बिलगांव ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार का बोलबाला नियमों को ताक पर रखकर किये लाखों के बिलों का भुगतान

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रेवांचल टाइम्स मोहगांव मंडला जिले की कई ग्राम पंचायतों में जमकर भ्रष्टाचार चल रहा शासकीय राशि का जमकर बंदरबांट किया जा रहा है पर कागजो में सही दिखाया जाता है सरकारी योजनाओं को निजी संपत्ति समझकर सरकार का खजाना खाली करने लगे हुए है भय मुक्त होकर कार्यो को अंजाम दिया जा रहा है वही सूत्रों से जानकारी अनुसार बिलगांव ग्राम पंचायत इन दिनों भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर सुर्खियों में है। पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये के बिलों का भुगतान नियमों को ताक पर रखकर किया गया है। सूत्रों से जानकारी के अनुसार, पंचायत में एक फर्म गरिमा ट्रेडर्स बिल्डिंग मटेरियल हार्डवेयर दलहन तिलहन, भगत सिंह वार्ड मंडला के नाम पर लाखों रुपये के बिलों का भुगतान किया गया है। यह सब सरपंच और सचिव की मिलीभगत से कमीशन के चलते किया गया है।


एक ही सप्लायर को भुगतान, नियमों की खुली उड़ाई धज्जियां
ग्राम पंचायत के वित्तीय नियमों के अनुसार, किसी भी विकास कार्य या सामान की खरीदी में प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया अपनाना आवश्यक होता है। किंतु बिलगांव पंचायत में इस प्रक्रिया की पूरी तरह अनदेखी की गई। बताया जा रहा है कि पंचायत सचिव भुवन नंदा और सरपंच की मिलीभगत से गरिमा ट्रेडर्स के बिना दिनांक लिखे फर्जी या बढ़े-चढ़े बिल तैयार कर उनका भुगतान कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में किसी भी कार्य या खरीदी के लिए पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है।
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी पुलिया
पंचायत क्षेत्र के पोषक ग्राम सुनटेकरी में लगभग 12 लाख रुपये की लागत से तीन रो की पुलिया का निर्माण कुछ माह पूर्व किया गया था। परंतु एक ही बारिश के सीजन में वह पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई। इससे यह स्पष्ट हो गया कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया था। पुलिया पर खर्च किए गए पैसे जनता के नहीं बल्कि सरपंच-सचिव और ठेकेदार के जेब में चले गए।
सूत्रों ने बताया कि पुलिया बनते ही हमें शक था कि इसमें घटिया सामग्री के निर्माण कार्य कराया जा रहा है घटिया मटेरियल लगाया गया है, लेकिन जब पहली बरसात आई तो पुलिया छतिग्रस्त हो गई है। लाखों रुपये बर्बाद हो गए ।कोई पूछने वाला नहीं है।छतिग्रस्त पुलिया में रिपेयरिंग का कार्य कराया जा रहा है
बाजार नीलामी का हिसाब नदारद
बिलगांव ग्राम पंचायत में पिछले तीन वर्षों से बाजार नीलामी से प्राप्त आय का कोई हिसाब-किताब नहीं दिया गया है। पंचायत के कई पंचों और ग्रामीणों ने बार-बार सचिव भुवन नंदा से इस संबंध में जानकारी मांगी, लेकिन सचिव ने हर बार टालमटोल कर दिया जाता है पंचायत में बाजार से होने वाली आय का उपयोग विकास कार्यों में न होकर निजी स्वार्थों के लिए किया जा रहा है।ग्रामीण लोग बार-बार बाजार नीलामी की रकम का हिसाब मांग रहे हैं आखिर जनता का पैसा कहां जा रहा है कमीशन” तय करके ही किया जाता है, कार्य जिससे असली विकास कार्य ठप पड़े हैं। सरकार से आने वाला पैसा गरीबों के विकास के लिए होता है, लेकिन यहां तो हर बिल में कमीशन की मांग की जाती है। जब तक कोई जांच नहीं होगी, तब तक यह खेल चलता रहेगा।
ग्राम पंचायत में इस खुलेआम हो रहे भ्रष्टाचार पर स्थानीय प्रशासन की चुप्पी भी कई सवाल खड़े करती है। अब तक न तो कोई जांच समिति गठित की गई है और न ही किसी अधिकारी ने स्थल निरीक्षण किया है। पंचायत में चल रहे इस “कमीशन तंत्र” ने शासन की योजनाओं को बदनाम कर दिया है।सरकार करोड़ों रुपये गांव के विकास के लिए भेजती है, लेकिन अधिकारी और जनप्रतिनिधि मिलकर उस पैसे की बंदरबांट कर लेते हैं।
ईमानदार जांच से खुल सकते हैं कई राज यदि बिलगांव ग्राम पंचायत की जांच ईमानदारी से कराई जाए तो लाखों रुपये की हेराफेरी सामने आ सकती है। फर्जी बिल, घटिया निर्माण, अपूर्ण विकास कार्य और बिना निविदा के भुगतान जैसी कई गड़बड़ियां उजागर हो सकती हैं
बिलगांव ग्राम पंचायत में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं ने विकास की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। जनता का पैसा जनता के हित में खर्च होने के बजाय कुछ चुनिंदा लोगों की जेब में जा रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर प्रकरण को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर बिलगॉव पंचायत में अनिमित्ताओ का सिलसिला आगे भी यू ही चलता रहेगा।

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