सार्वजनिक स्थलों से गायब हो रहे वाटर कूलर नगर पालिका की लापरवाही बनी जनहित के लिए खतरा
रेवांचल टाइम्स – मंडला, नगर पालिका मंडला की मनमानी और लापरवाही के चलते शहर के नगर के सार्वजनिक स्थलों,चौक चौराहों, और बाजार क्षेत्रों में लगे वाटर कूलर या तो खराब हो गए हैं या फिर पूरी तरह से गायब कर दिए गए हैं। इन वाटर कूलरों से गर्मी के मौसम में हजारों लोगों को शुद्ध व ठंडा पेयजल उपलब्ध कराया जाता था, लेकिन अब ये केवल यादें बन कर रह गए हैं। नगर पालिका की निष्क्रियता लापरवाही के कारण इनकी संख्या दिन-ब-दिन घटती जा रही है और यह स्थिति शहरवासियों में नाराजगी और आक्रोश का कारण बन रही है।
जनता के लिए जरूरी थे वाटर कूलर
वही नगर पालिका द्वारा विगत वर्षों में शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों चौक-चौराहों, तिराहों, स्कूलों के आसपास और बाजार क्षेत्रों में वाटर कूलर स्थापित किए गए थे। इनका उद्देश्य हर वर्ग के लोगों को साफ और ठंडे पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराना था, जिससे आम नागरिक, दुकानदार, राहगीर और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने जाने वाले लोग पानी पी कर अपनी प्यास बुझा सकें। गर्मी सर्दी बारिश के दिनों में ये वाटर कूलर हर समय लोगों के लिए जीवनदायिनी सुविधा से कम नहीं थे। परंतु वर्तमान में हालात ये हैं कि कई जगहों पर ये वाटर कूलर या तो बंद पड़े हैं और फिर पूरी तरह से हटा दिए गए हैं।
नगर पालिका की व्यवस्था की पोल खोल रही है
नेहरू स्मारक और बिझिया तिराहा ज्ञानदीप स्कूल बने उदाहरण
सूत्रों से जानकारी के अनुसार, बिझिया तिराहा स्थित और ज्ञानदीप स्कूल के सामने पहले वाटर कूलर स्थापित था, साथ ही श्रमिकों के लिए एक शेड भी बनाया गया था। यहां रोजाना सैकड़ों स्थानीय और बाहर से आये मजदूर काम की तलाश में इकट्ठा होते हैं और इसी वाटर कूलर से अपनी प्यास बुझाते थे। लेकिन नगर पालिका ने बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के इसे उखाड़ दिया।इसी तरह, शहर के एक प्रमुख स्थल नेहरू स्मारक में लगा वाटर कूलर भी हाल ही में रहस्यमय तरीके से गायब हो गया है। लाखों रुपये की लागत से लगाए गए ये वाटर कूलर अब कहां हैं, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नगर पालिका नहीं दे पा रही है। यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन वाटर कूलरों को क्यों हटाया गया और क्या इनकी जगह कोई नई व्यवस्था की गई है।
रखरखाव में घोर लापरवाही
नगर पालिका के अधिकारियों द्वारा इन वाटर कूलरों के रखरखाव को लेकर बरती जा रही लापरवाही साफ तौर पर देखी जा सकती है। कई स्थानों पर वाटर कूलर महीनों से खराब पड़े हैं, लेकिन बार-बार शिकायतों के बावजूद न तो इन्हें सुधारा गया और न ही बदला गया।
जनता का आरोप है कि नगर पालिका के अधिकारी केवल फाइलों में योजनाएं बना रहे हैं, जबकि धरातल पर स्थिति बिल्कुल विपरीत है। वाटर कूलरों के लिए न तो नियमित सफाई की जाती है, न ही उनकी मरम्मत की कोई जिम्मेदारी तय की गई है। यही कारण है कि गर्मी के भीषण दिनों में भी लोगों को पेयजल के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप
शहर के नागरिकों में यह धारणा बनती जा रही है कि नगर पालिका में बैठे कुछ अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। जबसे नए अधिकारी का आगमन हुआ है, तबसे निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की भारी अनदेखी हो रही है। वाटर कूलरों के मामले में भी ऐसी ही स्थिति देखी जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लाखो रुपये की लागत से लगाए गए वाटर कूलर अगर कुछ वर्षों में ही खराब हो जाते हैं या गायब हो जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। नागरिकों का यह भी आरोप है कि नगर पालिका के भीतर कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच साठगांठ है, जिसके चलते निम्न गुणवत्ता वाले निर्माण कार्यों को हरी झंडी दे दी जाती है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी
यह भी एक गंभीर मुद्दा है कि नगर पालिका की इस लापरवाही पर जनप्रतिनिधि पूरी तरह से मौन हैं। न तो किसी पार्षद ने इस विषय पर आवाज उठाई है, और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने प्रशासन से कोई ठोस कार्रवाई की मांग की है।
जनता सवाल कर रही है कि जो सुविधाएं उनके टैक्स के पैसों से बनाई गई थीं, वे अगर लापरवाही या भ्रष्टाचार के कारण समाप्त हो रही हैं, तो फिर जवाबदेही किसकी हो।
वही वाटर कूलर जैसे साधारण दिखने वाले लेकिन बेहद जरूरी सार्वजनिक संसाधन की उपेक्षा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नगर पालिका मंडला की प्राथमिकता में आम जनता की सुविधा नहीं है।
इनका कहना है कि
नेहरू स्मारक में लगा वाटर कूलर दूसरी जगह लगाया जायगा जगह की तलाश की जा रही है और ज्ञानदीप स्कूल के सामने वाला वाटर कूलर वही आसपास लगा होगा मेरी जानकारी में नही है।
गजानन नाफड़े
सी एम ओ नगर पालिका मंडला