महाकौशल प्रान्त में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अरुणोदय

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रेवांचल टाईम्स – महाकौशल प्रान्त भारत का हृदयांचल है। भौगोलिक और भूवैज्ञानिक दृष्टि से महाकौशल प्रान्त सर्वाधिक प्राचीनतम गोंडवाना लैंड भूसंहति का भूभाग है, महाकौशल की भूवैज्ञानिक बनावट आद्य महाकल्प शैल संघ के चारों ओर बनी है। ऐतिहासिक और पौराणिक दृष्टि से महाकौशल क्षेत्र का बड़ा माहात्म्य है। त्रेता युग में यह क्षेत्र दक्षिण कौशल के नाम से अभिहित किया गया है, संघ दृष्टि से मूलतः यही प्रदेश अब महाकौशल प्रांत है। महाकौशल क्षेत्र का क्षेत्र, विस्तार और सीमा पृथक-पृथक कालखंड में घटती, बढ़ती रही हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक समाज परिवर्तन का आंदोलन है, जिसके मूल में हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा निहित है। सर्व समावेशी दर्शन के आलोक में हिंदुत्व ही राष्ट्रत्व है। सभी को एक मानना ही हिंदुत्व है। वसुधैव कुटुम्बकम् अंतरात्मा में निहित है। “सर्वे भवन्तु सुखिन:” मूल तत्व है और सेवा ही धर्म है। राष्ट्र और समाज के लिए सर्वस्व अर्पित करने का मूल भाव केन्द्रीभूत है।
सन् 1925 में महान् स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्रीयुत डॉ. केशव राव बलिराम हेडगेवार ने विजयादशमी के दिन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी, तभी से संघ ने न केवल स्वतंत्रता संग्राम वरन् हर संकट काल में अपना सर्वस्व अर्पित कर देश और समाज की रक्षा की है। यह क्रम अनवरत् प्रवहमान है।
परम पूज्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आद्य संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार और स्वयंसेवकों ने स्वाधीनता संग्राम के हर पड़ाव में अपने-अपने कालखंड में महती भूमिका निभाई। परंतु बरतानिया सरकार के हिन्दू धर्म और समाज को जाति – पांति के नाम पर बांटने के षडयंत्र, ईसाई मिशनरीज के प्रकोप और बरतानिया सरकार के साथ कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के चलते हिन्दुओं और हिंदुत्व के साथ राष्ट्र के अस्तित्व को बचाने के लिए संघ कार्य में सर्वस्व अर्पित किया।
अभिभाषित महान् उद्देश्य को लेकर महाकौशल प्रांत में परम पूज्य डॉ.हेडगेवार जी के निर्देशन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अरुणोदय हुआ,जिसका श्रम साध्य और गौरवशाली इतिहास संघ शताब्दी वर्ष में प्रस्तुत करना अपरिहार्य हो जाता है,ताकि वर्तमान और भावी पीढ़ी को महाकौशल प्रांत में संघ के बीजारोपण की वस्तुनिष्ठ जानकारी प्राप्त हो सके।
