मंडला में पर्यावरण का काला खेल अवैध स्टोन क्रेशर बन रहे प्रदूषण के गुनहगार

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नियम-कानून ताक पर, खनिज माफिया बेलगाम, बंजर हो रही उपजाऊ ज़मीन, उड़ रही धूल से तबाह हो रहा जनजीवन
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रेवांचल टाईम्स – मंडला,आदिवासी बाहुल्य जिला जो प्रकृति संपदा से परिपूर्ण है पर धीरे धीरे अब माफियाओं की नज़र में आ चुका हैं, जिले में पर्यावरण संरक्षण और खनिज कानूनों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। शासन-प्रशासन की ढिलाई और मिलीभगत के बीच अवैध स्टोन क्रेशरों का साम्राज्य तेजी से फैलता जा रहा है। ये क्रेशर न सिर्फ खनिज संपदा की लूट में लगे हैं, बल्कि धूल और शोर प्रदूषण से ग्रामीण जीवन को तबाह कर रहे हैं।
गांवों के खेत बंजर हो रहे हैं, पशु-पक्षी तक प्रभावित हैं और लोगों की सांसें जहरीली धूल से भर चुकी हैं। जहां देखो वहां बिना अनुमति, बिना सुरक्षा मानकों और बिना पर्यावरणीय मंजूरी के क्रेशर मशीनें गरज रही हैं।
कानून बने मज़ाक — पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की खुली धज्जियाँ
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और खनिज नियम 2019 के तहत जो प्रावधान अनिवार्य हैं — जैसे धूल नियंत्रण यंत्र (डस्ट अरेस्टर), पानी का छिड़काव, वृक्षारोपण, मजदूरों का पंजीयन और सुरक्षा बीमा उनका पालन कहीं नहीं किया जा रहा। क्रेशर संचालक बिना किसी डर के कानून की रेखा को कुचल रहे हैं, और अधिकारी खामोश हैं।
धूल से ढके गांव — बंजर हो रही उपजाऊ मिट्टी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि दिन-रात धूल के घने बादल गांवों को ढक लेते हैं।
खेतों की उपज घट रही है, जल स्रोत सूख रहे हैं और पशुधन बीमार पड़ रहा है। ध्वनि प्रदूषण इतना अधिक है कि ग्रामीणों की नींद और सेहत दोनों पर कहर बरपा है।
जांच और रॉयल्टी पर सवाल — कौन कर रहा है निगरानी?
इन क्रेशरों के पास प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का वैध प्रमाणपत्र है या नहीं, इसकी कोई नियमित जांच नहीं हो रही। न ही यह देखा जा रहा है कि ये संचालक खनिज रॉयल्टी का भुगतान समय पर कर रहे हैं या नहीं। रात के अंधेरे में अवैध उत्खनन और गुप्त संचालन की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन कार्रवाई शून्य है।
बंद हों अवैध क्रेशर, बचे हमारी सांसें
ग्रामीणों ने आवाज उठाई है कि यदि शासन वाकई पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर है, तो सभी क्रेशरों की संयुक्त जांच टीम गठित की जाए। जो क्रेशर बिना अनुमति, दूरी और सुरक्षा मानकों के विरुद्ध संचालित हो रहे हैं, उन्हें तत्काल बंद कराया जाए। लोगों ने यह भी मांग की है कि लापरवाह अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
नियमों की किताब में साफ़ है लिखा — लेकिन अमल कहां है?
स्टोन क्रेशर संचालन के लिए आवश्यक प्रमुख नियम इस प्रकार हैं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्थापना और संचालन की अनुमति अनिवार्य। आवासीय क्षेत्रों, नदियों, सड़कों और वन क्षेत्रों से निर्धारित दूरी बनाए रखना अनिवार्य। ग्राम सभा की अनुमति (एनओसी) आवश्यक। परिसर मं धूल नियंत्रण, पानी का छिड़काव और वृक्षारोपण अनिवार्य। कर्मचारियों की स्वास्थ्य जांच और सुरक्षा उपकरण सुनिश्चित करना जरूरी। इन प्रावधानों का पालन न करने पर क्रेशर का लाइसेंस रद्द, भारी जुर्माना, और तत्काल बंदी का आदेश दिया जा सकता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चुप्पी — प्रशासनिक मिलीभगत के संकेत
जिले में खनिज माफिया और अधिकारियों की सांठगांठ अब खुला रहस्य बन चुकी है। नियम, पर्यावरण, और जनता की आवाज — सब इस गठजोड़ के नीचे दब चुके हैं। लोग सवाल कर रहे हैं आखिर कब जागेगा प्रशासन? कब बचेगा मंडला का पर्यावरण?
कब रुकेगा यह अवैध खनन का काला कारोबार? कब होगी इन खनिज माफियाओं पर कार्यवाही

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