मंडला में विजयादशमी उत्सव पर निकला अनुशासित पथ संचलन

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मुख्य वक्ता प्रेमशंकर सिदार बोले — “हिन्दू समाज संगठित होगा तो देश पुनः अपनी प्रतिष्ठा प्राप्त करेगा”

रेवाँचल टाईम्स – मंडला, जिले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर संघ के छह प्रमुख उत्सवों में से एक विजयादशमी उत्सव का आयोजन सोमवार को मंडला नगर के अष्टविनायक लॉन में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक शस्त्र पूजन के साथ हुई।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता मध्य क्षेत्र के सह क्षेत्र प्रचारक श्री प्रेमशंकर सिदार ने शस्त्र पूजन के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा “जैसे भगवान श्रीराम ने रावण से युद्ध के पूर्व शक्ति की आराधना कर बुराइयों पर विजय प्राप्त की थी, वैसे ही समाज के लोगों को भी बुराइयों पर विजय पाने के लिए अपनी शक्ति का संवर्धन करना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि भारत हिन्दू भूमि है, यह धरती हमारी माता है और इसे पूजने की परंपरा केवल भारत में ही है। श्री सिदार ने कहा कि हिन्दू समाज यदि संगठित होगा, तो पुनः अपनी खोई प्रतिष्ठा प्राप्त करेगा। उन्होंने जोर दिया कि जिस देश में लोकशक्ति और सज्जनशक्ति का जागरण होता है, वही देश वास्तविक विकास करता है और सरकार पर निर्भर नहीं रहता।
प्रेमशंकर सिदार ने अपने उद्बोधन में जीवनी शक्ति के जागरण की बात कही। उन्होंने बताया कि दीनदयाल उपाध्याय ने इसे ‘चिति’ कहा और स्वामी विवेकानंद ने ‘धर्म’। जब यह जीवनी शक्ति जागृत होती है, तब समाज अपनी बुराइयों को स्वयं सुधारने लगता है। उन्होंने पन्ना धाय, गुरु गोविंद सिंह, महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन उदाहरणों को प्रेरणा स्रोत बताया।

मुख्य वक्ता ने संघ के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि देश विभाजन के समय स्वयंसेवकों ने निःस्वार्थ भाव से सेवा की और बलिदान दिया। संघ पर प्रतिबंध के समय सरसंघचालक सहित लगभग 73,000 स्वयंसेवक जेल में बंद किए गए, लेकिन संघ ने कभी सेवा और राष्ट्रकार्य से विमुखता नहीं दिखाई।
उन्होंने कहा कि संघ के 100 वर्षों की यात्रा समाज समरसता और संगठन का प्रतीक है। अब समय है कि समाज संघ के साथ चलकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाए। सिदार ने संयुक्त परिवार प्रणाली, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी अपनाने और कानून पालन में नागरिकों की स्वप्रेरणा को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि “शताब्दी वर्ष केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि समाज की सज्जन शक्ति को संघ के साथ भारत के विकास में लगाने का समय है। अनुशासन में ही समाज की प्रगति निहित है।”

कार्यक्रम में मंचासीन मुख्य अतिथि के रूप में किशोर काल्पिवार, तथा जिला और नगर संघचालक उपस्थित रहे।

मुख्य वक्ता के उद्बोधन के उपरांत गणवेशधारी स्वयंसेवकों ने नगर के प्रमुख मार्गों से अनुशासित और लयबद्ध पथ संचलन किया। संचलन के दौरान नगरवासियों ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत स्वयंसेवकों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। जयघोष से सम्पूर्ण नगर राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग गया।

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