किसानों के विभाग में लूट और छलावा, मंडला भी बनेगा भ्रष्टाचार का गढ़?
किसानों के विभाग में चल रहा है किसानों के साथ छलावा मची हुई है लूट, क्या डिंडोरी जिले जैसे ही मंडला जिला भी बनेगा भ्रष्टाचार का गढ़
क्या मुख्यमंंत्री डॉ. मोहन यादव बीज घोटाले में लिप्त अधिकारी को जिले से करेंगे बाहर?

.पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीज वितरण में लापरवाही करने पर किया था सस्पेंंड
इंट्रो-
3 दिसम्बर 2022 को पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान औचक निरीक्षण पर जिला डिण्डौरी पहुंचे थे उस दौरान उन्होंने छ: अफसरों को तत्काल निलंबित कर दिया था उन छ: में से एक अधिकारी अश्विनी झारिया हैं जिन्हें बीज वितरण में लापरवाही करने पर सस्पेंड किया गया था। अब डॉ.मोहन यादव की सरकार ने उक्त अधिकारी को मण्डला जिले के किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग में उपसंचालक बनाकर पदस्थ कर दिया। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने औचक निरीक्षण के दौरान मिली शिकायत के आधार पर सस्पेंड किया था, वहीं मोहन यादव की सरकार ने भ्रष्टाचारी अधिकारी को उपसंचालक बनाकर मण्डला में पदस्थ कर दिया जिससे सरकार की छबि पर भी सवाल उठ रहे हैं। उक्त अधिकारी की शिकायत साक्ष्य के साथ वर्तमान सरकार को भी की गई, लेकिन कार्यवाही शून्य है। लोगों का कहना है कि इतनी शिकायतों के बावजूद यदि उक्त अधिकारी को हटाया नहीं गया तो जिले के विधायक, सांसद और सत्तादल के नेताओं का भी मनोबल अपनी पार्टी के प्रति गिर जायेगा। वहीं उक्त अधिकारी का कद भी सबसे ऊपर बढ़ जायेगा। 14 अगस्त को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मण्डला आगमन हो रहा है क्षेत्र के किसानों को उम्मीद है कि शायद मंच से कृषि अधिकारी को हटाने का आदेश जारी करेंगे।
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मण्डला, यू तो आदिवासी बहुल्य मंडला और डिंडोरी जिला ऐसे ही बदनाम है कि इन जिलों में विकास नही हो रहा है ये कौन रहा शायद लोगो को पता ही नही है कि सरकारी योजनाओं केवल सरकारी तंत्र के लिये ही बनी हुई है और बेचारे गरीब आदिवासी मेहनत मजदूरी कर के अपना और अपने परिवार का पालन पोषण आसानी से कर ही लेते है इन्हें किसी सुविधाओं की आवश्कता नही होती है। अगर अगर आवश्कता होती है तो पढ़े लिखे जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी क्योंकि वो दिन रात मेहमत करते है योजनाओं को कार्यान्वित करने और उनके ख़र्चे भी बड़े होते है उनके शौक भी आलिशान होते है गरीबों को तो सब दो वक्त की रोटी मिल जाये ये ही उनका सौभग्य होता है शायद आज इसलिए बड़े बड़े ग़बन घोटाले भ्रस्टाचार हो रहे है और जाँच एजेन्सी भी केवल अपना भय दिखा कर एक मोटी फाइल तैयार कर उसे धूल खाने छोड़ देती है और जिले के सत्तादल नेता भी हैरान हैं कि लाखों का बीज घोटाला करने वाले भ्रष्टाचारी उपसंचालक को प्रदेश सरकार में किसका संरक्षण मिल रहा है। जब जानकारी जुटाई तो पता चला कि इस बीज घोटाले के मास्टर माइंड को कृषि मंत्री का संरक्षण प्राप्त है। क्योंकि जिले से सत्तादल के कुछ नेताओं ने इस भ्रष्टाचारी अधिकारी के संबंध में कृषि मंत्री से लेकर डायरेक्टर तक को शिकायत प्रेषित की, लेकिन कार्यवाही नहीं हो पाई। 