घटिया निर्माण की खुल रही पोल, हादसों का शिकार हो रहे राहगीर

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रेवांचल टाइम्स मंडला जिले में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी कि इन दिनों विकास कार्यों की आड़ में भारी भ्रष्टाचार देखने को मिल रहा है। केंद्र और राज्य सरकारें जिले के सर्वांगीण विकास के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएँ भेज रही हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यहाँ बैठे कुछ भ्रष्ट अधिकारी और ठेकेदार इन योजनाओं को अपनी कमाई का जरिया बना चुके हैं। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का कोई ध्यान नहीं रखा जा रहा, और इसका सबसे बड़ा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
विकास के नाम पर भ्रष्टाचार
मंडला जिले को यदि ‘चारागाह’ कहा जाए, तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। जिस उद्देश्य से विकास की योजनाएँ लागू की जा रही हैं, वे योजनाएँ भ्रष्टाचार और लूट की भेंट चढ़ रही हैं। अधिकारी और ठेकेदार केवल अपने कमीशन और मुनाफे के चक्कर में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को ताक पर रख रहे हैं। चाहे वह सड़क निर्माण हो या नाली निर्माण,वा अन्य हर जगह घटिया सामग्री का इस्तेमाल हो रहा है।जनता की सुविधा के लिए बनाए जा रहे ये निर्माण कार्य अब खतरे का सबब बनते जा रहे हैं। निर्माण के कुछ ही महीनों बाद और नालियों का टूट जाना यह दर्शाता है कि कार्यों में कितनी लापरवाही बरती जा रही है। एक ओर सरकारें स्मार्ट सिटी, स्वच्छ भारत और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों को सफल बनाने के लिए प्रयासरत हैं, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत सरकार की नीतियों को मुंह चिढ़ा रही है।
घुघरी में घटिया नाली निर्माण का मामला
जिले के तहसील मुख्यालय घुघरी में एक बड़ा उदाहरण सामने आया है, जहाँ जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के प्रयास से सड़क निर्माण कार्य तो करवाया गया, लेकिन उसके साथ-साथ चल रहे नाली निर्माण कार्य की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। नाली निर्माण के कुछ ही दिनों बाद जगह-जगह से टूटने लगी हैं। घुघरी बस स्टैंड से लेकर जनपद कार्यालय तक बनाई जा रही नालियों में जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं।
सबसे खतरनाक बात यह है कि निर्माण में उपयोग की गई सरिया (लोहे की छड़ें) बाहर से दिखाई दे रही हैं, जो राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। इससे स्पष्ट होता है कि निर्माण कार्य में मानकों का पालन नहीं किया गया। इस रास्ते से प्रतिदिन स्कूली बच्चे, महिलाएँ, बुजुर्ग, गुजरते हैं। ऐसे में किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
जांच के नाम पर खानापूर्ति
सबसे दुखद पहलू यह है कि ऐसी घटनाओं के बावजूद प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्यवाही नहीं की जा रही है। कई बार शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन परिणाम वही ढाक के तीन पात। केवल जांच के नाम पर औपचारिकता निभाई जाती है, और फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। यही कारण है कि भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों के हौसले बुलंद हैं। उन्हें इस बात का पूरा भरोसा है कि उनके खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाएगा।
हालांकि आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) और लोकायुक्त जबलपुर द्वारा कुछ मामलों में छापेमारी और जांच की कार्रवाई की गई है, लेकिन इन कार्रवाइयों का भी कोई प्रभाव दिखाई नहीं देता। सवाल उठता है कि जब बार-बार शिकायतों के बावजूद भी सुधार नहीं हो रहा, तो आम नागरिक अपनी शिकायतें लेकर कहाँ जाए?
घुघरी क्षेत्र में बन रही नालियों की स्थिति यह दर्शाती है कि निर्माण कार्य में न तो सही सामग्री का उपयोग किया जा रहा है और न ही मानकों का पालन। किसी भी निर्माण कार्य के लिए ज़रूरी होता है कि वह कम से कम 10 से 15 वर्षों तक टिकाऊ हो, लेकिन यहाँ हालत यह है कि 2-3 महीने में ही ढह रही हैं और गड्ढे बन रहे हैं।
जनता की जान जोखिम में
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस घटिया निर्माण कार्य की वजह से आम जनता की जान जोखिम में पड़ गई है। बच्चे स्कूल जाते समय गड्ढों में गिर सकते हैं, बुजुर्ग फिसल सकते हैं, और किसी समय कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है। इस लापरवाही का ज़िम्मेदार कौन होगा?क्या प्रशासन, जो इन निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए नियुक्त है? या ठेकेदार, जिनका काम केवल पैसे कमाना रह गया है? या फिर वे अधिकारी, जो कमीशन लेकर आँखें मूँद लेते हैं?

इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाए। जनता के पैसे से जनता की भलाई के लिए बनाए जा रहे कार्य वाकई में गुणवत्तापूर्ण हों, न कि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ें।

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