दूषित जल पीने को मजबूर मोहगांव वासी, जिम्मेदार बेखबर

रेवांचल टाइम्स मोहगांव मंडला जनपद पंचायत मोहगांव अंतर्गत मुख्यालय ग्राम पंचायत मोहगांव माल में नागरिकों को पीने के लिए शुद्ध पेयजल तक मयस्सर नहीं है। एक ओर जहां सरकार “हर घर नल से जल” और स्वच्छ भारत मिशन जैसे अभियानों पर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। मोहगांव के रहवासी आज भी गंदा, कीटाणु युक्त, बदबूदार पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे क्षेत्र में बीमारियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि गांव के नलों से जो पानी सप्लाई हो रहा है, वह किसी भी रूप में पीने योग्य नहीं है। इसमें न सिर्फ बदबू है, बल्कि कई बार कीड़े और गंदगी साफ देखी जा सकती है। इससे लोगों में डायरिया, उल्टी, पेट दर्द, त्वचा रोग,इंफेक्शन, जैसी गंभीर बीमारियाँ फैल रही हैं। इसके बावजूद भी पंचायत और प्रशासनिक महकमे की नींद नहीं टूटी है।

करोड़ों की लागत से बना फिल्टर प्लांट बना शोपीस
कांग्रेस नेता हसीब खान ने इस गंभीर समस्या पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए स्थानीय प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि मोहगांव में कुछ वर्षों पूर्व करोड़ों रुपए खर्च कर जल फिल्टर प्लांट लगाया गया था, जिसका उद्देश्य था गांववासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना। परंतु लापरवाही, भ्रष्टाचार और तकनीकी उदासीनता के चलते वह प्लांट आज तक पूरी तरह संचालित नहीं हो पाया।

इस मुद्दे की जानकारी पूर्व में कई बार जनप्रतिनिधियों, मीडिया और ग्राम पंचायत के माध्यम से संबंधित विभागों तक पहुँचाई गई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिले

प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल कांग्रेस का आंदोलन की चेतावनी
हसीब खान ने आरोप लगाया कि जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत के कारण न सिर्फ जनता की जान खतरे में डाली जा रही है, बल्कि करोड़ों की सार्वजनिक राशि भी व्यर्थ जा रही है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई और फिल्टर प्लांट को चालू नहीं किया गया, तो कांग्रेस पार्टी गांव के जनमानस के साथ मिलकर एक बड़ा जन आंदोलन खड़ा करेगी।

जनहित में मांगी गई त्वरित कार्रवाई
मोहगांव की जनता और कांग्रेस पदाधिकारियों ने शासन-प्रशासन से अपील की है कि इस संवेदनशील जन-स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या को गंभीरता से लिया जाए और अविलंब स्वच्छ जल आपूर्ति की व्यवस्था की जाए। अन्यथा प्रशासन की यह चुप्पी भविष्य में बड़ी स्वास्थ्य आपदा का कारण बन सकती है।

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