मंदिर को भी नहीं बख्श रहे शराबी श्रद्धास्थलों के पास शराबखोरी से स्थानीय में आक्रोश
रेवांचल टाईम्स – मंडला, मंडला जिला जिसे माँ नर्मदा तीन तरफ से घेरे हुए है माँ रेवा की गोद मे बसा नगर को शराब माफियाओं की गंदी नजर लग चुकी है, और प्रतिबंधित क्षेत्र शराब बन्द के बाद भी पुलिस विभाग और आबकारी विभाग की ठेकेदार के साथ जुगलबन्दी से जनता त्रस्त नजर आ रही है,।
वही तत्तकालीन शिवराज सरकार द्वारा नर्मदा नदी से पाँच किलोमीटर की परिधि में शराब दुकानों पर प्रतिबंध लगाने के आदेश के बाद उम्मीद की जा रही थी कि नगर में शराब ठेकेदारों न आतंक मचा रखा है और शराबखोरी पर अंकुश लगेगा, परंतु स्थिति इसके ठीक उलट हो गई है।। नगर में जहाँ कुछ सरकारी दुकानें बंद हुई, वहीं अब अवैध रूप से सैकड़ों घर शराब बिक्री केंद्र में तब्दील हो चुके हैं। आलम यह है कि हर वार्ड में शराब की खुलेआम बिक्री हो रही है और कुछ जगहों पर तो “घर पहुँच सेवा” तक दी जा रही है। आबकारी विभाग द्वारा समय-समय पर छापेमारी कर अवैध शराब का जखीरा जब्त किया जा रहा है. लेकिन कार्रवाई के बावजूद कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं। ताजा मामला इंदिरा जी वार्ड बुधवारी बाज़ार का है, जहाँ वैद्यघाट मार्ग पर कुछ घरों में खुलेआम शराब बेची और परोसी जा रही है। हैरानी की बात यह है कि इन्हीं घरों के समीप भगवान शिव का प्राचीन, शिवलिंग विराजमान है, जहाँ प्रतिदिन श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय महिलाओं ने बताया कि शराबी अक्सर मंदिर के पास बैठकर नशा करते हैं और बोतलें वहीं फेंक देते हैं, जिससे मंदिर परिसर की पवित्रता भंग हो रही है। पूजा के समय माताओं-बहनों को असुविधा का सामना करना पड़ता है और माहौल असहज हो जाता है।
वही श्रद्धालुओं का कहना है कि यह न केवल धार्मिक भावनाओं का अपमान है बल्कि कानून व्यवस्था के लिए भी शराब ठेकेदार और पेकारी ने चुनौती बन दिया है। जनता ने जिला प्रशासन पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग से मांग की है कि ऐसे स्थलों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए और मंदिरों व धार्मिक स्थानों के आस-पास शराब विक्रय व सेवन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाए। श्रद्धालु और स्थानीय लोग एक स्वर में कह रहे हैं “धर्म और नशा एक साथ नहीं चल सकते, मंदिरों की पवित्रता बचाना हम सबका कर्तव्य है।”