दसमहाविद्या” में सातवीं देवी माँ धूमावती

रेवाँचल टाईम्स – भोपाल/सिवनी – धूमावती माता का इतिहास पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है, जिनमें उनके जन्म की दो कथाएँ प्रचलित हैं पहली कथा के अनुसार, जब दक्ष यज्ञ में सती ने अपने शरीर का त्याग किया, तो उनके शरीर से निकले धुएं से धूमावती का जन्म हुआ। दूसरी कथा के अनुसार, एक बार पार्वती जी को बहुत भूख लगी और उन्होंने भगवान शिव को ही निगल लिया, जिसके बाद शिव ने उन्हें विधवा रूप में रहने का श्राप दिया और इस प्रकार धूमावती का जन्म हुआ। धूमावती माता को दस महाविद्याओं में से एक माना जाता है और उनका रूप अत्यंत भयंकर है, लेकिन वे भक्तों की दरिद्रता और कष्टों को हमेशा दूर करती हैं।
धूमा देवी नाम का मंदिर मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के ग्राम धूमा में स्थित एक प्राचीन और प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जो अपनी अनूठी परंपराओं के लिए जाना जाता है. यह मंदिर “दसमहाविद्या” में सातवीं देवी माँ धूमावती को समर्पित है, जो शिव की शक्तियाँ हैं. यह भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए प्रसिद्ध है और यहाँ चैत्र व शारदेय नवरात्रों के दौरान श्रद्धालु “जवारे” बोते हैं। और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने पर यहां दूर-दूर से श्रद्धालु हाजिरी लगाने चले जाते हैं।
मंदिर का इतिहास और स्थान स्थान:
यह मंदिर मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के लखनादौन तहसील में स्थित धूमा गाँव के हृदय स्थल, बाजार चौक में स्थित है.।इस मंदिर की प्राचीनता सदियों पुरानी मानी जाती है और ऐसा कहा जाता है कि यह लगभग 500 साल से भी ज्यादा पुराना है, क्योंकि इसका रिकॉर्ड किसी भी राजस्व दस्तावेज़ में दर्ज नहीं है।
माँ धूमावती का स्वरूप दसमहाविद्या में स्थान:
माँ धूमा देवी दसमहाविद्या में सातवीं विद्या हैं। यहां विराजमान प्रतिमा सैकड़ो साल पुरानी है। जहां आस्था लगाये श्रद्धालु काली मंदिर तो कुछ मां धूमा देवी के नाम से अपनी आस्था लगाए यहां पहुंचते हैं।
धूमा गाँव के बुजुर्गों का मानना है कि माँ धूमा देवी के पास जो भी अपनी अर्जी लेकर पहुंचता है, उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है.
चैत्र और शारदेय नवरात्रों के दौरान, भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर मंदिर में व्यक्तिगत जवारे व ज्योति कलश स्थापित करते हैं.
धार्मिक उत्सव
शारदेय नवरात्रों के दौरान यहाँ दशहरे का भव्य आयोजन होता है और मंदिर का वातावरण धर्ममय हो जाता है। यहां शरद पूर्णिमा के दिन शीतलामाई समिति के द्वारा मां महाकाली जी का भव्य दशहरा चल समारोह निकाला जाता है। जो पूरे महाकौशल के साथ साथ पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान बनाये हुए हैं।जहां देश के हर क्षेत्र से कलाकारो को कला का जौहर दिखाने यहां बुलाया जाता हैं।
मंदिर की विशेषताओं में भव्य परिसर
यहां मां धूमा देवी के साथ मंदिर पाँच मठों के दरबार से सजा है, जिसमें भगवान गणेश, राधा-कृष्ण, राम-सीता और भोलेनाथ की प्रतिमाएँ विराजमान हैं। ग्राम धूमा में ही प्रतिष्ठित और पूर्वकालिक विशाल हनुमान जी का प्राचीन मंदिर स्थित है । जो धूमा नगर के दक्षिण में पूर्व काल से ही एक विशालकाय हनुमान जी का स्वरूप है, जो इस क्षेत्र में कहीं और देखने को नहीं मिलता है। जिन्हें श्रद्धालु मूछ वाले हनुमान दादाजी महाराज के नाम से जानते हैं।
माँ धूमावती माता का मुख्य और प्रसिद्ध मंदिर मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित पीताम्बरा पीठ के प्रांगण में है। भारत में धूमावती का यह एकमात्र ऐसा मंदिर है‌।जहां भक्तों के लिए मंदिर शनिवार को ही सुबह और शाम के समय दो घंटे के लिए खुलता है।
देश में और भी अन्य स्थानों पर माँ धूमावती के मंदिर मौजूद है। जिनमें जबलपुर (मध्यप्रदेश) जबलपुर की बूढीखेर मांई मंदिर भी मां धूमावती देवी का शक्तिपीठ मंदिर माना जाता है। वहीं
वाराणसी (उत्तर प्रदेश) के जैतपुरा में नाटी इमली रोड पर भी धूमावती माता को समर्पित एक मंदिर है, जिसे काशी धूमावती मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। वहीं गुवाहाटी (असम) राज्य के गुवाहाटी में प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर के पास भी माँ धूमावती का मंदिर स्थित है। साथ ही बिहार के राजरप्पा और गुवाहाटी के पास भी धूमावती के छोटे मंदिर मौजूद हैं।

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