बालाघाट जिले में सर्वप्रथम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा का शुभारम्भ सन् 1926 में हुआ।उस समय डाक एवं तार विभाग में कार्यरत श्री महावादी जी के प्रयासों से संघ कार्य का श्रीगणेश बालाघाट नगर में हुआ सबसे पहली संघ की शाखा श्री गणपत राव जी पांडे के बाड़े (वर्तमान में बाबूराव केलकर का बाड़ा) में लगी उस समय लगभग 12 से 14 वर्ष के 10 से 12 किशोर शाखा में आते थे। जिसमें से श्री दत्तात्रेय केशव जी दबडघाव, श्री अण्णा गाढ़वे, श्री वासुदेव मंडलेकर, महादेव राव जी वाईकर, अण्णा जी देव पुजारी, भैय्या साहेब इंदुरकर प्रमुख थे। संघ की शाखा शुरु करने के लिए स्वयं परम पूज्य डॉ. हेडगेवार साहब स्वयं बालाघाट आए थे,राम पायली में भी रुके थे,जो कि बालाघाट जिले का ही एक गांव है। गौरतलब है कि परम पूज्य डॉ.हेडगेवार साहब ने राम पायली में पुलिस स्टेशन को बम से उड़ाने के लिए बम फोड़ने की कोशिश की थी। द्वितीय सर संघचालक परम पूज्य गुरुजी के पिता बालाघाट नगर के विद्यालय में ही अध्यापक थे। बालाघाट में नियमित संघ शाखाओं के शुभारम्भ में श्री दादाराव परमार्थ और श्री दत्तोपंत दबडघाव का अविस्मरणीय योगदान रहा।
छिंदवाड़ा में संघ कार्य के लिए श्री मोरुभाऊ केतकर का नाम अविस्मरणीय रहेगा, इनके पास छिंदवाड़ा में ब्रूक बांड चाय कंपनी की एजेंसी थी। श्री डालचंद चौरसिया जी के अनुसार सन् 1937 में नियमित शाखा प्रारम्भ हो गयी थी, मोरु भाऊ छिंदवाड़ा रेलवे स्टेशन के पास रहते थे और जुन्नारदेव शाखा में आया करते थे। श्री मोहन सिंह जी संघ के अत्यंत सक्रिय स्वयंसेवक बने। श्री मोरु भाऊ के आग्रह से सन् 1938 में परम पूज्य डॉ. हेडगेवार जी छिंदवाड़ा, बड़वन की शाखा पधारे थे।
परम पूज्य डॉ. हेडगेवार साहब के सन् 1932 के सिवनी प्रवास में नगर के कांग्रेस के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता के यहां चर्चा हेतु आए थे, परन्तु सन् 1938 और सन् 1939 तक संघ कार्य को कोई गति नहीं मिल पाई। श्री श्रीधर नागरी द्वारा डू डू क्लब के नाम से विद्यार्थियों को इकट्ठा किया जाता था तथा कुछ ही समय बाद शाखा का रूप दे दिया गया था। सन् 1941- 42 के करीब -करीब एक अन्य शाखा शहर के मध्य भाग में शुरु हुई।
मंडला में सत्र 1927-28 में पूज्यनीय डॉ. हेडगेवार जी और श्री गोपाल राव जी गोलवलकर एवं श्री राव सा. केकरे के सानिध्य में वाजपेयी परिवार एवं मौनी बाबा के साथ व्यापक विचार-विमर्श हुआ था। श्री हेडगेवार जी के आगमन का मुख्य उद्देश्य था, वीरांगना रानी दुर्गावती के क्षेत्र में वनवासियों के बीच संघ के उद्देश्यों की जानकारी हो। इस प्रकार मंडला में संघ के स्थापना की पृष्ठभूमि बनी। विद्वान,योगाभ्यासी श्री एकनाथ जी रानाडे ने मंडला में सन् 1939 में शाखा संचालन प्रारंभ किया।मंडला नगर श्री बट्टू लाल ठाकुर एवं हिरदेनगर के एडवोकेट श्री गोविंद प्रसाद मिश्रा प्रमुख सहयोगी थे। शाखा संचालन स्थल संस्कृत शाला (वर्तमान में ज. मु. चौ. महिला महा.) था। निरंतर क्रम में सर्वश्री रामतापेकर जी,अप्पाजी शेंडे, नर्मदा प्रसाद सोनी,बसंत सराफ, रामशंकर अग्निहोत्री, गुर्जर जी प्रेमचंद जैन (डिंडोरी) ने शाखा संचालन का जिले का प्रभार संभाला।
