न्याय अभी जिंदा है…..जिंदा को मृत बताने वाले पटवारी को सुनाई सजा

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पटवारी और एक अन्य को तीन-तीन साल की सजा के साथ ठोंका अर्थदंड

रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ालोग अपने आप को कितना ही शातिर समझे लेकिन भारतीय संविधान में विश्वास करने वालों के लिए यह फैसला विश्वास की किरण बन कर आया, देर है लेकिन अंधेर नहीं ऐसा ही एक मामला 2020 का हैं l
शहर के बीचों-बीच स्थित करोड़ों की जमीन के मालिक को मृत बताकर फर्जीवाड़ा करने वाले पटवारी और उसके साथी को न्यायालय ने सजा सुनाई है। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक नागराज ने पांच साल पुराने इस मामले में सोमवार के दिन दोनों आरोपियों को सजा सुनाते हुए तीन तीन साल की सजा के साथ अर्थदंड से दंडित किया है। जानकारी के अनुसार पांच साल पूर्व 12 मार्च 2020 को छिंदवाड़ा निवासी रामाजी चरपे ने मानव अधिकार आयोग में शिकायत की थी कि वो, कुसन्याओं और भूरीबाई को मृत
घोषित कर दिया गया है और उसके हक की जमीन को तेजराम नामक शख्स पटवारी के साथ मिलकर हड़पना चाहता है। इस मामले में शिकायत की जांच के बाद कोतवाली पुलिस ने बरारीपुरा माता मंदिर निवासी 75 वर्षीय तेजराम पिता किशनू मालवी और चंदनगांव के माता मंदिर कॉलोनी गली नंबर पांच निवासी 61 वर्षीय हल्का पटवारी रेशमलाल पिता रामचंद्र पवार के खिलाफ धारा 420, 198,
466, 471 और धारा 120 (बी) के तहत प्रकरण दर्ज कर मामले को सुनवाई के लिए पंचम अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक नागराज की न्यायालय में प्रस्तुत किया था। इस मामले में तमाम साक्ष्यों, गवाहों के बयान सुनने के बाद दोष सिद्ध पाए जाने पर न्यायालय ने आरोपी पटवारी रेशमलाल पवार और तेजराम को धारा 420, 198, 466, 471 और धारा 120 (बी) के तहत तीन-तीन साल की सजा और पांच-पांच सौ रुपए के अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। बता दें कि उक्त जमीन को लेकर बाद में भी काफी विवाद चला, शहर के बीचों-बीच स्थित करोड़ों की जमीन पर कई बार कब्जे को लेकर विवाद भी सामने आए थे।
न्यायालय के फैसले के बाद लोग कह रहे हैं न्याय अभी जिंदा हैl

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