बच्चे मन के सच्चे… जिले में अजब विकास गज़ब विकास बच्चों ने भगवान के पास लगाई अर्जी

विघ्नहर्ता बुद्धि के दाता गणेश जी से देश के ननिहालों ने लगाई अर्जी नए भवन बनाने की
दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला, बुजुर्ग कहते है बच्चे मन के सच्चे होते हैं क्योंकि उनके मन में न तो किसी के प्रति कोई द्वेष्यता होती हैं और न ही मन में कोई रंजिश या पाप इसीलिए तो मासूम बच्चों की मासूमियत पर हर कोई फ़िदा हो जाता हैं। एक तरफ भारत सरकार से लेकर प्रदेश की सरकार जहां “पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया” का सरकारी नारा चला कर बच्चों के साथ साथ बड़ों को जागरूक करने का प्रयास कर रही हैं। तो वही मंडला जिले का शिक्षा विभाग और जिले के सक्षम अधिकारी से लेकर नेता गण कुंभकर्णीय नींद में रहकर देश के ननिहालों के भविष्य के साथ में खिलवाड़ और उनके भविष्य को खराब करने में लगे हुए हैं। तभी तो देश के ननिहालों को विभाग और सक्षम अधिकारियों के साथ साथ नेताओं को जगाने के लिए मजबूरन बुद्धि के दाता भगवान गणेश के सामने अर्जी लगानी पड़ी। कि हे भगवान हमारी परेशानी कोई नहीं समझ पा रहा हैं और न ही हमारी कोई सुन रहा हैं इसीलिए हम सभी बच्चें आपसे प्रार्थना करते हैं कि हमारा स्कूल भवन दोबारा फिर से बन जाए जिसमें बैठ कर हम गरीब बच्चें शिक्षा का लाभ ले सकें।
उक्त जानकारीनुसार पता चला हैं कि मंडला जिला कार्यालय से महज दस किलोमीटर की दूरी पर बम्हनी बंजर संकुल के अंतर्गत देवगांव के पोषक ग्राम तलैया टोला में विगत दिनों एक अजीबों गरीब मामला सामने आया जिसमें हमारे जिले की शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी स्कूल में अध्ययनरत मासूम बच्चें अपनी अर्जी लेकर के भगवान गणेश के पास पहुंच गए। और अपने मांग पत्र में अपना दुख जाहिर करते हुए अर्जी लगाई कि पिछले एक वर्ष से अधिक समय से उनका स्कूल भवन पूरी तरह से खंडहर होकर टूट चुका हैं। मजबूरी में अध्ययनरत बच्चें कभी यहां तो कभी वहां पंडालों में और अन्यत्र अस्थाई रूप से पढ़ाई करने को विवश हैं। बच्चों ने विघ्नहर्ता से बिनती लगाते हुए कहा कि प्रभु हमारी कोई नहीं सुन रहा हैं न ही विभाग और न ही जिले के जिम्मेदार अधिकारी से लेकर नेता गण। जिनकी उदासीनता के चलते हमारा भविष्य ख़राब हो रहा हैं। दरअसल जिस शिक्षा के मंदिर रूपी भवन में देश का उज्जवल भविष्य तैयार होना था वह अब खंडहर में बदल चुका हैं। भवन अधिक क्षतिग्रस्त होने की वजह से तकनीकी अधिकारियों ने भविष्य के जोखिम को देखते हुए भवन को तोड़ने का आदेश दे दिया गया हैं। लेकिन परेशानी यह हैं कि जिस भवन में स्कूल के अध्ययनरत सभी 26 बच्चे बैठ कर पढ़ाई करते थे। अब वो मजबूरन यहां वहां भटकते हुए अस्थाई रूप से शिक्षा लेने को मजबूर हैं। क्योंकि नवीन भवन का निर्माण प्रस्ताव अभी लंबित हैं।
गांव के रंगमंच में शिक्षा लेने को मजबूर देश का भविष्य
