फॉलोअप… राजधानी भोपाल में ही शिक्षा के नाम पर मची हुई है जम के लूट
आयुर्वेद कॉलेज में खुलेआम लूट – 300 सीटों वाला अस्पताल खाली!" और कागज में फुल

दैनिक रेवांचल टाइम्स – भोपाल, प्रदेश की राजधानी भोपाल में ही सरकारी तंत्र कितना निष्क्रिय हैं यह सच्चाई किसी से छुपी हुई नहीं हैं, जहाँ से पूरे प्रदेश में सरकारी तंत्र की लगाम रहती है और जब राजधानी में ही सरकारी तंत्र बेलगाम हो जाये और सब सरकारी तंत्र की नाक के नीचे ही लूट का खुला खेल चलता रहे तो गरीब बच्चों का क्या होगा जो अच्छी शिक्षा पाने के लिए आज लूट रहे हैं और जब आयुर्वेदिक कॉलेजों ने खुली लूट मचा रखी हैं। हाल यह हैं कि सरकार और सरकारी सिस्टम को धता बताते हुए भोपाल के ज्यादातर आयुर्वेदिक कॉलेजों में खुली लूट मची हुई हैं।सरकारी सिस्टम कुंभकरणीय नींद में डूबा हुआ हैं। इसीलिए तो प्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकारी तंत्र की नाक के नीचे ही आयुर्वेदिक कॉलेज खुली लूट मचा रखी हैं।
ऐसा ही एक मामला राजधानी भोपाल के सेम नामक आयुर्वेदिक कॉलेज का हैं। जिसमें सरकारी नियम के तहत 300 BAMS सीटों की मान्यता मिली हुई हैं। राजधानी भोपाल में स्थित सेम नामक कॉलेज एवं यूनिवर्सिटी पर आयुर्वेद शिक्षा के नाम पर गहराती लूट और शैक्षणिक घोटालो की सड़ांद आ रही है।
सेम राष्ट्रीय आयुर्वेद आयोग (NCIM) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की सख्त गाइडलाइनों की खुलेआम अवहेलना करते हुए कॉलेज को 300 BAMS सीटों की मान्यता तो मिल गई परंतु इसके विपरीत संबंधित अस्पताल बंद पड़ा हुआ हैं। सेम आयुर्दिक कॉलेज में कभी मरीज देखने को मिलते ही नहीं और कॉलेज की फैकल्टी हमेशा ही नदारद रहती है।
ताले में अस्पताल , मरीज – कागज़ों में!
हकीकत:
अस्पताल महीनों से बंद पड़ा है। और मरीज सिर्फ कागजों में ही देखने को मिलते हैं। इसके साथ ही थर्ड कैंपस में IPD की कोई व्यवस्था ही नहीं।
तो वही कॉलेज कागजों में दावा करता है और कागजों में ही कॉलेज अपने घोड़े दौड़ा रहा हैं। वहीं संबंधित कॉलेज में हर रोज़ 300+ OPD मरीज और दर्जनों IPD भर्तियां होती हैं।”
कॉलेज में मरीज जीरो, लेकिन रिकॉर्ड में दर्ज हैं हजारों।
राजधानी जैसे मुख्य कार्यालय में सेम आयुर्दिक कॉलेज में जब आप जाकर के देखेंगे तो मरीज शून्य की गिनती में दिखाई देंगे। परंतु जब आप आवक जावक रजिस्ट्रर चेक करेंगे तो आपको सैकड़ों छोड़िए हजारों की संख्या में मरीज़ रिकॉर्ड में दर्ज मिलेंगे।
वहीं संबंधित कॉलेज में विभागों की जिम्मेदारी कुछ गिने-चुने शिक्षक ही अपनी रस्म अदायगी कर रहे हैं और वह भी सिर्फ कागज़ों पर।
एडमिशन “पैकेज डील”में और फीस में खुला खेल
NEET काउंसलिंग के अलावा किसी भी माध्यम से एडमिशन गैरकानूनी है फिर भी कॉलेज छात्रों से 2-4 गुना अधिक फीस वसूल रहा है। लाखों रुपये ऐठ कर कॉलेज प्रबंधक और संचालकों के द्वारा एडवांस सीटो की बुकिंग की जा रही है।
गरीब छात्र शोषण का हो रहें हैं शिकार
कॉलेज में सरकारी नियम के विरुद्ध कार्य करने की प्रणाली के चलते गरीब और मेहनती छात्र छात्राएं शोषण का शिकार हो रहे हैं। जिससे कि गरीब और मेहनती छात्र छात्राओं का उज्जवल भविष्य इस कॉलेज अंधेरे में डाल रहा हैं।
सुरक्षा मानकों जीरो जिसके चलते आमजन को मौत का न्योता मिलना पक्का
राजधानी भोपाल मुख्यालय जैसी जगह पर सेम आयुर्वेदिक कॉलेज का संचालन करने वाले सुरक्षा मानकों की खुले आम धज्जियां उड़ा रहें हैं। कॉलेज में फायर इक्विपमेंट की वैलिडिटी खत्म हैं। जिससे कि खुले तौर पर आमजन को मौत रूपी न्यौता बाटा जा रहा हैं। तो वहीं सेम आयुर्वेदिक कॉलेज में आपदा प्रबंधन भी जीरो दिखाई देता हैं। इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी में घोर लापरवाही बरतना संभवतः आपराधिक लापरवाही मानी जा सकती है।
आख़िर मान्यता कैसे मिली अब सवाल के घेरों में आयोग ..?