14 अगस्त को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मण्डला आगमन हो रहा है जहां क्षेत्र के नेताओं और किसानों को उम्मीद है कि अब मुख्यमंत्री ही इस भ्रष्टाचारी अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही करते हुए जिले से बाहर का रास्ता दिखायेंगे। जबकि 3 दिसम्बर 2022 को पूर्व मुुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक्सन ऑन दा स्पॉट पर डिण्डौरी जिले के छ: अफसरों को सस्पेंड किया था। उन्हीं छ: अधिकारियों में से एक अधिकारी अश्विनी झारिया को बीज वितरण में लापरवाही करने पर सस्पेंड किया था। सवाल ये उठता है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मौके पर मिली शिकायत के आधार पर तत्काल कार्यवाही की और डॉ. मोहन यादव की सरकार में उक्त अधिकारी के विरूद्ध लिखित शिकायत देने के बाद भी अभी तक कोई कार्यवाही न होने से सरकार भी कटघरे पर खड़ी है। आमजनता का सीधा आरोप है कि डॉ. मोहन यादव की सरकार में भ्रष्टाचारी अधिकारी कर्मचारियों को संरक्षण मिल रहा है।

जिले के सत्तादल नेताओं की छबि हो रही खराब
जब से किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग में उपसंचालक के पद पर पदस्थ बीज घोटाले के आरोप में घिरे अश्विनी झारिया तब से सत्तादल के नेताओं के पास सैंकड़ों शिकायतें पहुंची, लेकिन उसे हटाने में विधायक, सांसद, मंत्री और पार्टी के बड़े पदाधिकारी भी उन्हें नहीं हटा पाये। कुछ बीजेपी के नेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उक्त अधिकारी को सीधे विभागीय मंत्री का संरक्षण प्राप्त है। तब तो मण्डला जिले की कैबिनेट मंत्री संपतिया उइके भी उसे हटाने में नकामयाब हुई। उक्त अधिकारी की पदस्थापना से जिले के सत्तादल नेताओं की छबि भी खराब हो रही है। लोगों का सीधा आरोप है कि डॉ. मोहन यादव की सरकार बनने के बाद ऐसे ही भ्रष्टाचारी अधिकारी, कर्मचारियों को आदिवासी बाहुल्य जिले में पदस्थ कर किसानों का शोषण कराया जा रहा है। जिले में पहली बार यूरिया और डीएपी खाद को लेकर किसान परेशान हैं जिले में एक तरफ प्रेस नोट जारी किया जा रहा है कि पर्याप्त खाद है तो फिर किसान एक बोरी खाद के लिए भटक क्यों रहे हैं? उक्त अधिकारी बीज घोटाले के साथ अनेक योजनाओं में भी घोटाला किया है। शिकायतकर्ता ने मनगड़त नहीं प्रमाण के साथ शिकायत की है। शिकायतकर्ता की सत्तादल के नेताओं से यही मांग है कि अपने क्षेत्र के किसानों को योजना का उचित लाभ दिलाना है तो ऐसे भ्रष्टाचारी अधिकारी को तत्काल हटाने मुख्यमंत्री से मांग करें।
एफआईआर तक सिमटी ईओडब्ल्यू की कार्यवाही
किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग में पदस्थ उपसंचालक के विरूद्ध आर्थिक अपराध शाखा में एफआईआर दर्ज हुए महिनों गुजर गये, लेकिन कार्यवाही के नाम पर सिर्फ विवेचना चल रही है। शिकायतकर्ता भी इस इंतजार में है कि उक्त अधिकारी पर दण्डात्मक कार्यवाही हो। जबकि भोपाल में शिकायत की गई थी। कार्यवाही न होने से भ्रष्टाचारी अधिकारी के हौसले बुलंद हो रहे हैं। आदिवासी बाहुल्य जिले में एक ऐसे सहायक संचालक को प्रभारी उपसंचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग में पदस्थ किया गया है। जिनके खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ जबलपुर ईओडब्ल्यू द्वारा अपराध पंजीबद्ध