बीजाडांडी विकास खंड के ग्राम घोंटा में संत रामपाल जी महाराज का सत्संग

विभिन्न धर्मों के ग्रंथों के बारे में संदेश दिया, परमात्मा के निराकार रूप की व्याख्या की
सत्संग सतगुरु रामपाल जी महाराज के मुख्य उद्देश्य विश्व में शांति समाज से बुराइयों को दूर करना
रेवांचल टाइम्स मंडला:- मंडला जिले के बीजा डांडी विकास खंड के ग्राम घोंटा में रविवार को दोपहर से देर शाम तक जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज का सत्संग आयोजित किया गया। इस आयोजन में संत रामपाल जी महाराज ने अपने प्रवचन के माध्यम से विभिन्न धर्मों के सद्ग्रंथों का संदर्भ देते हुए परमात्मा की साकार और निराकार रूप में व्याख्या की सतगुरु रामपाल जी महाराज के मुख्य उद्देश्य और आज का सत्संग सतगुरु रामपाल जी महाराज के मुख्य उद्देश्य विश्व में शांति समाज से बुराइयों को दूर करना सतगुरु रामपाल जी महाराज के मुख्य उद्देश्य विश्व में शांति स्थापित करना, समाज से बुराइयों को दूर करना और ‘सतभक्ति’ के माध्यम से मोक्ष प्राप्त करना है। आज का सत्संग (सत्संग का अर्थ है ‘सच्ची संगति’ या ‘सत्य का संग’) संभवतः इसी विषय पर केंद्रित होगा, जिसमें ‘सतभक्ति’ के महत्व और लाभों पर प्रकाश डाला जाएगा।
आज का सत्संग : –
आज का सत्संग संभवतः ‘सतभक्ति’ के महत्व पर केंद्रित होगा। सत्संग में, संत रामपाल जी ‘सतभक्ति’ के लाभों, जैसे कि सांसारिक कष्टों से मुक्ति, मानसिक शांति और ‘मोक्ष’ की प्राप्ति, के बारे में बताते हैं। सत्संग में, वे ‘पूर्ण परमात्मा’ और ‘सृष्टि रचना’ के बारे में भी बताते हैं, जो ‘सतभक्ति’ के मार्ग को समझने के लिए आवश्यक है। सत्संग का महत्व सत्संग’ एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है, जहां व्यक्ति ‘सत्य’ को जानने और ‘सतभक्ति’ करने के लिए प्रेरित होता है। सतगुरु रामफल जी महाराज का कहना है कि सत्संग के माध्यम से, व्यक्ति अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझ सकता है और ‘मोक्ष’ प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है
संत कबीर की सुनाई पंक्तियां
संत रामपाल जी महाराज ने अपने सत्संग में यह प्रमाणित किया कि परमात्मा साकार और नर आकार (मनुष्य जैसा) हैं। उन्होंने बताया कि पूर्ण परमात्मा कविर्देव पृथ्वी पर चारों युगों में आए हैं और वे सतयुग से लेकर कलयुग तक विभिन्न रूपों में प्रकट हुए हैं। संत ने संत कबीर की कुछ पंक्तियों को उद्धृत किया: कबीर, सतयुग में सत सुकृत कह टेरा, त्रेता नाम मुनींद्र मेरा। द्वापर में करुणा में कहलाया, कलयुग नाम कबीर धराया।
वेदों के बारे में बताया
उन्होंने यह सिद्ध किया कि कबीर परमात्मा ने पहले सतलोक की रचना की और फिर बाद में परब्रह्म और ब्रह्म के लोकों और वेदों की रचना की। संत रामपाल जी महाराज ने वेदों में कविर्देव का विवरण होने का भी उल्लेख किया और बताया कि परमात्मा साकार हैं। उन्होंने यह भी बताया कि परमात्मा का शरीर है और वह जब संसार में तत्वज्ञान देने के लिए आते हैं, तो वह अपने वास्तविक शरीर पर प्रकाश के हल्के पुंज का शरीर धारण करके आते हैं। इसका प्रमाण उन्होंने पवित्र कुरान से भी दिया और कहा कि अल्लाह भी साकार रूप में है।
अल्लाह के बारे में भी बताया
संत ने बताया कि हजरत मुहम्मद को कुरान शरीफ बोलने वाला प्रभु (अल्लाह) कह रहा है कि वह वही कबीर प्रभु है, जिसने सृष्टि की रचना की और फिर सातवें दिन अपने सत्यलोक में विराजमान हो गए।

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