तहसील मुख्यालय घुघरी में निजी क्लीनिक और झोलाछाप का संचालन जोरों पर..

जिले के सभी विकासखंड में जांच जोरों लेकिन घुघरी विकासखंड में जिला प्रशासन मौन...

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रेवांचल टाइम्स मंडला- आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र मंडला जिले में वर्तमान में वारिश का मोसम चल रहा है ग्रामीणों खेती कार्य भी लगातार चल रहा है जिस कारण से बीमारी की संख्या में इजाफ़ा हो रहा और सरकारी व्यवस्था तो चौपट हो चुकी है जिसका फ़ायदा सीधे निजी किलिनिक और झोलाछाप डॉ उठा रहें है और ग़रीब जानता को लूट रहें है और इनकी मान्यता या रजिस्ट्रेशन जिसका है उस पद्धति से इलाज न करते हुए ईलोपैथिक से इलाज करते नज़र आ रहें है !
वही आये दिन समस्या बढ़ती ही नजर आती है और जिला प्रशासन की तरफ से कार्रवाई भी की जाती है लेकिन समाधान का स्तर दिन पर दिन गिरता ही जा रहा है…
ऐसा ही नया मामला तहसील मुख्यालय घुघरी का है जहां पर बारिश के मौसम में बीमारियों का खतरा बढता जा रहा है और ग्रामीण अंचल के लोग जानकारी के अभाव में खान-पान में सावधानी नहीं रखते जिसके चलते आम तौर पर वह बीमार हो जाते हैं जबकि समय समय पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के द्वारा लगातार एडवाइजरी भी दी जाती है लेकिन ग्रामीण उसको अपना नहीं पाते जिसका पूरा फायदा निजी क्लीनिक संचालन करने वाले डाक्टर उठाते हैं और अपनी आधी अधूरी डिग्रियों के माध्यम से ग्रामीण जनों का इलाज तो करते हैं लेकिन इसके बाद भी बहुत से लोग गलत इलाज के चलते अपनी जान गवां देते हैं लेकिन इसमें केवल दोष ग्रामीण अंचल के नागरिकों का नहीं होता बल्कि जिले में अवैध रूप से संचालित निजी क्लीनिक का भी होता है जिनको जानकारी नहीं होती कि कहां कब किसका कैसा इलाज करना चाहिए..
वहीं मुख्यालय में बैठे खण्ड चिकित्सा अधिकारी भी जिम्मेदार हैं क्योंकि इनके द्वारा कभी भी अपने क्षेत्र में कितने निजी क्लीनिक संचालित करने वाले डाक्टर की जानकारी नहीं ली जाती और न पता किया जाता कि ये इलाज करने योग्य हैं या नहीं क्योंकि विधिवत जांच के अनुसार किसी भी तरह से उपचार करते ही नहीं हैं..
शुगर के मरीज को भी बाटल लगाकर उसका उपचार कर देते हैं जिससे उस मरीज की हालत गंभीर हो जाती है फिर भी चिकित्सा विभाग को कोई लेना देना नहीं होता..
ग्रामीण अंचल के लोगों को बुखार आया तो ये डाक्टर पैरासिटामोल दे देते हैं और ज्यादा हुआ तो इंजेक्शन लगाकर मोटी रकम वसूल लेते हैं और बाद में जब हालत में सुधार की जगह हालत बिगड़ती नजर आती है तो शासकीय अस्पताल जाने की सलाह देकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं और शासकीय अस्पताल में नहीं समझ आया तो मंडला रेफर कर दिया जाता है!
अब इस समस्या का समाधान जिला प्रशासन ही कर सकता है कि जिले में संचालित निजी क्लीनिक पर सख्त कार्रवाई करते हुए जिले में इन डाक्टर से आम जन के जीवन को बचाया जा सके!

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