कमलनाथ सरकार ने ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण लागू किया था ।लेकिन बीजेपी सरकार ने इस आरक्षण के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा

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दैनिक रेवांचल टाइम्स बालाघाट खटखटाकर ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण के इस लाभ से वंचित कर दिया है।तो वही सरकार द्वारा 13% पदों पर होल्ड लगाकर रखा गया है। जिसके चलते ओबीसी वर्ग के युवाओ को उनका हक व अधिकार नही मिल पा रहा है तो वही ओबीसी वर्ग प्रदेश सरकार से काफी नाराज है।06 वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद भी प्रदेश की भाजपा सरकार 27% आरक्षण को लागू नहीं कर पाई है वही ओबीसी वर्ग को आरक्षण से वंचित करने के लिए वकीलों को करोड़ों रुपए अब तक सरकार खर्च कर चुकी है।ऐसा आरोप लगाते हुए ओबीसी महासभा ने एक बार फिर ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण दिए जाने और 13% पदों पर लगाए गए होल्ड को तत्काल हटाकर ओबीसी वर्ग के लाखों अभ्यर्थियों को नियुक्ति दिए जाने की मांग की है। जहां उन्होंने आरक्षण सहित अपनी अन्य 10 से अधिक सूत्रीय मांगों को लेकर गुरुवार को जय स्तंभ चौक स्थित छात्रावास में एक पत्रकार वार्ता का आयोजन कर भाजपा सरकार को आरक्षण विरोधी सरकार बताया। तो वहीं उन्होंने छात्रावास से एक रैली के माध्यम से कलेक्टर कार्यालय में एकज्ञापन सौपा है।जहां प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर सौंपे गए इस ज्ञापन में ओबीसी महासभा द्वारा आरक्षण सहित उनकी अन्य लंबित मांगों को यथाशीघ्र पूरी किए जाने की गुहार लगाई गई है।उन्होंने इन मांगों को पूरी करने के लिए सरकार को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है।जिन्होंने समय सीमा के भीतर मांगे पूरी न होने पर मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर धरना प्रदर्शन किए जाने की चेतावनी दी है।
रैली निकालकर की जमकर नारेबाजी, सौपा ज्ञापन
ज्ञापन के पूर्व ओबीसी महासभा द्वारा जय स्तंभ चौक स्थित फुले छात्रावास भवन में एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। आयोजित इस पत्रकार वार्ता में उपस्थित पदाधिकारियो ने प्रदेश की भाजपा सरकार को आरक्षण विरोधी सरकार बताते हुए ओबीसी को 27% आरक्षण देने में अड़ंगा डालने का आरोप लगाया है। जहां उन्होंने ओबीसी को आरक्षण न दिए जाने को लेकर कोर्ट में वकीलों पर अब तक जनता के टैक्स से करोड़ो रुपए खर्च किए जाने की भी बात कही है। जिन्होंने आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान स्पष्ट कर दिया कि बीजेपी सरकार ओबीसी आरक्षण विरोधी सरकार है। जिन्होंने ओबीसी को उनका हक और अधिकार दिए जाने की बात कहते हुए 15 दिनों के भीतर मांगे पूरी न होने पर मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर उग्र प्रदर्शन किए जाने की चेतावनी दी है।जिसके तुरन्त बाद ओबीसी महासभा द्वारा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक आक्रोश रैली निकाली गई।यह रैली छात्रावास से जय सतम्भ चौक वहां से डॉ विश्वेश्वरैया चौक होते हुए सीधे कलेक्टर कार्यालय पहुंची।जहा ओबीसी महासभा द्वारा जमकर नारेबाजी कर ज्ञापन सौपा गया है।