है। जानकारी के अनुसार दिनांक 26 मई 2025 को 9 धाराओं में अपराध दर्ज किया गया है। बावजूद वर्तमान सरकार में कृषि मंत्री इनको अभय दान देते हुए मंडला जिले में प्रभारी उपसंचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग में बैठा दिया। जिनके ऊपर भ्रष्टाचार एवं बीज घोटाले के कई अपराध दर्ज है। जानकारी के अनुसार आवेदक रुपभान सिंह पाराशर की शिकायत पर अश्विनी झारिया, तत्कालीन उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विभाग, जिला डिण्डौरी, इदर लाल गौरिया, तत्कालीन शाखा प्रभारी (सेवा निवृत्त), किसान कल्याण एवं कृषि विभाग, जिला डिण्डौरी एवं हेमंत मरावी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, विकास खण्ड मेहंदवानी, जिला डिण्डौरी के खिलाफ ईओडब्ल्यू जबलपुर ने मामला दर्ज किया, लेकिन ईओडब्ल्यू की कार्यवाही भी एफआईआर तक सिमट कर रह गई है। उक्त अधिकारी पद में रहते जिले में भी लूटपाट मचा दी है।
अधिकारी कर्मचारी के विरूद्ध भोपाल में की गई शिकायत
आवदेक रुपभान सिंह पाराशर से अनावेदक किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग डिण्डौरी के संबंधित अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध शिकायत क्रमांक 186/24 का पंजीयन मुख्यालय भोपाल में दिनांक 22.08.2024 को किया गया। मुख्यालय के पत्र क्रमांक /अपराध/ जबल/शिका-186 (24)/2083-ए/2024 भोपाल दिनांक 09.02.2024 के माध्यम से जबलपुर इकाई को प्राप्त हुई। उपरोक्त शिकायत पुलिस अधीक्षक, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ इकाई, जबलपुर के आदेश क्रमाक/आ. अ.प्रको/जबल/शी.ले./4771-ए/24 दिनांक 30.09.2025 के माध्यम से जांचकर्ता स्वर्ण जीत सिंह धामी को प्राप्त हुई। आवेदक रुपभान सिंह पाराशर द्वारा इकाई जबलपुर में उपरोक्त दोनों की प्रति लगाकर शिकायत प्रस्तुत की गई थी जिसका आवक क्र-633/25 है। उपरोक्त शिकायत भी जांच में शामिल की गई। अत: मूल शिकायत क्र-233/25 में शिकायत क्र-186/24 तथा आर शिकायत क्र-633/25 संलग्न कर जांच की गई। उपरोक्त तीनों शिकायतें एक ही आवेदक द्वारा प्रस्तुत की गई है तथा तीनों शिकायतों में एक समान आरोप है। शिकायत में वर्ष 2021-22 में जिला डिण्डौरी के विकास खण्ड मेहंदवानी में (टीआरएफए) योजना अंतर्गत चना एवं मसूर वीज वितरण में किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग डिण्डौरी के संबधित अधिकारी/ कर्मचारी द्वारा भ्रष्टाचार किये जाने के आरोप लगाए गए है।
बीजों के वितरण में की लापरवाही
वही जांच के दौरान रूपभान सिंह पराशर पिता ब्रजभान सिंह पराशर, निवासी वार्ड क्रमांक 13, पुरानी, डिंडोरी जिला डिंडोरी के कथन लेख किये गये जिन्होनें अपने कथन में बताया कि डिंडोरी जिले के किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के जिसमें वर्ष 2021-2022 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत टरफा योजना के अंतर्गत किसानो को की गयी चना एवं मसूर बीज वितरण में की गयी धांधली के संबंध में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में शिकायत की गयी थी। जांच के दौरान यह ज्ञात हुआ कि सीआर अहिरवार अनुविभागीय कृषि अधिकारी जिला डिण्डौरी, प्रदीप मरावी, सहायक ग्रेड-3 कार्यालय अनुविभागीय कृषि अधिकारी जिला डिण्डौरी तथा प्रियंका ठाकुर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, जिला डिण्डौरी के द्वारा विकास खण्ड मेहंदवानी में टरफा योजना के अंतर्गत वर्ष 2021-22 में कृषकों को बांटे गये चना एवं मसूर के बीजों के संबंध में कृषकों से प्राप्त शिकायत के आधार पर जांच की गई है।
