार के जिम्मेदार लोग इस विषय को कितना गंभीरता से लेते हैं ये तो आने वाला समय ही तय करेगा, या यूं ही गोल-गोल जांच वह नोटिस भेजकर जवाब मांगने का सिलसिला चलता रहेगा‌।
वही दूसरी ओर प्रदेश सरकार शासकीय भूमि में अबेध अतिक्रमण कब्जा हाटने के लिए नित्य नये आदेश जिले मुखिया कलेक्टर को दे रही हैं वही दूसरी और राजनीति संरक्षण प्राप्त भू माफिया सक्रिय नज़र आ रहे है जो शासकीय खाली पड़ी भूमि को निशाना बना रहे हैं और स्थानीय प्रशासन और जिला प्रशासन अब एक दूसरे का मुँह ताकते नज़र आ रहें है!

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