पूर्व पटवारी और वर्तमान राजस्व निरीक्षक की एक गलती से स्वामित्व भूमि पर अब भी कई खामियां

जांच के नाम पर खानापूर्ति-राजस्व निरीक्षक ने स्वामित्व जांच को किया प्रभावित
सहीं भौगोलिक सत्यापन नहीं होने से अधर पर लटकी योजना
राजस्व नक्शे की भूमि पर स्वामित्व योजना के बना दिए गए प्लाट
वर्तमान की योजना भविष्य में बनेगी संपत्ति विवाद
रेवाँचल टाईम्स – भोपाल/सिवनी/लखनादौन – प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना भारतदेश की महत्वपूर्ण योजना के रुप में पूरे देश में संचालित है। साथ ही स्वामित्व योजना का कार्य मध्यप्रदेश में भी पूर्ण रूप लेने जा रहा है।
वहीं प्रदेश के सिवनी जिले में राजस्व के कुछ लापरवाह अधिकारी व कर्मचारीयों की वजह से सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को नुक्सान पहुंचाया जा रहा है। जो कि वर्तमान की योजना में की जा रही लीपापोती से भविष्य में संपत्ति विवाद बनने जा रही है।
तहसील लखनादौन के धूमा में जहां स्वामित्व योजना में हुई लापरवाही को लेकर पूर्व में हुई शिकायतो पर हुये जांच के आदेशों में वर्तमान राजस्व निरीक्षक हीरालाल धुर्वे द्वारा स्वयं को बचाने स्वामित्व योजना की जांच को प्रभावित किया गया और निजी भूमिस्वामी मद की भूमि पर ही स्वामित्व योजना के बने प्लाटो पर सुधार करवाये बिना ही लीपापोती करने आरओआर पूर्ण किया जा रहा हैं। जो भविष्य में ग्राम धूमा वासियों के लिए संपत्ति विवाद का एक बहुत बड़ा कारण बनेगा।
सरकार की मंशा ग्रामीण भारत को संपत्ति के स्वामित्व के माध्यम से सशक्त बनाने स्वामित्व योजना का निर्माण भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार के द्वारा किया गया है। परंतु लापरवाह अधिकारी और कर्मचारियों की वजह से अब यह योजना धूमा के ग्रामवासियों के लिए नये विवाद को जन्म देगा।
पटवारी और आरआई की वजह से बनी विवादित योजना
सरकार की महत्वाकांक्षी स्वामित्व योजना को लापरवाही की भेंट चढ़ाया गया है लखनादौन तहसील के धूमा मे पदस्थ राजस्व निरीक्षक हीरालाल धुर्वे और इन्हीं के चहेते तात्कालीन पटवारी राहुल राजपूत ने योजना को विफल करने कोई कसर नहीं छोड़ा। इन्हीं की वजह से योजना आज तक पूरी नहीं हो सकी है।
वहीं पटवारी और राजस्व निरीक्षक ने अधिकारियों को भी गलत जानकारी देकर विश्वास में लेकर स्वामित्व योजना के ग्राउंड ट्रूथिंग (जीटी) मैप नक्शे का गलत कार्य किया।गलत जीटी पर गलत नक्शा और आरोआर के नंबरों में पिछले एक वर्ष से काम किया जा रहा है। शिकायत हुई शिकायत पर जांच भी राजस्व निरीक्षक की मेहरबानी से ठंडे बस्ते में डाल दी गई। और स्वामित्व योजना के कार्य में लीपापोती की जा रही है। जहां स्वामित्व फाइल को आगे बढ़ाने और मामले को दबाने के लिए दिनांक -20 जनवरी 2025 को जारी पत्र के अनुसार सात पटवारीयो से कार्य कराया गया। और फिर 28 अप्रैल 2025 को पुन: सौलह पटवारीयो की ड्यूटी लगाकर पटवारी द्वारा किए गए स्वामित्व कार्य की जांच भी कर ली गई। और सौलह पटवारीयो की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ की आरोआर के कई प्लाटों पर जानकारी गलत दर्ज की गई। कई प्लॉट खाली रिक्त कर शासकीय दर्ज कर दिए गए जबकि उन पर लोग निवासरत थे। कई लोगों का आरोप यह भी है,कि पटवारी को मन मुताबिक लाभ नहीं मिलने पर निवासरत लोगों के स्वामित्व प्लाटों पर शासकीय भूमि दर्ज कर दिया गया । तो कई लोगो का कहना है कि 40-45 वर्षों से जिस जगह घर में लोग रह रहे हैं वहां बाहुबलियों के कहने पर पटवारी ने उनका नाम दर्ज नहीं किया है। स्वामित्व योजना को पूरा करने की जल्दबाजी में गलत ग्राउंड टूथिंग में ही लीपापोती करने और कराने पुनः 10 पटवारीयो की ड्यूटी लगाकर आरओआर पूर्ण करने का आदेश सितम्बर 2025 में जारी किया गया है।
कुछ निजी भूमि को लेकर न्यायालय में चल रहे अन्य प्रकरण पर राजस्व निरीक्षक और पटवारीयो की टीम ने जांच में भूमि को निजी भूमि बताया । तो उसी निजी भूमि पर स्वामित्व योजना के बने प्लांटो पर अब स्वामित्व योजना की भूमि दर्शाई जा रही है। जो भविष्य में विवाद का एक बहुत बड़ा कारण बनेगा।
लापरवाहों पर कार्रवाई करने वजाए प्रशासन योजना को पूर्ण करने लीपापोती कराने में जुटी है।
योजना जिस उद्देश्य से तैयार की गई थी।कि संपत्ति विवाद कम हो परंतु ऐसी स्थिति में विवादों की अधिकता जरूर देखी जाएगी। पूरे मामले पर जिला प्रशासन को गंभीरता दिखाना चाहिए परंतु प्रशासन गंभीरता नहीं दिख रहा है।