कागजों में बंट दिये गये चना, मसूर के बीज
उक्त आधार पर उपरोक्त तीनों को पूछताछ हेतु कार्यालय में तलब किया गया। टीम सदस्य प्रियंका ठाकुर मातृत्व अवकाश पर होने से उपस्थित नहीं हुई अन्य दोनो अधिकारी कार्यालय में उपस्थित होकर जांच रिपोर्ट के साथ अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। जिसमें पाया गया कि (1) जांच समिति के द्वारा मौके पर जाकर अलग अलग ग्रामों के कुल 57 कृषकों के लिखित बयान लिये गये तथा 12 पंचनामा तैयार किये गये गये जिसमें से 36 कृषकों को बीज प्राप्त नहीं हुआ है पाया गया है। (2) ग्राम देवरगंढ वि.ख. मेहंदवानी के 64 कृषकों को 75 किलो प्रति कृषक के मान से चना बीज वितरित किया जाना सूची में बताया गया है जबकि वास्तविकता यह है कि उक्त 64 कृषक उक्त ग्राम देवरगढ के नहीं है और न उन 64 कृषकों को बीज दिया गया। (3) शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत सूची के अनुसार वितरित बीज की मात्रा 822.75 क्विंटल बतायी गयी है। जबकि हेमंत मरावी, प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी विकास खण्ड मेहंदवानी द्वारा अपने बयान में लेख किया गया है कि एनएफएसएम टरफा योजना के अंतर्गत वर्ष 2021-22 में इन्हें कुल चना बीज 546.00 क्विटल प्राप्त हुआ था। जिसको मेरे द्वारा कृषकों को वितरित किया गया। शेष चना बीज 276.75 क्विंटल बीज मुझे प्राप्त नहीं हुआ है।
अधिकारी के दबाव में किया गया घोटाला
उन्होनें यह भी लेख किया है कि तत्कालीन शाखा प्रभारी आईएल गौलिया एवं तत्कालीन प्रभारी उप संचालक कृषि जिला डिण्डौरी अश्विनी झारिया द्वारा दबाव डालकर जबरजस्ती मात्रा 276.75 क्विंटल चना बीज एवं मसूर बीज मात्रा 118.5 क्विटल की वितरण सूची तैयार करवाई गयी है। इस कारण से कृषकों को बीज वितरण नही किया जा सका। उक्त बीज मात्रा 276.75 क्विंटल की कीमत वर्ष 2021-22 में प्रचलित दर मात्रा 7700.00 प्रति क्विटल के मान से कुल राशि 21,30,975/-रु (इक्कीस लाख तीस हजार नौ सौ पचहत्तर) होती है। हेमंत मरावी प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी द्वारा लेख किया गया है कि उन्हें मात्र 121.5 किंटल मसूर बीज प्राप्त हुआ था।
फर्जी कृषकों की सूची तैयार कर वितरण करा दिया बीज
संपूर्ण जांच में पाया कि वर्ष 2021-22 में जिला डिण्डौरी के 07 विकास खण्डों में (टीआरएफए) योजना अंतर्गत चना एवं मसूर बीज वितरण किया गया था। तत्समय उप संचालक कृषि डिण्डौरी अश्विनी झारिया थे।
बेख़ौफ़ डाला किसानों के हक में डाका