अस्थाई रूप से शिक्षा लेने को मजबूर बच्चे गांव के ही एक रंग मंच में बैठ कर शिक्षा लेने को मजबूर हैं उक्त रंगमंच का निर्माण कार्य ग्राम पंचायत के द्वारा सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए किया गया था। जिस कारण से गणेश जी के आगमन की वजह से छोटे छोटे बच्चे गणेश पंडाल में गणेश जी के साथ बैठ कर के शिक्षा अर्जित करने को मजबूर हैं तो वहीं भगवान गणेश जी से अपनी अर्जी लगाते हुए बिनती करने को भी मजबूर हैं कि हे बुद्धि के दाता भगवान श्री गणेश जी आप हमारी मदद कीजिए। और शिक्षा विभाग के साथ साथ जिले के सक्षम अधिकारीयों और नेतागण को भी बुद्धि प्रदान कीजिए। जिससे कि हम दरबदर भटक कर शिक्षा लेने को मजबूर न रहें।
कक्षा पहली से पांचवी तक सभी बच्चे एक ही पंडाल में शिक्षा लेने को मजबूर
उक्त पंडाल में सभी 26 अध्ययनरत मासूम बच्चें एक ही जगह पर शिक्षा लेने को मजबूर हैं। अब सवाल यह उठता हैं कि आखिर खुली एक ही जगह पर अलग अलग कक्षाओं के अध्ययनरत बच्चें कैसे पढ़ाई कर पाते होंगे तो वही गांव वालों ने भी रोष व्यक्त करते हुए कहा हैं कि एक ही जगह पर सभी कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाना और पढ़ना बहुत ही मुश्किल वाला काम हैं। अव्यवस्थाओं की वजह से न तो शिक्षक बच्चों को ठीक से पढ़ा पा रहे हैं और न ही बच्चें ठीक से पढ़ पा रहे हैं।
सवालों के घेरे में शिक्षा विभाग और जिले के सक्षम अधिकारी
सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता हैं कि सक्षम विभाग की उदासीनता के चलते आज हमारे देश के भविष्य अध्ययनरत बच्चों के साथ साथ उनका हक छीना जा रहा हैं। एक तरफ देश प्रदेश की सरकार जहां अनिवार्य शिक्षा को लेकर बड़े बड़े दावे और बाते करते हुए नहीं थकती तो वहीं जिले का प्रशासन देश के भविष्य और नौनिहालों की जिंदगियों से खिलवाड़ करने में कोई गुरेज नहीं कर रहा हैं।
अनिवार्य शिक्षा पर लगता प्रश्न वाचक चिन्ह
वही प्रदेश की सरकार के सूबे की मंत्री के गांव से महज चंद किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव के जब ये हाल हैं तो आप सहज और आसानी से सोच और समझ सकते हे कि जिले का प्रशासन और सक्षम विभाग अपने कर्तव्यों के प्रति कितने जायदा जागरूक हैं..??
क्या बुद्धि के दाता भगवान गणेश फेरेंगे शिक्षा विभाग,सक्षम अधिकारी और नेता गण का दिमाग?
आने वाले दिनों में देखने वाली बात यह होगी कि बच्चों की अर्जी वाले वायरल चिट्ठी का असर शिक्षा विभाग के साथ जिले के आला अधिकारियों और सूबे की सरकार और सत्ता पक्ष के सासंद महोदय पर कितना असर होता हैं या समाचारों में प्रकाशित खबरों और बच्चों की अर्जी को यूं ही आसानी से ठुकरा दिया जायेगा।
वही मंडला जिला आदिवासी बाहुल्य जिला और बहुत ही पुराना जिला है वावजूद इसके नगरीय क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण अंचलों में बच्चे तो बच्चे बड़े बूढे भी परेशान है ये अपने लिए मुलभूत सुविधाएं के लिए आवेदन प्रतिवेदन कर कर के थक चुके है और इन गरीबों को ओर न विधायक सांसद ध्यान दे रहे है और न जी जिला प्रशासन अब जाए तो जाए कहां अब तो भगवान ही सहारे जीवन काट रहे हैं।