नगर पालिका–ठेकेदार गठजोड़ से मंडला की सड़कों का सत्यानाश

सीवरेज लाइन के नाम पर फिर खोदी गई नई सड़कें — करोड़ों का नुकसान जनता के सिर

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रेवाँचल टाईम्स – मंडला, जिले की नगर पालिका मंडला और सीवरेज निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार के बीच कथित “गठजोड़” का खेल लगातार शहर की सड़कों को बर्बाद कर रहा है। जनता के टैक्स से बनी सड़कें हर कुछ महीनों में खोदी जा रही हैं, और फिर मरम्मत के नाम पर दोबारा खर्च किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, लालीपुर से बस स्टैंड तक बनी नई डामर सड़क को हाल ही में सीवरेज ठेकेदार द्वारा आधा दर्जन स्थानों पर फिर से खोद दिया गया, जिससे पूरी सड़क की हालत खराब हो गई। यह वही मार्ग है, जिस पर नगर पालिका ने हाल ही में लाखों रुपए खर्च कर चौड़ीकरण और डामरीकरण कराया था। अब दोबारा खुदाई से सड़क का समतलीकरण बिगड़ गया है और नगर पालिका को एक और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। चार साल से जारी ‘खोदाई और मरम्मत’ का चक्र
शहरवासियों का कहना है कि पिछले चार वर्षों से यही खेल लगातार चल रहा है — पहले सीवरेज ठेकेदार सड़क तोड़ता है, फिर कुछ महीने बाद नगर पालिका मरम्मत करवाती है। इस तरह से हर साल लाखों रुपये बर्बाद हो रहे हैं, लेकिन कोई जवाबदेही तय नहीं की गई।एसटीपी तैयार, पर सीवरेज लाइन अधूरी — काम अधर में
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सीवरेज प्रोजेक्ट के तहत मेन लाइन और चैम्बर (मेन होल) का निर्माण हो चुका है, एसटीपी भी तैयार है, लेकिन अभी तक टेस्टिंग तक नहीं हुई।
कारण यह है कि घरों से निकलने वाले सीवरेज को मुख्य लाइन से जोड़ा ही नहीं गया है। अब इस कनेक्शन के लिए फिर से सड़कों में खुदाई की जा रही है।
मरम्मत” के नाम पर लीपा-पोती — जन आक्रोश बढ़ा
ग्रामीणों और व्यापारियों ने बताया कि खुदाई के बाद ठेकेदार ने केवल ऊपरी समतलीकरण कर सड़क पर डस्ट डाल दी है, जिससे कुछ समय बाद फिर धूल और गड्ढे बनने लगे हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन ठेकेदार की मनमानी पर आंख मूंदे बैठा है।
> “सड़कें बनती हैं सिर्फ कागज़ों में, ज़मीन पर तो सिर्फ खुदाई और धूल बची है,”
— नाराज़ नागरिकों का कहना।जनता बोली – जवाब दो, सड़कें क्यों तोड़ी जा रही हैं?
लोगों ने सवाल उठाया है कि जब सीवरेज प्रोजेक्ट की टेस्टिंग तक पूरी नहीं हुई, तो नई सड़कें क्यों बनाई जा रही हैं? और अगर बनाई गईं, तो बार-बार तोड़ने की अनुमति किसने दी?
निगम इंजीनियरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से जनता का धन पानी की तरह बहाया जा रहा है।
सवालों के घेरे में नगर पालिका प्रबंधन
क्या सीवरेज कार्य की मॉनिटरिंग की जा रही है?
क्या ठेकेदार को सड़क पुनः खुदाई की अनुमति दी गई है?
कितनी राशि अब तक मरम्मत में खर्च हो चुकी है?
इन सवालों के जवाब अब तक किसी के पास नहीं हैं। जनता अब नगर पालिका और ठेकेदार के गठबंधन पर पारदर्शी जांच की मांग कर रही है सीवरेज के नाम पर सड़कें तबाह — ठेकेदार मालामाल, जनता बेहाल!” और जिम्मेदारों को लोगों की परेशानियों से कोई लेना देना नहीं है!

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