क्या है पूरा मामला आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र विकास खण्ड मेहंदवानी जिला डिण्डौरी में तत्कालीन वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी हेमंत मरावी द्वारा कुल 728 कृषकों को 546 क्विटल चना बीज वितरित किया गया था जबकि 728 कृषकों के अतिरिक्त 372 कृषकों की फर्जी सूची बनाकर 276.75 क्विंटल चना बीज का वितरण दर्शाया था तथा फर्जी सूची तैयार की थी साथ ही 305 कृषकों को 121.5 क्विटल मसूर बीज वितरित किया था जबकि 295 कृषकों की सूची फर्जी तैयार कर 118 क्लिंटल मसूर बीज का फर्जी वितरण दर्शाया था। स्टाक रजिस्टर के अध्ययन से यह स्पष्ट है कि 276.75 क्विटल चना बीज तथा 118 क्विंटल मसूर बीज विकास खण्ड मेहंदवानी वरिष्ठ कृषि अधिकारी के कार्यालय में आया ही नहीं तथा तात्कालीन उप संचालक कृषि अश्विनी झारिया व शाखा प्रभारी इंदर लाल गौरिया (सेवानिवृत्त) के कहने पर फर्जी कृषकों की सूची तैयार कर वितरण करा दिया गया।
ईओडब्ल्यू में तीन लोगों के विरूद्ध हुआ मामला दर्ज
आरोपी (1) तात्कालीन उप संचालक कृषि अश्विनी झारिया (2) तात्कालीन शाखा प्रभारी इंदर लाल गौरिया (सेवा निवृत्त) (3) हेमंत मरावी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, विकास खण्ड मेहंदवानी जिला डिण्डौरी द्वारा पद का दुरुपयोग कर शासन से प्राप्त होने वाले चना एवं मसूर के बीजों का गबन कर कूटरचित कृषकों की सूची तैयार कर विकास खण्ड मेहंदवानी में 276.75 क्विटल चना बीज राशि 7700/-रुपये प्रति क्चिंटल के मान से राशि 21,30,975/-रु तथा 118 क्विंटल मसूर बीज राशि 7700/-रुपयें प्रति क्विंटल के मान से राशि 9,08,600/-रु कुल राशि 30,39,575/-रु की हानि कारित करना प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाये जाने से आरोपी (1) अश्विनी झारिया, तत्कालीन उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विभाग, जिला डिण्डौरी (2) इंदर लाल गौरिया, तत्कालीन शाखा प्रभारी (सेवा निवृत्त), किसान कल्याण एवं कृषि विभाग, जिला डिण्डौरी (3) हेमंत मरावी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, विकास खण्ड मेहंदवानी, जिला डिण्डौरी के विरुद्ध धारा 120बी, 409, 420, 467, 468, 471, भादवि एवं धारा 7 सी, 13(1) बी सहपठित 13 (2) भ्रनिअ संशोधित 2018 के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध करने के लिये बिना नम्बरी प्रथम सूचना पत्र तैयार कर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ मुख्यालय भोपाल भेजी जाती है।
प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त आरोपी के विरूद्ध विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है। प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार उक्त मामले की जांच जारी है। स्वर्ण जीत सिंह धामी उपपुलिस अधीक्षक एवं (का) आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ जबलपुर हस्ताक्षर स्वर्णजीत सिंह धामी, उप पुलिस अधीक्षक/जांचकर्ता, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, इकाई जबलपुर म.प्र.। शून्य पर प्रथम सूचना रिर्पोट पर से थाना आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, भोपाल मध्यप्रदेश में उपरोक्त वार्णित आरोपियों के विरूद्ध अपराध क्रमांक 94/2025, दिनांक 26/05/2025, धारा 120बी, 409, 420, 467, 468, 471, भादवि एवं धारा 7सी, 13(1) बी सहपठित 13(2) भ्रनिअ संशोधित 2018, का प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। और किसानों को आज भी इतंजार की जो उनको मिलने वाले खाद बीज में जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों जो कि किसान कल्याण तथा कृषि विभाग में हुई अनिम्मिताओ पर उचित कार्यवाही कर दंडित करे जिससे किसानों के हक में डाका डालने से पहले सोचें।