डिंडोरी बस्ती में सन 1942 में संघ की शाखा का शुभारंभ हुआ। डिंडोरी में संघ का शुभारंभ श्री रतन चंद जैन एवं श्री प्रेमचंद जैन ने किया। आप दोनों जबलपुर में अपने अध्ययन काल में शाखा जाया करते थे।
नरसिंहपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा का शुभारम्भ सन् 1936 की विजयादशमी को परम पूज्य डॉ. हेडगेवार जी द्वारा किया गया। प्रारंभिक काल के कार्यकर्ताओं में सर्वश्री कन्हैयालाल झरिया, प्रेमचरण झरिया, निर्मल कुमार शर्मा अयोध्या प्रसाद गुप्ता, शंकर लाल अग्रवाल, पूरन चंद्र कोठारी तुलाराम आर्य और श्री राम नेमा प्रमुख थे।
जबलपुर में सन् 1934 में संघ कार्यालय सिमरिया वाली कोठी में प्रारम्भ हुआ था और संघ शाखा का शुभारंभ श्री चंद्रकांत ठोसर के अनुसार 6 जुलाई 1935 को हुआ था। श्री केतकर जी के द्वारा पुराना बरफ घर वर्तमान में नर्मदेश्वर मंदिर राइट टाउन में प्रथम शाखा प्रारंभ हुई। श्री मोरु भाऊ केतकर कल्याण आश्रम का कार्यक्रम देख रहे थे, उनके भाई तथा ब्रुक बांड कंपनी में कार्यरत श्री केतकर जी ने संघ कार्य की शुरुआत की थी। प्रथम दिवस 9 से 10 संख्या थी। प्रारंभ में जो स्वयंसेवक आए उनमें से कुछ नाम की जानकारी प्राप्त होती है जो क्रमशः श्री रामचंद्र ठोसर, भार्गव बंधु (जिनकी फैक्ट्री थी) और, परोलकर जी। श्री ठोसर जी के अनुसार दो-तीन माह बाद शाखा श्रीनाथ की तलैया में लगना प्रारंभ हुई। यह बाबा साहब आपके तथा दादा राव परमार्थ जी की प्रेरणा से कार्य आरंभ हुआ। सन् 1936 में प्रहलाद जी आम्बेकर पढ़ने के लिए जबलपुर आए तथा बाद में प्रचारक बने। वे सिटी कॉलेज में पढ़ते थे। सन् 1939 में एकनाथ जी रानाडे प्रथम प्रांत प्रचारक बनकर आए। प्रथम नगर संघ चालक पंडित कुंजीलाल दुबे बने थे।दूसरी शाखा गोल बाजार (वर्तमान में शहीद स्मारक) में प्रारंभ हुई।इस शाखा में 24 मार्च सन् 1939 में परम पूज्य डॉ. हेडगेवार जी एवं परम पूज्य गुरु जी आए थे, वे भी पूर्ण गणवेश जो उस समय का था,उपस्थित थे। 400 स्वयंसेवक उपस्थित थे, उक्त कार्यक्रम में पंडित कुंजीलाल दुबे,श्रीराम नन्होरिया एडवोकेट तथा सर कार्यवाह मोती शंकर झा उपस्थित थे। प्रारंभिक काल के स्वयं सेवकों की सूची में सर्वश्री रामचंद्र ठोसर, गिरजा शंकर, द्वारका तिवारी,सुभाष बनर्जी, सदाव्रत आगटे, अनंत राव ठोसर, माधव परांजपे, सीताराम विश्वकर्मा, टेक चंद्र चौरसिया, सुंदरलाल कछवाहा, विष्णु राम कावरे, दमड़ी लाल जाट, जगदीश तिवारी, गोकुल प्रसाद अग्रवाल और भैया चौधरी जी आदि प्रमुख थे।
दमोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शुभारंभ परम पूज्य डॉ. हेडगेवार जी द्वारा नवंबर सन् 1937 में किया गया। वे जबलपुर से श्री शेंडये जी वैद्य के नाम से परिचय पत्र लेकर आए और दूसरे दिन कार्तिक एकादशी को संघ की स्थापना की। उस समय बाबा साहब आपटे भी उपस्थित थे। उसी दिन सायं काल श्री मणिशंकर जी दवे के यहां उनके मित्र श्री कृष्ण गुप्ता एवं श्री कुंज बिहारी लाल गुरु अधिवक्ताओं से भेंट होकर संघ के बारे में विस्तृत चर्चा हुई इस बैठक में श्री कुंज बिहारी लाल जी गुरु महोदय ने संघ का कार्य संभाला। सन् 1938 के प्रारंभिक काल में नागपुर से श्री बसंत राव जी देव कार्य विस्तार की दृष्टि से दमोह पधारे और प्रथम शाखा का प्रारंभ महाराणा प्रताप स्कूल के मैदान से शुरू हुआ। सन् 1938 के उत्तरार्ध में माननीय एकनाथ जी रानाडे,दमोह पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में पधारे, तब से दो नियमित शाखाएं चालू हुईं। प्रारंभिक काल के स्वयंसेवकों में सर्वश्री मधुकर राव सोनवलकर, श्री बसंत राव जी पाठक,श्री राम शंकर जी अग्रवाल,विनायक राव शेंडये, गंगाधर राव जी सप्रे और श्री कृष्ण जी सेलट प्रमुख हैं।
सागर नगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पदार्पण संघ के संस्थापक माननीय डॉ. केशव बलिराम पंत जी हेडगेवार के सागर प्रवास के साथ ही हुआ प्रामाणिक जानकारी के अनुसार सन् 1935 में डॉ.साहब का सागर प्रवास हुआ, डॉ.साहब लक्ष्मीपुरा में सागर नगर के तत्कालीन प्रसिद्ध वकील श्री गंगाधर राव खेर (पूर्व प्रांत कार्यवाह श्री लक्ष्मण राव खेर के पिताजी ) के निवास पर 2 दिन रुके थे। डॉक्टर साहब ने खेर के निवास पर नगर के कुछ प्रमुख लोगों की बैठक लेकर उन्हें संघ की कल्पना से अवगत कराया इस बैठक में नगर के 12 लोग उपस्थित रहने की जानकारी प्राप्त हुई है। इस बैठक में श्री गंगाधर राव खेर, श्री भैयालाल जी सराफ, श्री लक्ष्मण प्रसाद तिवारी,श्री किशोर सिंह तोमर, श्री रामकृष्ण पांड्या, श्री मनोहर राव टिकेकर आदि प्रमुख थे। माननीय डॉ. साहब ने बैठक के बाद जिले के संघ का दायित्व श्री भैया लाल सराफ को सौंपा था। नगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रथम शाखा लक्ष्मीपुरा के चंपा बाग नामक स्थान पर प्रारंभ हुई थी। बाद में इसका स्थान बदलकर महिला विद्यालय के पास वर्तमान मोराजी स्कूल का मैदान कर दिया गया।
पन्ना में सन् 1943 की गुरु पूर्णिमा के दिन कटनी के प्रचारक माननीय मुकुंद राव चांदे पधारे और एक बैठक लेकर संघ का कार्य आरंभ किया। बैठक में श्री काशीराम जीगुप्ता, श्री उमाशंकर पाठक,श्री भगवती प्रसाद सिन्हा और श्री रामदयाल जी महाजन उपस्थित थे।
टीकमगढ़ में श्री मुन्नालाल शर्मा सन् 1944 में पधारे और बैठक में संघ की चर्चा की। शाखा लगाने की विधिवत जानकारी नगर में दी। साप्ताहिक शाखा लगने लगी फिर श्री वाल्मीकि प्रसाद जी सन् 1946 में आए और उन्होंने बजरंग दल शाखा में अपना बौद्धिक दिया। बजरंग दल की शाखा के प्रमुख स्वयंसेवक श्री छोटेलाल जी सराफ, श्री मुन्ना सोनी और बाबूलाल सोनी थे। सन् 1948 में बजरंग दल की शाखा के सभी स्वयंसेवकों की गिरफ्तारी हो गई और शाखा बंद हो गई। पुनः सन् 1960 में श्री बिहारी लाल पटेल जी रीवा से टीकमगढ़ पहुंचे और नियमित शाखा प्रारंभ हुई।