जब आयुर्वेदिक सेम अस्पताल बंद पड़ा हुआ हैं, मरीज ही ग़ायब हैं, फैकल्टी कम हैं।
तो फिर आख़िर संबंधित कॉलेज को 300 सीटों की मान्यता किस रसूखदारी के चलते दी गई यह एक बहुत बड़ा प्रश्न वाचक चिह्न हैं..??
अब सवाल यह हैं कि भ्रष्टाचार के चलते या रुपयों की न्योछावर के चलते क्या निरीक्षण टीम ने आँखें बंद कर रखीं हुई हैं। या फिर सरकारी सिस्टम और संबंधित अधिकारियों की मिलिभगत और भ्रष्टाचार के दम पर सम्बंधित कॉलेज को मान्यता प्राप्त दे दी गई।
क्या कहते हैं..नियम बनाम हकीकत (NCIM गाइडलाइन्स)
नियम नंबर 1. सीट -60
आवश्यक फैकल्टी -36
नम्बर 2 OPD – 120
IPD – 36 मरीज
हकीकत (सेम कॉलेज)-
गिने-चुने शिक्षक, मरीज शून्य
2. सीट -100
आवश्यक फैकल्टी -52
OPD – 200
IPD – 60 मरीज
3. सीट – 150
आवश्यक फैकल्टी- 70
OPD -300
IPD – 100
4. सीट – 200
आवश्यक फैकल्टी – 114
OPD -500
IPD – 200
क्लासरूम खाली, शिक्षण अधूरा इसके साथ ही अन्य कोई भी मानक पूरा नहीं।
कॉलेज प्रबंधन ने रखा अपना पक्ष
सेम यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता करण पठेर ने रखा अपना पक्ष
“हम NCIM के नियमों का पालन कर रहे हैं। हॉस्पिटल में OPD/IPD सेवा चल रही है। गांव-गांव कैंप लगाकर सेवा कर रहे हैं। फीस सरकार के नियमों के अनुसार ली जा रही है।”
अब हकीकत से रूबरू होते हैं..
जब रिपोर्टर ने सच्चाई उजागर करनी चाही, तो PRO करण पठेर ने फोन कर कहा: “खबर मत चलाइए, बैठकर मैनेज कर लेते हैं”
यह कॉल रिकॉर्डिंग रिपोर्टर के पास मौजूद है।
तो आखिर क्या संबंधित कॉलेज पोल खोलने वाले पत्रकार को डराया जा रहा है? या रिपोर्टर को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो सकती है।
सवाल कई हैं पर जबाव जीरो
क्या मीडिया की आवाज को खरीदने की कोशिश की जा रही है? या छात्र छात्राओं का भविष्य यूं ही लूटा जाना जारी रहेगा?
आमजन की मांगें..
1. सेम यूनिवर्सिटी की मान्यता तत्काल रद्द की जाए।
2. NCIM और NMC की जांच टीम मौके पर भेजी जाए।
3. संपूर्ण शैक्षणिक और आर्थिक ऑडिट कराया जाए।
4. प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज हो।
5. माननीय सर्वोच्च न्यायालय स्वतः संज्ञान ले।
अब सवालिया निशान यह भी हैं की “शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले विद्यालय को आखिर कब तक लूट का अड्डा बने हुआ देखते रहेंगे।
छात्र, छात्राओं अभिभावक और समाज – सभी की एक ही आवाज जरूरत पड़ी तो सड़कों पर उतरेंगे, लेकिन सच्चाई सामने लाएंगे।”
दैनिक रेवांचल टाइम्स आपसे विशेष अनुरोध करता हैं की यदि आप छात्र, या भूतपूर्व छात्र छात्रा रह चुके हैं, आप अभिभावक या पूर्व स्टाफ हैं। और आपके पास संबंधित कॉलेज की अन्य कोई जानकारी या सबूत हैं – तो आप हमें संपर्क करें। आपका नाम गोपनीय रखा जाएगा।
अब देखना यह बाकी हैं कि लगातार समाचारों की सुर्खियों में बने कॉलेजों में छात्रों से चल रही अबैध बसूली पर रोक लगती है या फिर सब का यू ही चलता रहेगा।