प्रभारी पदों पर मनमानी: वरिष्ठों को नजरअंदाज़ कर जूनियर को मिली जिम्मेदारी
प्रभारी बनाने के लिए शासन के मनमाने नियम मुँह देख बनाया जा रहा है नियम क़ानून
पडोसी जिले डिडौरी में वरिष्ठता में निचले क्रम के अधिकारी को दिया उच्च पद का प्रभार

रेवांचल टाईम्स – मंडला, जिले के किसान कल्याण तथा कृषि विकास कार्यालय मंडला में किसानों का विकास हो या न हो तेजी से उनके अधिकारी और कर्मचारियों का विकास हो रहा है सरकार जहाँ किसानों के लिए अनेकों योजनाएं क्रियान्वयन कर रही पर वह केवल कागजों तक ही सीमित रह गई आंकड़े कुछ बताते है और उनकी जमी हकीकत कुछ ही व्यया करती है और ये कार्यालय भ्रष्टाचार इस कदर तक डूबा हुआ हैं जिसकी कोई सीमा नही है पर जाँच होती है पर केवल दिखावे के लिए वही पड़ोसी जिले में इस विभाग में इतना भ्रष्टाचार हुआ कि जबलपुर की जाँच एजेन्सी ने अपने हाथों ले लिए है और जाँच शुरू कर दी है।
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन दिनों उच्च पद पाने के लिए लालसा में जूनियर सीनियर नही देखा जा रहा और न ही अनुभव देखा जा रहा है और आगे देखा जा रहा है तो वह की किसकी कितनी पहुँच है और पैसा के साथ साथ ऊपर तक अच्छी पहुँच परक भी होनी अवश्य है, प्रभारी बनाने और अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए शासन द्वारा अलग-अलग नियम बना दिए जाते हैं। जिसकी बानगी देखने को मिल रही हैं आदिवासी जिले मंडला एवं डिंडौरी में जहां एक ओर डिंडौरी जिले में कृषि विभाग की शासन द्वारा जारी वरिष्ठता क्रम में सबसे ऊपर 34 नंबर पर अंकित चेतराम अहिरवार एसडीओ एवं 174 नंबर पर अंकित ए एस उइके उप परियोजना संचालक आत्मा डिंडोरी होने के बाद भी विभागीय जांच का हवाला देते हुए वरिष्ठ क्रम में 285 नंबर पर अंकित जूनियर अधिकारी अभिलाषा चौरसिया सहायक संचालक कृषि को प्रभारी उपसंचालक बना कर उच्च पद का प्रभार दिया गया है। वहीं दूसरी ओर मंडला जिले में अश्वनी झारिया सहायक संचालक कृषि को बीज घोटाले की विभागीय जांच एवं ईओडब्ल्यू में एफआईआर आरोपी होने के बाद भी प्रभारी उपसंचालक कृषि का उच्च पद भार दिया गया है। एक ही पद के लिए दोनों जिलों में अलग-अलग नियम बनाकर सरकार द्वारा भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना प्रतीत होता है जबकि डिंडोरी जिले में दो अधिकारी वरिष्ठता सूची में सबसे ऊपर है बावजूद इसके निचले क्रम के अधिकारी को उच्च पद का प्रभार दे दिया गया है।
वही इस पूरे मामले की शिकायत मंडला प्रवास के दौरान मुख्यालय पहुंचे जिले के प्रभारी मंत्री दिलीप जायसवाल से भी की गई है। पर अब देखना बाकी है कि जो शिक़वा शिकायत हुई है उसमे कब तक कार्यवाही होती है या फिर जैसे इसके पहले भी ऐसी हुई शिकायत धूल खा रही वह भी धूल खाते रहेगी और जिम्मेदार अधिकारी कार्यालय में बैठकर मलाई।