छतरपुर जिले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा ने सन् 1934 में ही में प्रवेश पा लिया था इसके सूत्र नौगांव से प्राप्त होते हैं पब्लिक हाई स्कूल नौगांव के अध्यापक श्रीपाद नारायण भार्गव ने सन 1934 -35 में संघ की शाखा प्रारंभ की थी जिसकी पुष्टि उसे शाखा में स्वयंसेवक रहे श्री स्वामी शंकर मिश्रा सेवानिवृत्ति संयुक्त संचालक शिक्षा एवं श्री दयाराम मिश्र एडवोकेट ने की है। श्री ठाकुर प्रसाद तिवारी छतरपुर सन् 1939 में वर्धा में लगे सेवा में पहुंचे थे और सन 1940 में भी उसे समय सागर के एक वर्ग में भी गए थे जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आद्य सर संघ चालक परम पूजनीय श्री केशव बलिराम हेडगेवार के बाद सागर पधारे थे। छतरपुर में विधिवत् संघ शाखा का प्रारंभ सितंबर 1941 में हुआ जिसका पूर्ण श्री एक तरुण उत्साही युवक श्री कमलाकर जोगलेकर को है।श्री जोगलेकर अमरावती महाराष्ट्र से छतरपुर आए थे संभवतः संघ की तत्कालीन योजना के अनुसार यहां रहकर उनका उद्देश्य भी विद्या अध्ययन के साथ-साथ संघ का प्रचार -प्रसार करना था।
सतना में नवंबर 1941 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा का प्रारंभ एक विद्यार्थी निखिलेश पाल ने किया। प्रारंभिक काल के कार्यकर्ता में श्री गोविंद प्रसाद नेमा,श्री गर्दे जी, श्री पालधीकर जी, श्री कानेटकर जी और श्री शिवप्रसाद केसरवानी प्रमुख थे।
रीवा में वर्षों तक विभाग प्रचारक रहे श्री जुगराज द्विवेदी के अनुसार संघ की प्रथम शाखा सन 1938 -39 में एक बारात जो इंदौर से आई थी उसमें से एक बाराती ने तीन दिन तक रानीगंज में शाखा लगाई थी फिर वही बाराती स्वयंसेवक रीवा में 5 दिन रुक और उसने शाखा लगाई थी।वर्तमान में श्री कृष्ण पाल जी (पूर्व विभाग संघचालक रीवा) के अनुसार रीवा जिले की प्रथम शाखा रानीगंज में सन 1943 में प्रारंभ हुई जब श्री कृष्ण पाल जी सन 1943 में विद्यार्थी थे और रानीगंज की शाखा में ही स्वयं सेवक बने। इस शाखा के मुख्य शिक्षक श्री राजपाल सिंह थे, इसके अलावा श्री हुकुमचंद जैन बसंत सिंह महावीर प्रसाद सिंह प्रेमनाथ सिंह थे तथा दूसरी शाखा झिरिया (रीवा )में लगी जहां के मुख्य शिक्षक श्री बसंत सिंह थे।
सीधी नगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा का शुभारंभ सन् 1940 के जून महीने में श्री शंकर लाल गोयल जो दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, उनके द्वारा साधारण कबड्डी के खेल के माध्यम से हुआ। शाखा का संचालन श्री मदन नाथ सिंह चौहान द्वारा किया जाता था। प्रारंभिक स्वयंसेवक जिनको लेकर संघ का कार्य प्रारंभ किया गया उनमें श्री वैद्यनाथ सिंह का नाम प्रमुख है।
सिंगरौली में संघ की प्रथम शाखा सन् 1961 में बैढ़न नगर स्थित विजय स्तंभ के पास जवाहर पार्क में श्री राधेश्याम गुप्ता की प्रेरणा से शुरू की गई थी। इसके बाद सीधी के जिला प्रचारक नरेंद्र दत्त त्रिपाठी जी के आने के बाद उनके प्रयास व प्रेरणा से संघ का कार्य प्रभाव में आया। सन् 1996 में सिंगरौली जिले के प्रथम जिला प्रचारक के रुप में श्री भूपेंद्र पाराशर जी कार्य भार संभाला।
