सच दिखाने पर मिली जान से मारने की धमकी

जिले में पत्रकार नहीं हैं सुरक्षित पत्रकार ने मांगी पुलिस सुरक्षा..

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रेवांचल टाईम्स – मंडला, जिले में ये पहला मामला नहीं हैं जिसमें कि पत्रकारों के द्वारा सच्चाई दिखाने के लिए आमजन और जिला प्रशासन के सामने लाने के लिए तरह- तरह की प्रताड़नाओं और धमकियां पत्रकारों को झेलना पड़ता हैं, सच्चाई सामने के डर से भ्रष्टों ने तरह- तरह के हथकण्डे अपनाते हैं कभी फर्जी केस में फंसाने तो कभी लालच देना और कभी पत्रकारों के खिलाफ झूठी शिकायत करना आम बात हो गई हैं। ऐसे हालात देख कर तो अब यहीं लगता है कि इन रसूखदारों के सामने पुलिस प्रशासन नतमस्तक नजर होते हुए आती है, और आई शिकायत पर बिना जाँच पड़ताल करते हुए पत्रकार के खिलाफ पुलिस प्रशासन पहले ही F.I.R दर्ज कर लेती हैं, साथ ही पुलिस का यह हर संभव प्रयास रहता है कि किसी भी तरह से पहले पत्रकार और पत्रकारिता करने वाले और सच्चाई दिखाने वालों वाले खिलाफ ही कार्यवाही करने को आतुर रहती हैं, बस इन्हें मौका मिले। वही दूसरी ओर अगर कोई रसूखदार या भ्रष्ट व्यक्ति पत्रकार को धमकी या जान से मारने की बात करें तो शिकायत दर्ज करने में भी पुलिस विभाग के द्वारा आनाकानी की जाती है। जिले में पुलिस विभाग आखिर किस हद तक अबैध कारोबारियों और रसूखदारों के आगे घुटने टेक और अपने आप को लाचार दिखाते हुए नज़र आ रही हैं, और जिले में कानून का राज किस तरह से काम कर रहा हैं और कानून के रखवालों ने क्या व्यवस्था बना रखी है ये आज किसी से छुपी नही है।

वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक स्थानीय पत्रकार को भ्रष्टाचारियों के खिलाफ़ एक खुलासापूर्ण खबर प्रसारित करने के बाद जान से मारने की धमकी मिली।मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्रकार ने संबंधित थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराते हुए पुलिस विभाग से सुरक्षा की मांग की है।

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पत्रकार ने हाल ही में एक संवेदनशील मुद्दे पर रिपोर्टिंग की थी, जिसमें कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर सवाल खड़े हुए थे। खबर प्रसारित होने के कुछ ही घंटों के भीतर पत्रकार  के मोबाइल फोन पर अज्ञात नंबरों से फोन कॉल और मैसेज के जरिए जान से मारने की धमकियाँ मिलने लगीं।

 

पत्रकार ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैंने सिर्फ अपनी जिम्मेदारी निभाई है, लेकिन अब मेरी और मेरे परिवार वालों को जान का खतरा है। मैंने थाने में लिखित शिकायत दी है और पुलिस से सुरक्षा की मांग की है।”

 

स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि धमकी देने वालों की पहचान के लिए जांच शुरू कर दी गई है।

अब प्रश्न चिन्ह यह लगता हैं कि एक पत्रकार के खिलाफ अगर कोई झूठी शिकायत भी कर देता हे तो पुलिस प्रशासन बिना कोई देर किए सीधा रिपोर्ट दर्ज कर पत्रकार को जेल पहुंचाने के लिए आतुर हो जाती है। जबकि मध्य प्रदेश सरकार ओर पुलिस महकमें के वरिष्ठतम अधिकारियों ने देश के चौथे स्तंभ के लिए एक मापदण्ड तय कर रखा है। की बिना कोई जाँच पड़ताल किए पत्रकारों पर झूठी रिपोर्ट दर्ज़ न की जाये। पर जिला पुलिस विभाग सभी मापदंडों को दरकिनार कर और सीनियर अधिकारियों की गाइड लाइन को अनदेखा कर अपनी खाकी की हनक दिखाते हुए सीधा कार्यवाही करने पर आतुर हो जाती है। वही अगर एक रसूखदार और भ्रष्ट के खिलाफ़ अगर कोई पत्रकार अपनी जान को जोखिम में डाल कर सच्चाई दिखाने का प्रयास भी करता है तो पुलिस प्रशासन के द्वारा जांच का आश्वाशन देकर बात को टाल मटोल किया जाता हैं।

 

जिले के पत्रकार संगठनों और प्रेस क्लब ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए प्रशासन से सख्त कार्यवाही और पत्रकारों को सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है।

 

उक्त घटना न सिर्फ पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है, बल्कि देश के चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता पर भी एक बड़ा हमला माना जा रही है। ऐसे में आज स्वतंत्रता पूरक कार्य मीडिया कर्मी कैसे कर सकते है, और राज्य और ग्रह विभाग के आदेशों की अनदेखी की जा रही हैं।

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