मानव अधिकार आयोग का संज्ञान: तीन घटनाएं, एक सवाल… इंसानियत की फाइल आखिर कब खुलेगी?
भोपाल से आई एक ख़बर ने आज फिर हमें आईने के सामने खड़ा कर दिया है… वो आईना जिसमें हमारा प्रशासन, हमारी व्यवस्था और हमारी संवेदनहीनता तीनों एक साथ दिखाई देती हैं।
मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के सदस्य डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने जबलपुर से जुड़ी तीन अलग-अलग घटनाओं पर संज्ञान लिया है। लेकिन सवाल ये है कि इन संज्ञापत्रों से ज़मीन पर क्या बदलेगा?
पहला मामला… जिनके झाड़ू से शहर चमकता है, उनका चूल्हा चार महीने से बुझा है
जबलपुर नगर निगम के ठेका सफाई कर्मियों को चार महीने से वेतन नहीं मिला।
हाँ, वही सफाई कर्मी जिनकी वजह से नेता जी की गली और साहब का मोहल्ला रोज़ चमकता है।
कंपनी ने काम तो लिया, लेकिन मजदूरी देने में बहरे बन गई।
इन सफाईकर्मियों की हालत इतनी खराब है कि अब उनका पेट सरकार की स्वच्छता रैंकिंग से नहीं, उधारी से भरता है।
मानव अधिकार आयोग ने नगर निगम आयुक्त से रिपोर्ट मांगी है… दो हफ्ते में।
पर सवाल है: क्या दो हफ्तों में भूख टल जाती है?
दूसरा मामला… पनागर स्वास्थ्य केंद्र में मौत की डेट वाला इंजेक्शन
पनागर के स्वास्थ्य केंद्र में एक मरीज को एक्सपायरी डेट का इंजेक्शन लगा दिया गया।
सोचिए, जहां इलाज मिलना चाहिए वहां ज़हर परोसा जा रहा है।
नर्स ने इंजेक्शन लगाया, मरीज की हालत बिगड़ी, और फिर आनन-फानन में छुट्टी…. जैसे गलती भी ऑफिशियल हो गई हो।
आयोग ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से रिपोर्ट मांगी है… दो हफ्ते में।
पर सवाल फिर वही: क्या एक्सपायरी इंजेक्शन के बाद रिपोर्ट की ताज़गी से ज़िंदगी लौट आएगी?
तीसरा मामला … स्कूल में शिक्षा के नाम पर हिंसा
मदन महल के एक निजी स्कूल के प्राचार्य ने आठवीं के छात्र को सिर्फ पाँच मिनट लेट आने पर पीट दिया।
बालक का कान घायल हो गया… और हम सबका जमीर भी।
घर पहुंचा, रोया, इलाज हुआ, FIR भी हुई।
आयोग ने अब कलेक्टर से रिपोर्ट मांगी है…. दो हफ्ते में।
पर बच्चे के भीतर जो डर बैठ गया है, उसकी रिपोर्ट कौन तैयार करेगा?
तीन मामले, तीन पीड़ित, तीन रिपोर्टें … और हर बार एक ही लाइन: आयोग ने संज्ञान लिया।
सवाल ये है कि क्या हमारा सिस्टम सिर्फ संज्ञान लेने तक सीमित रह गया है?
कभी सफाईकर्मी भूख से जूझते हैं, कभी मरीज इंजेक्शन से, कभी बच्चा स्कूल से।
लेकिन जवाब देने की जिम्मेदारी हमेशा अगले नोटिस पर टाल दी जाती है।
ये है मध्यप्रदेश जहाँ इंसानियत की हर शिकायत का जवाब दो शब्दों में आता है:
संज्ञान लिया गया।