शहडोल में संघ का शुभारंभ सन् 1937 में श्री नर्मदा प्रसाद नामदेव द्वारा किया गया। शहडोल में संघ की नियमित शाखा का शुभारंभ सन् 1943 की विजयादशमी से हुआ। सन् 1944- 45 में बुढार,धनपुरी चंदिया, जैतहरी, कोतमा और उमरिया में शाखाएं शुरू हुईं। नगर संघ चालक श्री ए. एल. नारायण राव ही थे।
अनूपपुर में सन् 1945 से कोतमा, व्यंकट नगर एवं चचाई बस्ती में संघ कार्य का विस्तार और शाखा प्रारम्भ हुईं। सन् 1994 में जिला बनने के बाद ग्रामीण अंचलों में संघ कार्य का विस्तार हुआ।
बिलासपुर में संघ शाखा का शुभारंभ 26 दिसम्बर 1928 में परम पूज्य डॉक्टर हेडगेवार जी ने स्वयं किया था।बापू साहब दिग्रसकर का महती योगदान था। श्री नारायण जी प्रथम मुख्य शिक्षक थे। प्रारंभिक काल के स्वयंसेवकों में श्री नानाजी दिग्रसकर, दिलीप सोनी,सदन लाल सोनी, श्री नुलकर वकील, श्री जमुना प्रसाद वर्मा,श्री ऋषिकेश शेंडे आदि प्रमुख थे।
रायपुर में अप्रैल सन् 1929 में परम पूज्य डॉ. हेडगेवार जी ने संघ कार्यालय और संघ शाखा का शुभारंभ किया,उनके साथ श्री प्रभाकरराव देवस्थले की महती भूमिका रही।आगे चलकर रायपुर के स्वयंसेवकों द्वारा सन् 1938 में महासमुन्द में संघ कार्य के साथ शाखा का शुभारंभ किया गया।
सन् 1933 में दुर्ग में परम पूज्य डॉ.हेडगेवार जी ने संघ शाखा का शुभारंभ किया। इस समय श्री किरौलीकर और डॉ. पाटनकर का महत्वपूर्ण अवदान रहा।
सन् 1942 में राजनांदगांव में केशव राव गोरे ने संघ शाखा का शुभारंभ किया। बस्तर में अगस्त सन् 1946 में श्री बाबूलाल गुप्ता ने संघ शाखा का शुभारम्भ किया।सरगुजा (अंबिकापुर) में मई सन् 1946 में रेवतीरमण मिश्रा ने संघ शाखा का शुभारम्भ किया।
राष्ट्रीय आपदाओं और आपातकालीन परिस्थितियों में संघ के कार्यकर्ताओं ने बलिदान देकर तिरंगे की आन -बान -शान को बनाए रखा। बाढ़ हो या फिर भूकंप जहां भी त्रासदी आई वहां संघ के कार्यकर्ता सेवा करने पहुंच जाते हैं। मेघों की गर्जना हो या ठिठुरती रातें या फिर गर्म हवा के झोंके, ये हर मौसम में तैयार रहते हैं। संकल्प यही कि देश की सेवा कर लोगों की जीवन रक्षा कर सकें।
आद्य सर संघचालक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रत्व की भावना को लेकर अश्विन शुक्ल पक्ष विजयादशमी वि.सं.1982 तदनुसार 27 सितम्बर सन् 1925 में जो संघ रुपी बीज बोया था, वह आज वट वृक्ष के रुप में देश और विदेश में कई शाखाओं और अनेक स्वरुपों में दृष्टिगोचर होता है तथा कल्प वृक्ष बनकर भारत को पल्लवित और पुष्पित कर रहा है।संघ का हर स्वयंसेवक यही चाहता कि देश सेवा में ही उसकी पूर्णाहुति हो और भारत परम वैभव पर आरुढ़ हो।
डॉ. आनंद सिंह राणा
इतिहासकार व स्तंभ लेखक

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