तहसील मुख्यालय घुघरी में अवैध रेत भंडारण का कारोबार चरम पर, खनिज और पुलिस विभाग की चुप्पी से रेत चोरों के हौसले बुलंद

रेवांचल टाइम्स घुघरी मंड़ला मुख्यालय घुघरी में रेत चोरी का खेल कई वर्षों से बेरोकटोक जारी है। वर्तमान में जहां सभी वैध खदानें बंद हैं, वहीं दूसरी और अवैध रूप से रेत का भंडारण बड़े पैमाने में बारिश के पहले कर लिया गया है । यह पूरा काम बिना किसी रॉयल्टी के और विभागीय मिलीभगत से संचालित किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में कानून व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जगह-जगह अवैध भंडारण, ट्रैक्टरों से रात में और दिन में किया जाता है परिवहन
ग्रामीण क्षेत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार जनपद घुघरी के अंतर्गत आने वाले कई गांवों और कस्बों में जगह-जगह अवैध रेत का भंडारण किया गया है। ये भंडारण खाली पड़ी ज़मीनों, खेतों, और कुछ मामलों में सरकारी भूमि पर भी किया गया है। बिना नंबर प्लेट के बिना कमर्सियल परमिट के ट्रैक्टर और ट्रॉलियाँ रात के अंधेरे में रेत ढोने के काम में लगी हुई हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ये वाहन ना तो परिवहन विभाग में पंजीकृत हैं और ना ही इनसे किसी प्रकार का कर या रॉयल्टी अदा की जाती है। ऐसे में स्पष्ट है कि यह कार्य पूरी तरह से अवैध है, लेकिन संबंधित विभाग आंखें मूंदे हुए हैं।
बंद खदानें और बढ़ती मांग ने बढ़ाया अवैध कारोबार
गौरतलब है कि वर्तमान में वैध रेत खदानें बंद हैं। इससे निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली रेत की मांग बनी हुई है। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए रेत माफिया सक्रिय हो गए हैं, और बड़ी मात्रा में रेत का अवैध भंडारण किया गया हैं। यह रेत महंगे दामों में बेची जा रही है, जिससे माफिया को लाखों रुपये का फायदा हो रहा है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार प्रति ट्रॉली रेत की कीमत 4000 से 5000 रुपये तक वसूली जा रही है। वहीं, इसका सरकारी मूल्य कहीं कम है। बिना किसी रॉयल्टी या टैक्स के सीधे जेब में जाने वाली यह कमाई माफियाओं को मालामाल कर रही है।

विभागीय मिलीभगत की बू
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि रेत चोरी के इस अवैध खेल में खनिज विभाग, पुलिस प्रशासन और राजस्व विभाग की स्पष्ट मिलीभगत है। इन अधिकारियों की मौन स्वीकृति के बिना इस प्रकार का अवैध कार्य संभव नहीं है।
जनपद घुघरी के कुछ ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई बार पहले अधिकारियों को शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कई बार तो शिकायतकर्ता को ही डराने-धमकाने की कोशिश की गई, जिससे साफ जाहिर होता है कि माफिया और विभाग के बीच गहरे संबंध हैं।
न कोई जांच, न कार्रवाई
वर्तमान स्थिति यह है कि न तो खनिज विभाग द्वारा कोई सघन जांच की जा रही है और न ही पुलिस प्रशासन की ओर से कोई धरपकड़ की कार्रवाई हुई है। यह स्थिति रेत माफियाओं के लिए अनुकूल बन गई है। अब वे दिन-दहाड़े भी रेत का परिवहन करने लगे हैं।
कई गांवों में स्थानीय लोग अवैध ट्रैक्टरों के चलने से हो रहे सड़क क्षरण और धूल-धक्कड़ से परेशान हैं, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। वही एक स्थानीय शिक्षक ने बताया कि स्कूलों के पास से भी यह अवैध ट्रैफिक गुजरता है, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।
पर्यावरण को भारी नुकसान
अवैध रेत खनन का सबसे बड़ा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है। नदियों से अंधाधुंध रेत निकाले जाने से जल प्रवाह, जलस्तर और नदी की पारिस्थितिकी पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ता है और आस-पास के इलाकों में जल संकट गहराता है। अगर यह कार्य यूं ही चलता रहा तो आने वाले वर्षों में क्षेत्र में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा सकता है, जिससे खेती और जनजीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
प्रशासन की चुप्पी बनी सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यह अवैध कारोबार इतने खुलेआम चल रहा है, तो प्रशासनिक अधिकारी क्यों चुप हैं? क्या उन्हें इसकी जानकारी नहीं है, या जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं?
स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी इस मामले में चुप्पी चिंताजनक है। न तो किसी प्रकार की जनजागरूकता या विरोध दर्ज कराया। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि कहीं न कहीं राजनीतिक संरक्षण भी इस अवैध कार्य को मिल रहा है।
मध्यप्रदेश खनिज नियमावली के तहत बिना अनुमति रेत का खनन, परिवहन या भंडारण अपराध की श्रेणी में आता है। इसके लिए भारी जुर्माने और सजा का प्रावधान है। लेकिन वर्तमान स्थिति देखकर लगता है कि कानून का भय न तो माफिया में है और न ही उनके संरक्षकों में।
रेत चोरी की यह समस्या केवल प्रशासनिक लापरवाही का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की कानून व्यवस्था, पर्यावरण संतुलन और आर्थिक पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ मामला है। यदि समय रहते इस पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले समय में जनपद घुघरी अवैध खनन का केंद्र बन सकता है, जिससे न केवल शासन की छवि धूमिल होगी, बल्कि आम जनता को भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
अब देखना यह है कि क्या खनिज विभाग, पुलिस प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या पर जागते हैं, या फिर यह “सिस्टम की चुप्पी” माफियाओं के लिए वरदान साबित होंगी।

इनका कहना है
आप कार्यालय आकर जानकारी ले लीजिए आपको मिल जायेगी
मैं अभी कुछ नहीं बता सकता अभी मैं कार्यालय में नहीं हूं

हितेश बिसेन
प्रभारी खनिज अधिकारी मंडला

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