पद्म विभूषण सैयद हैदर रज़ा स्मृति का नौवां बरस…

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स्मृति समारोह का चौथा दिन, कविता पाठ का आखिरी सत्र :

रेवाँचल टाईम्स – मंडला मंगलवार को रज़ा स्मृति के साहित्यिक आयोजन में सुबह 11 बजे सत्र का आरंभ अशोक जी के वक्तव्य से हुआ। अशोक वाजपेई ने सभी आमंत्रित अतिथियों और कवि साहित्यकार का स्वागत करते हुए अशोक जी ने महान कलाकार रज़ा साहब को याद करते हुए उनके महान स्वप्न का जिक्र किया कि रज़ा साहब ने जिन परिस्थितियों में अपनी कला साधना के लिए भौतिक संघर्ष का सामना किया और अपनी कला को भारत की धरती से लेकर दुनिया की धरती और संवेदना तक ले गए वह अनुकरणीय इतिहास है। रज़ा साहब के स्वप्न को साकार करता उनके द्वारा स्थापित फाउंडेशन ने देश से विदेश तक उनके सपनों को साकार किया और कर रहे हैं, यह कलाओं के सम्मिलन, सहकार और कला संस्कार के उजले भविष्य का परिदृश्य है।

 

कविता पाठ के आखिरी सत्र में पूरे देश से आए चर्चित युवा , वरिष्ठ कवियों ने कविता पाठ किया। कविता पाठ के इस सत्र में शैलेय, जोशना बनर्जी आडवाणी, पूनम अरोड़ा, पराग पावन, सुंदर चंद्र ठाकुर, बाबुषा कोहली, अजित कुमार राय ने अपनी प्रतिनिधि कविताओं का पाठ किया। कविता सुनने स्थानीय मंडला के नागरिकों की भरपूर उपस्थिति आश्वस्त कर रही थी कि साहित्य और कलाओं का संसार सुंदर है और इस पृथ्वी को अधिकतम सुंदर और मानवीय बना सकने की दिशा में प्रयत्नरत हैं।  कविताएं सुनने के लिए सामने दर्शक दीर्घा में बड़े बड़े कवि, साहित्यकार, कलाकार और युवा साथी मौजूद थे। कविता का आखिरी सत्र समाप्त होने के बाद हम सभी कवि, कलाकार और स्थानीय लोग रज़ा कला वीथिका के भ्रमण को गए, जहां हम सबने छाता पेंटिंग, और चाक पर गीली मिट्टी से आकृतियों को रचने का सुख लिए।

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