ऐतिहासिक पहल: छिंदवाड़ा जिला बनेगा ‘नो-बर्न ज़ोन’ मॉडल! सुपर सीडर से ‘नरवाई क्रांति’ की शुरुआत!

रेवांचल टाइम्सछिंदवाड़ाअप्रत्याशित वर्षा और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच, छिंदवाड़ा जिले ने पराली (नरवाई) जलाने की प्रथा को पूर्णतः समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। जिला प्रशासन, कृषि एवं कृषि अभियांत्रिकी विभाग ने संयुक्त रूप से छिंदवाड़ा को “नो-बर्न ज़ोन” घोषित करने की ठोस पहल शुरू कर दी है, जिसका लक्ष्य जिले को नरवाई प्रबंधन का राष्ट्रीय मॉडल बनाना है।
कॉर्न हेडर और सुपर सीडर का सफल प्रदर्शन
ग्राम रामगढ़ी में कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा आयोजित “नरवाई प्रबंधन एवं जलवायु अनुकूल कृषि” कार्यशाला इस क्रांति का केंद्र बनी। इस दौरान “कॉर्न हेडर” मशीन से मक्के की कटाई और गहाई का प्रदर्शन किया गया, जिसके तुरंत बाद “सुपर सीडर” मशीन से अगली फसल गेहूं की सीधी बुवाई की गई।
बुवाई में क्रांति उपसंचालक कृषि जितेंद्र सिंह ने बताया कि जो काम पारंपरिक तरीके से 8 से 10 दिन में होता था, वह अब इन तकनीकों से केवल कुछ घंटों में पूरा हो गया है।
किसानों को दोहरा लाभ समय और लागत की बचत यह तकनीक न केवल वायु प्रदूषण को रोकती है, बल्कि मिट्टी की नमी और पोषक तत्वों को भी संरक्षित करती है, जिससे किसानों को सीधा आर्थिक लाभ होता है:
लागत बचत: किसान चंद्रभान रघुवंशी ने बताया कि नई तकनीक से प्रति एकड़ ₹3,000 से ₹5,000 की सीधी बचत हुई है।
तेज बुवाई: बुवाई में देरी की समस्या का प्रभावी समाधान, जो फसल चक्र को बिगाड़ता था।
25,000 हेक्टेयर से कई गुना अधिक का लक्ष्य
सहायक कृषि यंत्री समीर पटेल ने बताया कि विभाग का लक्ष्य छिंदवाड़ा को देश के लिए मॉडल जिला बनाना है। पिछले वर्ष 25,000 हेक्टेयर क्षेत्र में जीरो-टिलेज तकनीक से सफल बुवाई की गई थी। इस वर्ष इस रकबे को कई गुना बढ़ाकर अधिक किसानों को जलवायु-अनुकूल तकनीकों से जोड़ने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
सुपर सीडर पर भारी अनुदान
संभागीय कृषि यंत्री G C मार्सकोले ने किसानों के लिए एक बड़ी राहत की घोषणा की। विभाग द्वारा सुपर सीडर मशीन पर ₹1,20,000/- का अनुदान दिया जा रहा है, और अब तक जिले में लगभग 300 सुपर सीडर अनुदान पर दिए जा चुके हैं। अनुदान हेतु पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया अभी भी जारी है।
विभाग की अपील “नरवाई क्रांति” में भागीदारी करें
जिला कलेक्टर हरेंद्र नारायण के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ने समस्त किसानों से अपील की है कि वे पर्यावरण संरक्षण, लागत बचत और स्थायी कृषि की दिशा में कदम बढ़ाते हुए इस “नरवाई क्रांति” में भागीदार बनें। निरंतर जनजागरूकता और तकनीकी सहायता के माध्यम से छिंदवाड़ा को “ज़ीरो-बर्न फार्मिंग” का राष्ट्रीय मॉडल बनाया जाएगा।
इस कार्यशाला में भारतीय किसान संघ के प्रांतीय मंत्री मेर सिंह जी, kvk प्रमुख डॉ श्रीवास्तव, एसडीओ कृषि पटवारी और इफको से रजत पाटीदार सहित कई उन्नत कृषक और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।