इन प्रमुख 10 सूत्रीय मांगों को लेकर सौपा ज्ञापन
ओबीसी महासभा द्वारा सौपे गए इस ज्ञापन में प्रमुख रूप से पूरे देश में जातिगत जनगणना कराकर जनसंख्या के हिसाब से हर क्षेत्र में आरक्षण दिए जाने, 2027 की सामान्य जनगणना में जातिगत जनगणना का कलाम जोड़े जाने, बैकलॉग भर्ती एसटी एससी ओबीसी के लिए परमानेंट सरकारी नौकरी लगभग 70 लाख पद पर भर्ती किए जाने, मध्य प्रदेश ओबीसी के होल्ड13% पदों को अनहोल्ड करके 27% आरक्षण लागू करने और चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति की नियुक्ति किए जाने,पिछड़ा वर्ग अन्य पिछड़ा वर्ग ओबीसी के छात्रों को मेडिकल इंजीनियरिंग मैनेजमेंट सहित समस्त प्राइवेट कॉलेज में सरकारी फीस पर एडमिशन देने, जातिगत भेदभाव एवं ओबीसी समाज पर आए दिनों बढ़ रहे अत्याचार के खिलाफ पिछड़ा वर्ग को ओबीसी अत्याचार निवारण अधिनियम (ओबीसी इंट्रोसिटी एक्ट) देने, ग्वालियर हाई कोर्ट खंडपीठ में बाबा सब की प्रतिमा स्थापित किए जाने के साथ ही देश के समस्त जिला सत्र न्यायालय एवं हाईकोर्ट में बाबा साहेब की प्रतिमा स्थापित करने ,हैदराबाद तेलंगाना में ओबीसी आरक्षण 42% पंचायत चुनाव से पहले लागू करने, शासकीय नौकरी एवं शिक्षण संस्थानों में 42% ओबीसी आरक्षण लागू करने, वही उत्तर प्रदेश के इटावा में यादव समाज के कथा वाचक पुरोहित को अपमानित करने वाली घटना पर कठोर कदम उठाते हुए कड़ी कार्यवाही किए जाने और जिला मुख्यालय स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज के सामने ओबीसी छात्रावास परिसर में फैले अतिक्रमण को मुक्त कर छात्रों के उपयोग के लिए उस हॉस्टल और परिसर को सुरक्षित रखने की मांग की ।इसके अलावा उन्होंने जबलपुर के पनागर तहसील में कथा वाचक देविका पटेल को भागवत कथा कहने से रोकने व उनके खिलाफ अनावश्यक शब्दों का उपयोग करने वालों के खिलाफ कठोर कार्यवाही किए जाने, इसी तरह कथावाचक यामिनी साहू को कथा करने से रोकने व उनके साथ अभद्र व्यवहार करने वालों सहित कौशांबी में 8 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ किए गए दुष्कर्म और अन्य घटनाओं को लेकर भी ज्ञापन सौपा गया है। जिसमें उन्होंने इन सभी मांगों को तत्काल पूरा किए जाने की गुहार लगाई है

तो मुख्यमंत्री आवास का किया जाएगा घेराव – सौरभ
ओबीसी महासभा प्रदेश अध्यक्ष सौरभ लोधी ने बताया कि ओबीसी वर्ग को उनके हक व अधिकारों से वंचित रखने का काम प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा किया जा रहा है। कमलनाथ सरकार में जो 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था उसे भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने कोर्ट में चुनौती दी है और ओबीसी वर्ग को यह आरक्षण ना मिले इसके लिए वकीलों को अब तक 6 वर्षों में इस सरकार ने लगभग 56 करोड़ से अधिक रुपए दिए हैं। यह सरकार आरक्षण विरोधी सरकार है। अब तक ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण सरकार द्वारा नहीं दिया गया है वहीं सरकार इस आरक्षण को देने में तरह-तरह के अडंगे पैदा कर रही है। इसके अलावा सरकारी नौकरी में 13% पदों पर होल्ड लगाकर रखा गया है। जिसके चलते ओबीसी वर्ग के लाखों युवाओं को नियुक्ति पत्र नहीं मिला है और वह बेरोजगार घूम रहे हैं। उनकी उम्र बढ़ रही है। इसीलिए आज धरना प्रदर्शन रैली के माध्यम से आरक्षण सहित अन्य मांगों को लेकर ज्ञापन सौपा गया है। साथ ही सरकार को इन सभी मांगों को पूरा करने के लिए 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया है यदि इन 15 दिनों के भीतर मांगे पूरी नहीं होती तो ओबीसी महासभा द्वारा भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।

भाजपा सरकार ओबीसी आरक्षण विरोधी सरकार है- हेमंत साहू
ओबीसी छात्र संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हेमंत साहू ने बताया कि आरक्षण कोई गरीबी उन्मूलन योजना नहीं है।यह देश के संसाधनों में प्रतिनिधित्व का मामला है।संविधान में आरक्षण का उद्देश्य सिर्फ आर्थिक स्थिति सुधारना नहीं,बल्कि उन वर्गों को प्रतिनिधित्व देना है जो सदियों से वंचित हैं।वर्तमान समय में मप्र में भाजपा सरकार ओबीसी आरक्षण पर कुंडली मार कर बैठी हुई है।कोर्ट में ओबीसी आरक्षण पर किसी प्रकार का कोई रोक नहीं है।भाजपा सरकार जानबूझकर ओबीसी आरक्षण पर गुमराह कर रही है।और 13% पदों को होल्ड करके चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है।

सरकार आरक्षण को लेकर तरह-तरह के अडंगे डाल रही है- मनीष
ओबीसी महासभा जिलाध्यक्ष मनीष राहंगडाले ने बताया कि तत्कालीन सरकार के 27 प्रतिशत आरक्षण के विधेयक पास होने के बावजूद, प्रदेश में 13 प्रतिशत पदो की नियुक्ति पर, सरकार ने होल्ड लगा रखा हैं। जिससे हजारो आवेदक, ज्वाईनिंग नहीं मिलने से परेशान है। आवेदक ओवरऐज हो रहे है, जिससे, वह नौकरी के लिए फिर पात्र नहीं होंगे। सरकार विभिन्न माध्यमों से ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने में अड़चने पैदा कर रही है।

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