सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे है जर्जर वाहन , बिना परमिट और ओवर लोड वाहनों पर नही होती कार्यवाही

रेवांचल टाइम्स नारायणगंज मंडला जिले में बेखौफ होकर तेज रफ़्तार एवं फर्राटे से तीन पहिया और चार पहिया वाहन दौड़ रहे है इन तीन पहिये वाहनों में सवारी बैठाने के लिए परिवहन विभाग से मात्र तीन सवारी की परमिशन होती है जब कि वाहन चालकों के द्वारा पंद्रह से बीस सवारियों को गाड़ी के अंदर एवं गाड़ी के बाहर लटकाकर वाहन चलाया जाता है ताकि ज्यादा से ज्यादा किराया बसूल सके ये बात तो तीन पहिया वाहन पर लागू होती है अब हम बात कर रहे है चार पहिया वाहन जिसमे तूफान गमा महेंद्रा की मार्शल जीप और कमांडर गाड़ी है हम जिन वाहनों की बात कर रहे है जो वाहन बहुत पुराने हो चुके है और जर्जर हो चुके है ऐसे वाहनों में भी तीस से पैतीस लोगो को बोनट और छत पर बिठालकर यात्रा कराई जाती है और इन वाहनों की अवधि समाप्त हो जाने के बाद भी सड़को में ना ही परमिट नही रजिस्ट्रेशन न ही गाड़ी से सम्बंधित दस्तावेज होते है इसके बाद भी सड़को में बे ख़ौफ़ दौड़ रहे है यह नजारा ग्रामीण क्षेत्रों की सप्ताहिक बाजार के दिनों में देखने को आसानी से मिल जाते है क्षेत्र में बिना परमिट के ऑटो और चार पहिया वाहनों का संचालन खुलेआम जारी है।हद तो तब हो गई जब मोहगांव क्षेत्र में वाहन मालिक के द्वारा गाड़ी की छत में त्रिपाल लगाकर जर्जर वाहन से सवारी ढोने का काम किया जा रहा है परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन की लापरवाही के चलते यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। क्षेत्र के मुख्य मार्गों से लेकर गांवों के कच्चे रास्तों तक, निजी वाहनों में ओवरलोड सवारियां बैठाकर बेखौफ सवारी ढुलाई की जा रही है। इन वाहनों की हालत अक्सर जर्जर रहती है, चालक बिना लाइसेंस या शराब के नशे में भी गाड़ी चलाते देखे जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी हुई है।

चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ स्कूली वाहनों में बच्चों को सुरक्षित तरीके से ले जाने के बजाय उनकी जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। कई ऑटो और जीप चालकों द्वारा सीटें भर जाने पर बच्चों को छत पर बैठाकर घर भेजा जाता है। तेज गति, खराब सड़क और मौसम की अनिश्चितता के बीच यह तरीका कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस संबंध में कई बार शिकायत की गई, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने न तो जांच की और न ही कार्रवाई। ऐसा प्रतीत होता है कि अवैध रूप से चल रहे इन वाहनों को किसी न किसी का संरक्षण प्राप्त है। गांव के लोगों और अभिभावकों में भय और आक्रोश दोनों है।

जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि तत्काल ऐसे वाहनों पर नकेल कसी जाए। बिना परमिट के वाहन संचालन और ओवरलोडिंग पर सख्त जुर्माना और कार्रवाई की आवश्यकता है। प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि स्कूली बच्चों को सुरक्षित और नियमानुसार परिवहन सुविधा उपलब्ध हो, ताकि भविष्य में किसी अनहोनी से बचा जा सके।

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