जिले के चार हजार अतिथि शिक्षकों को मानदेय नहीं मिलने से फीका न पड़ जाए भाई-बहन का रक्षाबंधन त्यौहार

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क्या संवेदनशील मुख्यमंत्री जी संज्ञान लेकर नियमित रोजगार देने करेंगे विचार ??

रेवाँचल टाईम्स – अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के जिला अध्यक्ष पी . डी.खैरवार ने प्रदेश के लोकप्रिय और संवेदनशील मुख्यमंत्री कहे जाने वाले डॉ मोहन यादव से मांग की है,कि स्थाई शिक्षकों की भांति अतिथि शिक्षकों को भी ऑफलाइन उपस्थिति के आधार पर भाई-बहन के त्यौहार रक्षा बंधन पर जुलाई माह का मानदेय भुगतान अवश्य किया जाये। गौरतलब है , कि वर्तमान सत्र में सभी अतिथि शिक्षकों को ई अटेंडेंस लगाने के आदेश जारी किए गए थे। हमारे शिक्षक एप में व्याप्त विसंगतियों, भारी बारिश, एंड्रॉयड मोबाइल उपलब्ध नहीं होने और ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने जैसी समस्याओं के चलते शत-प्रतिशत ई अटेंडेंस लगाना संभव नहीं हो पा रहा है। जब ऑफलाइन उपस्थिति के आधार पर स्थाई शिक्षकों का वेतन भुगतान किया जा रहा है,तो फिर अतिथि शिक्षकों से सौतेला व्यवहार क्यों ?? जबकि मण्डला जिले में लगभग दो हजार बहिनें अतिथि शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। क्या अतिथि शिक्षकों को ऐसे बड़े त्यौहार भी मनाने का हक नहीं है। रक्षा बंधन जैसे त्यौहार पर हजारों अतिथि शिक्षकों को मानदेय भुगतान ना करके शिक्षा विभाग सरकार की छवि धूमिल अवश्य कर रहा है। आज के आज रक्षाबंधन के दिन तक भी मानदेय भुगतान कर गरीब और मध्यम वर्गीय अतिथि शिक्षक परिवारों के आर्थिक बोझ को कम करने सरकार से मांग की जाती है।

रिक्त पदों पर फॉलन आउट अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति हो

लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के आदेशानुसार रिक्त पदों को पोर्टल पर संस्था प्रभारियों के द्वारा अपडेट किया जाना था। लेकिन फिर भी समय से पद अपडेट नहीं किए जा रहे हैं। अभी भी जिले के सरकारी स्कूलों में सैकड़ों पद अपडेट नहीं किए गए हैं। इन पदों पर महाविद्यालय में कार्यरत अतिथि विद्वानों की तरह सीधी भर्ती प्रमोशन ट्रांसफर से बाहर होने वाले अतिथि शिक्षकों को अवसर अवश्य दिया जाना न्यायसंगत होगा। ताकि लंबे समय से शिक्षा देने जैसे कार्य में अनुभवी अतिथि शिक्षकों को उज्जवल भविष्य बनाने अवसर मिल सके ।
प्रशिक्षित अनुभवी अतिथि शिक्षकों को बिना देर किए दिया जाए शिक्षक का दर्जा
ऐसे अतिथि शिक्षक जो काम पर हैं या जो किन्हीं कारणों वश काम से निकाल दिए गए हैं, स्कूलों में पद सृजित कर काम पर बुला लिया जाए और नियमित शिक्षक का दर्जा दिए जाने सरकार पहल करे। जिसके लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी भोपाल में महा पंचायत बुलाकर घोषणा की थी,पर अमल नहीं किया जा सका है।

अप्रशिक्षित अतिथि शिक्षकों को भी प्रशिक्षित करके दिया जाए नियमित शिक्षक का दर्जा
सरकार की माली हालत के दौरान सरकारी स्कूलों में रैगुलर शिक्षकों की भारी कमी के चलते सरकार ने बिना बी एड,बिना डी एड अतिथि शिक्षकों को अतिथि शिक्षक के रूप में मैरिट के आधार पर भर्ती करके औसतन बहुत ही कम मानदेय देकर बच्चों के पठन-पाठन जैसे काम कराया है‌।जिनके कार्य से बच्चों के परीक्षा परिणाम भी बेहतर से बेहतर आये हैं। ऐसे में अप्रशिक्षित अतिथि शिक्षकों को सरकारी खजाने से प्रशिक्षित करके नियमित रोजगार देने की ओर पहल करना न्यायसंगत होगा।जिसके लिए लंबे समय से मांग की जा रही है।

पी. डी. खैरवार।
जिला अध्यक्ष
अतिथि शिक्षक समन्वय समिति मण्डला मध्यप्रदेश

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